Chhattisgarh News: नगर पालिक निगम बीरगांव में दिसंबर में प्रस्तावित आम चुनाव से पहले प्रारंभिक मतदाता सूची में कई खामियां सामने आई हैं। सूची में पुरुषों और महिलाओं के नामों में गड़बड़ी के साथ वार्डों से जुड़ी त्रुटियों की शिकायतें भी मिल रही हैं। इस बीच निर्वाचन विभाग की वेबसाइट बंद होने से मतदाताओं की परेशानी बढ़ गई है।बीरगांव के 40 वार्डों में रहने वाले 80 हजार से अधिक मतदाताओं को अपनी जानकारी जांचने में दिक्कत हो रही है। ऑनलाइन सूची उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को ऑफलाइन मतदाता सूची पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ऐसे में अपने नाम, वार्ड और अन्य विवरणों की पुष्टि करना आसान नहीं रह गया है।
परिसीमन के बाद वार्डों में बदले नाम, कई प्रविष्टियां भी गलत
प्रारंभिक मतदाता सूची को लेकर सामने आ रही शिकायतों में वार्डों के बदलाव से जुड़ी समस्याएं प्रमुख हैं। परिसीमन के बाद कई मतदाताओं के नाम दूसरे वार्डों में दर्ज होने की बात कही जा रही है। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि विधानसभा की मतदाता सूची में नाम होने के बावजूद उनका नाम निगम के संबंधित वार्ड की सूची में नहीं मिल रहा है। इसके अलावा दोहरी प्रविष्टियों की शिकायतें भी सामने आई हैं। यदि निर्वाचन विभाग की वेबसाइट चालू रहती, तो मतदाता मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से घर बैठे अपनी और परिवार के अन्य सदस्यों की जानकारी जांच सकते थे। पोर्टल बंद होने से यह सुविधा फिलहाल प्रभावित है और सूची में संभावित त्रुटियों की पहचान करना भी मुश्किल हो रहा है।
दावा-आपत्ति की तारीख पांच नवंबर तक बढ़ाने की मांग
प्रारंभिक मतदाता सूची पर दावा-आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर निर्धारित है। लेकिन वेबसाइट बंद होने के कारण मतदाताओं को निर्धारित समय में अपनी प्रविष्टियों की जांच करने और गलतियों को सुधारने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। कांग्रेस नेता और एमआईसी सदस्य इकराम अहमद ने निर्वाचन विभाग से वेबसाइट की तकनीकी समस्याएं दूर कर इसे तत्काल शुरू करने की मांग की है। उन्होंने दावा-आपत्ति की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर से बढ़ाकर 5 नवंबर 2026 करने की मांग भी रखी है, ताकि प्रभावित मतदाताओं को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।मतदाता सूची की गड़बड़ियों पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
मतदाता सूची में गड़बड़ियां आने के बाद एसडीएम कार्यालय में तहसीलदार ने बैठक ली। जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण ने इस पर ऐतराज जताते सवाल उठाए। पदाधिकारियों ने कहा कि यह कहीं 'वोट चोरी' की सुनियोजित साजिश तो नहीं है। जिलाध्यक्ष, कांग्रेस ग्रामीण राजेंद्र पप्पू बंजारे ने सवाल उठाया कि मतदाताओं के वास्तविक निवास वाले वार्ड के बजाय अन्य वार्डों में नाम दर्ज होना और नाम काटे जाने की शिकायतें मतदाताओं के मताधिकार को प्रभावित करने का प्रयास लगती हैं। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कांग्रेस नेता विशाल शर्मा ने कहा कि नागरिकों को बार-बार फार्म-6 भरने के लिए मजबूर करने के बजाय प्रशासन को खुद रिकार्ड की जांच कर त्रुटियां सुधारनी चाहिए।







