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Crop Diversification Scheme in Villages Along the Riverbank (Image Source: CGDPR)
Crop Diversification Scheme in Villages Along the Riverbank (Image Source: CGDPR)
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Chhattisgarh Agriculture: नदी किनारे के 152 गांवों में बदलेगा खेती का तरीका, 38 हजार किसानों को मिलेगा फायदा

Chhattisgarh Agriculture: महानदी, पैरी, सोंढूर और खारून नदी किनारे बसे 152 गांवों में फसल विविधीकरण की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। करीब 38 हजार किसानों के 30,841.96 हेक्टेयर कृषि रकबे में भूमि और जल उपलब्धता के अनुसार धान के साथ दलहन, तिलहन, सब्जी, औषधीय और फलदार फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा।

कीर्तिमान डेस्क | धनेश्वरी साहू
03 Sep 2026, 04:32 PM
रायपुर
Chhattisgarh Agriculture: जिले में नदी तट से लगे गांवों में खेती को अधिक लाभदायक, टिकाऊ और जलवायु अनुकूल बनाने के लिए फसल विविधीकरण की व्यापक कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसके तहत महानदी, पैरी, सोंढूर और खारून नदी किनारे स्थित 152 गांवों में भूमि की ऊंचाई, जलभराव, मिट्टी, जल निकासी और सिंचाई की उपलब्धता के आधार पर फसल प्रणाली विकसित की जाएगी। योजना से करीब 38 हजार किसान और 30,841.96 हेक्टेयर कृषि रकबा लाभान्वित होगा।
जिले में महानदी के किनारे 97, पैरी नदी के किनारे 18, सोंढूर के किनारे 23 तथा खारून नदी के किनारे 14 गांव चिन्हित किए गए हैं। सितंबर-अक्टूबर से फसल विविधीकरण अभियान प्रारंभ करने की कार्ययोजना है। किसानों की मांग और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार नवंबर-दिसंबर में दलहन-तिलहन के बीज तथा औषधीय पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।

धान के साथ बढ़ेंगे खेती के नए विकल्प

कार्ययोजना का उद्देश्य धान की खेती को समाप्त करना नहीं, बल्कि किसानों को एक ही फसल पर निर्भरता से बाहर निकालकर खेती को विविधीकृत करना है। अधिक जलभराव वाले क्षेत्रों में धान प्रमुख फसल रहेगी, जबकि कटाई के बाद भूमि की क्षमता के अनुरूप रबी और ग्रीष्मकालीन फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। अच्छी जल निकासी वाली भूमि में धान के बाद मक्का, मूंग-उड़द तथा ऊंची भूमि में दलहन-तिलहन, सब्जी, औषधीय फसल, फलदार पौधों और चारा आधारित मॉडल विकसित किए जाएंगे। भूमि की स्थिति के अनुसार तीन जोन प्रस्तावित किए गए हैं। अति निम्न एवं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में धान के साथ खस, बच और लेमन ग्रास जैसी औषधीय फसलों को प्रोत्साहित किया जाएगा। मध्यम ऊंचाई एवं मौसमी जलभराव वाले क्षेत्रों में धान के बाद कम अवधि की दलहन, तिलहन और सब्जियां ली जाएंगी। वहीं ऊंची एवं बेहतर जल निकासी वाली भूमि में औषधीय फसल, दलहन-तिलहन, सब्जी, फलदार पौधों तथा जैविक-प्राकृतिक खेती के क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। नदी किनारे के गांवों में रबी फसलों के लिए 5,458.90 हेक्टेयर क्षेत्र प्रस्तावित है। इसमें चना 3,244.10, गेहूं 662.80, सरसों 472.50, मक्का 243.90, उड़द 214.80, मूंग 178.70, मूंगफली 142.20, सूरजमुखी 39 तथा औषधीय फसल 110.60 हेक्टेयर सहित अन्य फसलें शामिल हैं।

जल संरक्षण के साथ खेती को मिलेगा आधार

फसल विविधीकरण के साथ जल संरक्षण पर भी विशेष जोर रहेगा। महानदी किनारे धमतरी एवं मगरलोड विकासखंड में 36 नालों की सफाई, 19 फार्म पॉण्ड, 17 सोकपिट तथा मगरलोड में 7 चेकडैम/एमआईटी सुधार के कार्य प्रस्तावित हैं। 75 नदी तटवर्ती गांवों में तटीय घास एवं पौधरोपण किया जाएगा। खेत से नाले और नाले से नदी तक पानी के अनियंत्रित बहाव को रोकने के लिए माइक्रो-वाटरशेड आधारित कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

कलेक्टर ने कहा-किसान की आय और खेती की स्थिरता बढ़ाना लक्ष्य

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि नदी किनारे के क्षेत्रों में खेती की परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं। इसलिए स्थानीय भू-आकृति और पानी की उपलब्धता के अनुरूप गांववार माइक्रो-प्लान तैयार कर फसल चयन किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि “फसल विविधीकरण का उद्देश्य किसानों को उनकी जमीन के अनुरूप अधिक विकल्प उपलब्ध कराना, खेती के जोखिम को कम करना और आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करना है। जल संरक्षण, सिंचाई सुविधा, फसल प्रदर्शन और किसान प्रशिक्षण को साथ लेकर ऐसी कृषि प्रणाली विकसित की जाएगी, जो वर्तमान के साथ भविष्य की जरूरतों के लिए भी टिकाऊ हो।” योजना के तहत प्रत्येक गांव में भूमि, ढाल, जलभराव, मिट्टी, नाला एवं भूजल की स्थिति का सर्वे कर माइक्रो-प्लान तैयार किया जाएगा। धमतरी, कुरूद, मगरलोड और नगरी में उड़द-मूंग, मूंगफली, रागी, सरसों, मक्का और चना जैसी फसलों के प्रदर्शन भी प्रस्तावित हैं। इससे किसानों को खेत में ही वैकल्पिक फसलों के उत्पादन और लाभ का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा।
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