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CGPSC 2003 recruitment scam investigation (Image Source: AI Photo)
CGPSC 2003 recruitment scam investigation (Image Source: AI Photo)
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CGPSC 2003 Scam: 21 साल पुराने मामले में EOW की बड़ी तैयारी, 15 बड़े अफसरों पर गिर सकती है गाज

CGPSC 2003 Scam: छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद हुई पहली CGPSC 2003 भर्ती परीक्षा का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। EOW-ACB इस कथित भर्ती घोटाले में जल्द ही अदालत में चार्जशीट दाखिल कर सकता है। जांच में मेरिट हेरफेर, अपात्र अभ्यर्थियों के चयन और इंटरव्यू प्रक्रिया में गड़बड़ी जैसे कई तथ्य सामने आने का दावा किया गया है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 13 Sep 2026, 11:25 AM · अपडेट: 29 Oct 2026, 11:44 PM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
CGPSC 2003 Scam: छत्‍तीसगढ़ राज्‍य गठन के बाद आयोजित पहली राज्‍य सेवा भर्ती परीक्षा (CGPSC 2003) का विवाद एक बार फिर तूल पकड़ता नजर आ रहा है। वर्ष 2003 में हुए इस कथित भर्ती घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW-ACB) अब अंतिम दौर की कार्रवाई की तैयारी में है। जांच एजेंसी इसी महीने के भीतर अदालत में चालान (चार्जशीट) दाखिल कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में शामिल रहे लगभग 15 से अधिक तत्‍कालीन जिम्‍मेदार अफसरों के नाम इस चार्जशीट में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, कोर्ट में औपचारिक दस्तावेज पेश करने से पहले जांच एजेंसी को राज्‍य सरकार से अभियोजन (Prosecution Sanction) की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। 

नए सिरे से मेरिट लिस्ट बनाने की बात 

तत्कालीन भाजपा सरकार के दौरान आयोजित इस परीक्षा पर शुरुआत से ही धांधली के आरोप लगते रहे हैं। ईओडब्ल्यू की विस्तृत जांच के बाद मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंचा था, जहां चीफ जस्टिस की बेंच ने जांच एजेंसी की रिपोर्ट पर मुहर लगाते हुए नए सिरे से मेरिट लिस्ट (चयन सूची) बनाने की बात कही थी। इसके बाद वर्ष 2016 में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां हाईकोर्ट के आदेश पर फिलहाल स्थगन (स्टे) लगा हुआ है। इस बीच, दो दशकों के लंबे अंतराल में इस विवादित परीक्षा से निकले कई अफसर पदोन्नत होकर वरिष्ठ पदों तक पहुंचे, जिनमें से कुछ को IAS कैडर भी मिल चुका है।

आंकड़ों के 'ड्राई रन' में उजागर हुआ फर्जीवाड़ा

मामले की तह तक पहुंचने के लिए EOW ने जब पूरे डेटा का पुनर्मूल्यांकन (ड्राई रन) किया, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए:

  • अपात्रों की एंट्री, योग्य बाहर: डेटा जांच में पाया गया कि 17 ऐसे उम्मीदवारों का चयन कर लिया गया जो नियमों के तहत अपात्र थे, जबकि 17 योग्य उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया से ही बाहर कर दिया गया था।

  • मेरिट में हेरफेर: कुल 56 अभ्यर्थियों के पद और उनकी मेरिट रैंकिंग में गड़बड़ी पाई गई।

  • साक्षात्कार (Interview) में खेल: 52 ऐसे लोगों को इंटरव्यू के लिए कॉल लेटर भेजे गए जो इसके हकदार नहीं थे, वहीं इतने ही पात्र उम्मीदवारों को इंटरव्यू देने का अवसर तक नहीं मिला।

    वर्षा डोंगरे केस और स्केलिंग का विवादित गणित

इस पूरे मामले को उजागर करने में कवर्धा की वर्षा डोंगरे, चमन सिन्हा और रविंद्र सिंह की कानूनी लड़ाई की मुख्य भूमिका रही। वर्षा डोंगरे को परीक्षा में 1290.41 अंक मिलने के बावजूद चयन सूची से बाहर कर दिया गया था।

जांच के दौरान उनकी प्रोफाइल शीट में 'आबकारी उप निरीक्षक' पद के विकल्प पर ओवरराइटिंग और काट-छांट पाई गई। बाद में फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि वह लिखावट और स्याही वर्षा डोंगरे की नहीं थी।

इसके अलावा, परीक्षा में अपनाई गई 'स्केलिंग पद्धति' में भी बड़े पैमाने पर अंतर देखा गया:

  • असमान अंक आबंटन: मानव विज्ञान विषय में जिन दो अलग-अलग अभ्यर्थियों के वास्तविक अंक 200 थे, स्केलिंग के बाद एक का स्कोर 170.01 कर दिया गया और दूसरे का 239.22 कर दिया गया।

  • आरक्षण नियमों का उल्लंघन: जांच में यह भी सामने आया कि एक अनारक्षित (General) वर्ग के अभ्यर्थी को फर्जी तरीके से एसटी (ST) कोटा दिखाते हुए राज्य लेखा सेवा का पद दे दिया गया था।

राज्य बनने के बाद कुल 147 पदों पर हुई यह पहली ही भर्ती परीक्षा अब EOW की इस संभावित चार्जशीट के बाद एक बार फिर राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज करने वाली है।

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