CG Education: बलरामपुर-रामानुजगंत जिले के वाड्रफनगर विकासखंड अंतर्गत स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी/हिन्दी माध्यम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रघुनाथनगर में मिडिया स्कूल के मासूम तूल पकड़ गया है।
मिली जानकारी तीन दिन पहले कुछ बच्चे से 'संस्कार सरिता' नाम की कि स्कूल में उन्हें ये किताबें दी गई है, और इन्हें पढ़कर परीक्षा देने के लिए कहा गया है। किताब पर आसाराम की तस्वीर देखकर अभिभावकों ने सवाल उठाए, इसके बाद स्कूल में इस तरह की पुस्तकें बांटे जानें को लेकर विरोध शुरू हो गया।
बिना अनुमति किताबें बांटने का आराेप
अभिभावकों का आरोप है कि गंभीर आपराधिक मामलें में दोषसिध्द आसाराम से जुड़ी विचारधारा की किताबें सरकारी स्कूल के बच्चों को देना उचित नही है। उनका दावा है कि आसाराम से जुड़े एक संगठन की ओर से प्राचार्य को ये पुस्तकें उपलब्ध कराई थी।
विवाद बढ़ने पर वापस जमा कराई गईं किताबें
मामले को लेकर अभिभावकों की नाराजगी बढ़ने के बाद स्कूल में बांटी गई अधिकांश किताबें वापस जमा करा ली गईं। इसके बावजूद परिजन संतुष्ट नहीं हुए। उनका कहना है कि सरकारी शिक्षण संस्थान में बच्चों को दी जाने वाली पुस्तकों के चयन में तय नियमों और विभागीय अनुमति का पालन होना चाहिए। उन्होंने मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है।प्राचार्य को हटाया, तीन दिन में जांच रिपोर्ट मांगी
विवाद की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र निरापुरे ने संबंधित स्कूल के प्राचार्य को पद से हटा दिया है। साथ ही विकासखंड शिक्षा अधिकारी को पूरे मामले की विस्तृत जांच करने और तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में किताबें स्कूल तक कैसे पहुंचीं, उनके वितरण की अनुमति किसने दी और विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए पढ़ने के निर्देश दिए गए थे या नहीं, जैसे बिंदुओं की पड़ताल की जा सकती है।
जांच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई
जिला शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होने की उम्मीद है। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण ने सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को बांटी जाने वाली पुस्तकों के चयन और उनकी स्वीकृति प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।







