दृढ़ इच्छाशक्ति और शासकीय योजनाओं का सही संयोजन किसी भी प्रयास को बड़ी सफलता में बदल सकता है। धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के ग्राम करगा निवासी अंगेश्वर कुर्रे ने इसे साबित कर दिखाया है। पशुधन में नस्ल सुधार, वैज्ञानिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन अपनाकर उन्होंने डेयरी व्यवसाय को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बनाया है।
एक समय अंगेश्वर पारंपरिक तरीके से देशी गायों का पालन करते थे। दूध का उत्पादन कम होने के कारण परिवार की आमदनी सीमित थी। इसी दौरान पशुपालन विभाग से मिले मार्गदर्शन ने उनके व्यवसाय को नई दिशा दी। विभाग की सलाह पर उन्होंने कृत्रिम गर्भाधान के जरिए देशी गायों में नस्ल सुधार की प्रक्रिया शुरू की।
गिर गाय खरीदने के लिए मिला 93 हजार का अनुदान
डेयरी व्यवसाय का विस्तार करने के लिए अंगेश्वर ने वर्ष 2024-25 में राज्य डेयरी उद्यमिता योजना का लाभ लिया। योजना के तहत उन्होंने दो उन्नत नस्ल की गिर गाय खरीदीं। इसके लिए उन्हें 66.6 प्रतिशत यानी 93,240 रुपये का शासकीय अनुदान मिला।
90 प्रतिशत अनुदान पर मिला पशु आहार
फार्म में अब करीब 25 उन्नत नस्ल की गायें
आज अंगेश्वर के फार्म में जर्सी, गिर, साहिवाल, थारपारकर और रेड सिंधी जैसी उन्नत नस्लों की करीब 25 गायें हैं। वैज्ञानिक तकनीकों और संतुलित आहार प्रबंधन की मदद से फार्म में प्रतिदिन 35 से 40 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है।
हर महीने 40 से 50 हजार रुपये की आय
पैरा कट्टी से बढ़ाई अतिरिक्त आमदनी
डेयरी के साथ अंगेश्वर ने पैरा कट्टी मशीन भी खरीदी है। वे पैरा कट्टी बनाकर बेचने का पूरक व्यवसाय चला रहे हैं। इससे अतिरिक्त आमदनी होने के साथ ही 2 से 3 स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला है।
कमाई से बनाया परिवार के लिए पक्का मकान
डेयरी व्यवसाय से मिली आर्थिक मजबूती ने अंगेश्वर के परिवार का जीवन बदल दिया है। उन्होंने अपनी कमाई से परिवार के लिए पक्का मकान बनवाया है और बच्चों को बेहतर शिक्षा दे रहे हैं। उनकी सफलता बताती है कि वैज्ञानिक पशुपालन, नस्ल सुधार और शासकीय योजनाओं का सही लाभ उठाकर ग्रामीण युवा डेयरी व्यवसाय से आत्मनिर्भर बन सकते हैं।