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CGPSC भर्ती घोटाले की जांच
CGPSC भर्ती घोटाले की जांच
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CGPSC भर्ती घोटाला : CBI के बाद ED ने भी कसी जांच की रफ्तार

CGPSC-2021 भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच अब मनी लॉन्ड्रिंग तक पहुंच गई है। ED ने 47 लाख रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की जांच शुरू की है, जबकि CBI पहले ही 29 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। जांच एजेंसियों को 500 करोड़ रुपये से अधिक के भ्रष्टाचार की आशंका है और 12 से ज्यादा भर्ती परीक्षाएं जांच के दायरे में हैं।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
27 Jul 2026, 11:44 AM
रायपुर
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की वर्ष 2021 की भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं का मामला अब और गंभीर होता जा रहा है। पूर्व PSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के खिलाफ चल रही जांच के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच शुरू कर दी है। 
जांच एजेंसियों का अनुमान है कि भर्ती प्रक्रिया में हुए भ्रष्टाचार का दायरा 500 करोड़ रुपए से अधिक हो सकता है। आरोप है कि डिप्टी कलेक्टर, DSP समेत कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर चयन के बदले अभ्यर्थियों से भारी रकम वसूली गई। 

47 लाख रुपए के लेनदेन पर ED की नजर

जांच में सामने आया है कि एक पावर प्लांट के डायरेक्टर के बेटे और बहू के चयन के बदले 47 लाख रुपए ग्रामीण विकास समिति नामक संस्था के खाते में ट्रांसफर किए गए थे। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस संस्था से तत्कालीन PSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के परिजनों और करीबी लोगों का संबंध था। संस्था की चेयरपर्सन उनकी पत्नी पद्मनी सिंह सोनवानी थीं। आरोप है कि इस राशि को एक ऐसे कॉलेज के लिए CSR दान के रूप में दिखाया गया, जिसका वास्तविक अस्तित्व ही नहीं था। इसी वित्तीय लेनदेन को लेकर ED मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है। 

CBI जांच में 1.3 करोड़ की वसूली का दावा

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट के अनुसार, कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर ने मुख्य परीक्षा का पेपर उपलब्ध कराने और चयन सुनिश्चित कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से करीब 1.3 करोड़ रुपए वसूले। मामले का खुलासा होने के बाद से उत्कर्ष फरार बताया जा रहा है। हाईकोर्ट उसकी अग्रिम जमानत पहले ही खारिज कर चुका है और अब ED भी उसकी तलाश में जुटी हुई है। CBI ने जांच के दौरान करीब 47 लाख रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े लेनदेन के भी साक्ष्य मिलने का दावा किया है। 

12 से ज्यादा भर्ती परीक्षाएं जांच के दायरे में

जांच एजेंसियों के अनुसार, टामन सिंह सोनवानी के कार्यकाल में आयोजित CGPSC भर्ती के अलावा सहायक प्रोफेसर सहित 12 से अधिक भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों की जांच की जा रही है। CGPSC-2021 के तहत 171 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया आयोजित हुई थी। फरवरी 2022 में प्रारंभिक परीक्षा, मई 2022 में मुख्य परीक्षा और इसके बाद इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी की गई थी। 11 मई 2023 को जारी अंतिम चयन सूची में 170 अभ्यर्थियों का चयन हुआ था। आरोप है कि डिप्टी कलेक्टर और DSP जैसे प्रतिष्ठित पदों के लिए प्रति सीट 75 लाख से 1 करोड़ रुपए तक की मांग की गई। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन PSC अध्यक्ष ने अपने रिश्तेदारों, कुछ नेताओं और अधिकारियों के परिजनों को लाभ पहुंचाने के लिए चयन प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया। 

29 आरोपी, CBI और ED दोनों की जांच जारी

इस मामले में पूर्व PSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, तत्कालीन सचिव जेके ध्रुव, परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर, उद्योगपति श्रवण कुमार गोयल, उनके बेटे शशांक गोयल, बहू भूमिका कटियार, नितेश सोनवानी, साहिल सोनवानी, निशा कोसले, दीपा आदिल, सुमित ध्रुव और कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर समेत कुल 29 लोगों को आरोपी बनाया गया है। फिलहाल मामले की जांच CBI और ED दोनों एजेंसियां अलग-अलग पहलुओं से कर रही हैं और आगे कई नए खुलासों की संभावना जताई जा रही है।
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