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Chhattisgarh ED: DMF फंड में 31 करोड़ के कमीशन और CGPSC घोटाले पर जांच तेज, आरोपी छाबड़ा 5 दिन की रिमांड पर
Chhattisgarh ED: DMF फंड और CGPSC भर्ती परीक्षा से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामलों में ED की कार्रवाई तेज हो गई है। DMF मामले में सतपाल सिंह छाबड़ा की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी ने करोड़ों रुपये के कथित लेन-देन की जांच शुरू की है। वहीं, CGPSC मामले में अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपये वसूले जाने और पेपर लीक के आरोपों की भी पड़ताल जारी है।
Chhattisgarh ED: भ्रष्टाचार के दो बड़े मामलों—जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) फंड और CGPSC भर्ती परीक्षा—में प्रवर्तन निदेशालय (ED) का शिकंजा तेजी से कसता जा रहा है। जांच एजेंसी ने DMF में कमीशनखोरी और पैसों के हेरफेर के आरोप में सतपाल सिंह छाबड़ा को गिरफ्तार कर पांच दिनों की रिमांड पर ले लिया है। वहीं, CGPSC परीक्षा में अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपये ऐंठने के मामले में भी बड़े खुलासे सामने आ रहे हैं। ED की जांच में दावा किया गया है कि सतपाल सिंह छाबड़ा DMF से जुड़े सप्लाई के कामों में मुख्य लाइजनर (बिचौलिया) और वित्तीय समन्वयक के रूप में सक्रिय था। उसने इस पूरे सिंडिकेट के जरिए करीब 31 करोड़ रुपये की मोटी रकम वसूली।
वेंडरों से वसूलता का कमीशन
एजेंसी के मुताबिक, छाबड़ा का मुख्य काम DMF के तहत सप्लाई वाले कार्यों की पहचान करना, अपने पसंदीदा वेंडरों को काम दिलाना, वर्क आर्डर जारी करवाना और उनका भुगतान पास कराना था। इसके एवज में वह वेंडरों से तय कमीशन वसूलता था और फिर उस रकम को सिंडिकेट के अन्य सदस्यों के बीच बांटता था। वर्ष 2019-20 से 2023-24 के दौरान छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों को DMF ट्रस्ट के तहत करीब 9,188.20 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ था।
फर्जीवाड़े के लिए बीज निगम का इस्तेमाल
नियम के मुताबिक, इस पैसे का इस्तेमाल प्रभावित क्षेत्रों के विकास में होना था। लेकिन आरोप है कि बजट का एक बड़ा हिस्सा ऐसी फर्जी और महंगी सप्लाई योजनाओं में मोड़ दिया गया, जहां आसानी से कमीशन निकाला जा सके। इस फर्जीवाड़े के लिए राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के रास्ते का इस्तेमाल किया गया। रेट कांट्रैक्ट के तहत मिलने वाले आर्डरों की बेस वैल्यू पर एजेंट 25 से 50 प्रतिशत तक का भारी कमीशन ऐंठते थे। ED का चौंकाने वाला खुलासा
इस काली कमाई का कुछ हिस्सा सरकारी अधिकारियों और असरदार नेताओं तक भी पहुंचाया जाता था। ED ने बैंक खातों के रिकॉर्ड के आधार पर बताया कि छाबड़ा ने यह 31 करोड़ रुपए अपने परिवार के सदस्यों, HUF (हिंदू अविभाजित परिवार) और अपने नियंत्रण वाली संस्थाओं के खातों में ट्रांसफर किए थे। दूसरी ओर, CGPSC (2020-21) की राज्य सेवा परीक्षा में धांधली को लेकर भी ED ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच में सामने आया है कि कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने चयन का झांसा देकर अभ्यर्थियों से 3 करोड़ रुपये से ज्यादा वसूले। इनमें से करीब 2.80 करोड़ रुपये अकेले अनिल चंद्राकर नाम के शख्स को सौंपे गए थे।
पेपर लीक और मामा के रसूख का इस्तेमाल
निजी बिचौलियों का नेटवर्क: डिप्टी कलेक्टर और DSP जैसे बड़े पदों पर चयन कराने के लिए चुनिंदा अभ्यर्थियों और रिश्तेदारों तक पेपर लीक करके पहुंचाए गए।
CM कार्यालय के रसूख का इस्तेमाल: मुख्य आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर ने तत्कालीन मुख्यमंत्री के निजी सहायक और अपने मामा के.के. चंद्रवंशी के पद और प्रभाव का डर दिखाकर अभ्यर्थियों से नकद वसूली की। इसमें तत्कालीन CM कार्यालय के एक OSD के नाम के इस्तेमाल का भी जिक्र है।
डिजिटल सबूतों से खुली पोल: 3 जून को हुई छापेमारी में उत्कर्ष के मोबाइल से कई डिजिटल साक्ष्य मिले। बैंक खातों के लेन-देन और बयानों के आधार पर ही उसे PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत गिरफ्तार किया गया।
5 ठिकानों पर छापेमारी, दस्तावेज जब्त
ED की रायपुर जोनल टीम ने हाल ही में 1 सितंबर को रायपुर, दुर्ग, धमतरी और जशपुर स्थित 5 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ दबिश दी थी। इस दौरान कई संदिग्ध दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, बैंक रिकॉर्ड और जायदाद से जुड़ी फाइलें जब्त की गई हैं। फिलहाल ED दोनों ही मामलों में पैसों के सोर्स और इससे जुड़े अन्य सफेदपोशों की भूमिका खंगाल रही है।