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हाईकोर्ट में ध्वनि प्रदूषण मामले की सुनवाई
हाईकोर्ट में ध्वनि प्रदूषण मामले की सुनवाई
बिलासपुर

ध्वनि प्रदूषण रोक पर छत्तीसगढ़ सरकार सख्त, अधिनियम में होंगे कड़े बदलाव

तेज डीजे और ध्वनि विस्तारक यंत्रों से बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने त्योहारों के दौरान डीजे और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए। शासन ने बताया कि पुराने छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 में संशोधन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और नए कानून में कड़े प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 04 Aug 2026, 12:14 PM · अपडेट: 02 Nov 2026, 12:47 PM
बिलासपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

छत्तीसगढ़ में तेज आवाज वाले डीजे, ध्वनि विस्तारक यंत्रों और बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि आने वाले समय में त्योहारों का दौर शुरू होने वाला है। ऐसे में डीजे, लाउडस्पीकर और अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर विशेष निगरानी रखने की जरूरत है। कोर्ट ने शासन से ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी मांगी है। सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से बताया गया कि छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 में संशोधन की प्रक्रिया जारी है। सरकार पुराने कानून में बदलाव कर इसे और प्रभावी बनाने की तैयारी कर रही है। शासन ने कोर्ट को जानकारी दी कि संशोधित कानून में ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए पहले से अधिक कड़े प्रावधान शामिल किए जाएंगे, जिससे नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

कानून में होंगे बड़े बदलाव

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में प्रस्तुत शपथपत्र में बताया कि ध्वनि प्रदूषण की समस्या को देखते हुए पुराने कोलाहल नियंत्रण अधिनियम में व्यापक संशोधन किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि वर्तमान कानून में कई कमियां हैं, जिसके कारण ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती। संशोधन के लिए गठित ड्राफ्ट कमेटी ने कानून के हर प्रावधान की गहन समीक्षा की है। कमेटी ने अधिकारियों, विशेषज्ञों और विभिन्न हितधारकों से मिले सुझावों को शामिल करते हुए नए नियमों का प्रारूप तैयार किया है। शासन के अनुसार, संशोधित कानून का ड्राफ्ट अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है और जल्द ही इसे आगे की प्रक्रिया के लिए भेजा जाएगा।

बैठकों के बाद तैयार हुआ प्रस्ताव

सरकार ने बताया कि कोलाहल नियंत्रण अधिनियम में बदलाव के लिए गठित ड्राफ्ट कमेटी ने वर्ष 2026 में कई महत्वपूर्ण बैठकें की हैं। कमेटी की बैठकें 11 मई, 2 जून, 8 जून और 15 जून को आयोजित की गईं, जिसमें कानून की प्रत्येक धारा पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठकों के दौरान जमीनी स्तर पर आने वाली समस्याओं, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुभवों तथा आम लोगों से जुड़े सुझावों को ध्यान में रखते हुए संशोधन प्रस्ताव तैयार किया गया है। कमेटी ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि नया कानून व्यवहारिक होने के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण लगाने में सक्षम हो।

मंजूरी के बाद पेश होगा 

गृह विभाग के अनुसार, ड्राफ्ट कमेटी द्वारा अंतिम रूप दिए जाने के बाद संशोधन प्रस्ताव को राज्य मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद संशोधन विधेयक को छत्तीसगढ़ विधानसभा में रखा जाएगा।

विधानसभा से पारित होने के बाद संशोधित कानून पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि नए कानून के माध्यम से त्योहारों, धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके और लोगों को राहत मिल सके।

हाईकोर्ट ने मांगी प्रगति रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने शासन से पूछा है कि कानून संशोधन की दिशा में अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं और इसे लागू करने के लिए आगे की क्या योजना है। कोर्ट ने अगली सुनवाई में इस संबंध में ताजा प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

याचिकाकर्ताओं ने सुनवाई के दौरान तर्क दिया कि वर्तमान कोलाहल नियंत्रण कानून काफी कमजोर है। उनका कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर केवल 500 से 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता है, जो प्रभावी रोक लगाने के लिए पर्याप्त नहीं है।

लाउडस्पीकर पर सख्ती की मांग

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि कई मामलों में नियम तोड़ने के बावजूद साउंड सिस्टम जब्त नहीं किए जाते और न ही कठोर कार्रवाई होती है। इसके कारण आयोजकों में कानून का डर कम हो गया है और ध्वनि प्रदूषण की समस्या लगातार बनी हुई है। उन्होंने मांग की कि नए कानून में जुर्माने की राशि बढ़ाने के साथ-साथ ध्वनि विस्तारक यंत्रों की जब्ती और अन्य सख्त प्रावधान शामिल किए जाएं, ताकि लोगों को तेज आवाज से होने वाली परेशानी से राहत मिल सके।

त्योहारों से पहले बढ़ेगी जिम्मेदारी

हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद आगामी त्योहारों के दौरान प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी बढ़ने वाली है। माना जा रहा है कि नए नियम लागू होने तक मौजूदा कानून के तहत ही डीजे और ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर निगरानी रखी जाएगी। ध्वनि प्रदूषण से बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों को होने वाली परेशानी को देखते हुए सरकार और प्रशासन पर प्रभावी नियंत्रण व्यवस्था बनाने का दबाव बढ़ गया है।

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