नए सिरे से मेरिट लिस्ट बनाने की बात
आंकड़ों के 'ड्राई रन' में उजागर हुआ फर्जीवाड़ा
मामले की तह तक पहुंचने के लिए EOW ने जब पूरे डेटा का पुनर्मूल्यांकन (ड्राई रन) किया, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए:
अपात्रों की एंट्री, योग्य बाहर: डेटा जांच में पाया गया कि 17 ऐसे उम्मीदवारों का चयन कर लिया गया जो नियमों के तहत अपात्र थे, जबकि 17 योग्य उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया से ही बाहर कर दिया गया था।
मेरिट में हेरफेर: कुल 56 अभ्यर्थियों के पद और उनकी मेरिट रैंकिंग में गड़बड़ी पाई गई।
साक्षात्कार (Interview) में खेल: 52 ऐसे लोगों को इंटरव्यू के लिए कॉल लेटर भेजे गए जो इसके हकदार नहीं थे, वहीं इतने ही पात्र उम्मीदवारों को इंटरव्यू देने का अवसर तक नहीं मिला।
वर्षा डोंगरे केस और स्केलिंग का विवादित गणित
इस पूरे मामले को उजागर करने में कवर्धा की वर्षा डोंगरे, चमन सिन्हा और रविंद्र सिंह की कानूनी लड़ाई की मुख्य भूमिका रही। वर्षा डोंगरे को परीक्षा में 1290.41 अंक मिलने के बावजूद चयन सूची से बाहर कर दिया गया था।
जांच के दौरान उनकी प्रोफाइल शीट में 'आबकारी उप निरीक्षक' पद के विकल्प पर ओवरराइटिंग और काट-छांट पाई गई। बाद में फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि वह लिखावट और स्याही वर्षा डोंगरे की नहीं थी।
इसके अलावा, परीक्षा में अपनाई गई 'स्केलिंग पद्धति' में भी बड़े पैमाने पर अंतर देखा गया:
असमान अंक आबंटन: मानव विज्ञान विषय में जिन दो अलग-अलग अभ्यर्थियों के वास्तविक अंक 200 थे, स्केलिंग के बाद एक का स्कोर 170.01 कर दिया गया और दूसरे का 239.22 कर दिया गया।
आरक्षण नियमों का उल्लंघन: जांच में यह भी सामने आया कि एक अनारक्षित (General) वर्ग के अभ्यर्थी को फर्जी तरीके से एसटी (ST) कोटा दिखाते हुए राज्य लेखा सेवा का पद दे दिया गया था।
राज्य बनने के बाद कुल 147 पदों पर हुई यह पहली ही भर्ती परीक्षा अब EOW की इस संभावित चार्जशीट के बाद एक बार फिर राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज करने वाली है।

