Chhattisgarh Supervisor Protest: 30 साल से नहीं सुलझा वेतन का मुद्दा, पर्यवेक्षक संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी
Chhattisgarh Supervisor Protest: छत्तीसगढ़ महिला एवं बाल विकास पर्यवेक्षक संघ ने 30 साल से लंबित वेतन विसंगति, ग्रेड-पे सुधार और पदोन्नति जैसी मांगों को लेकर एक माह का अल्टीमेटम दिया है।
प्रकाशित: 14 Oct 2026, 02:28 PM· 3 मिनट पढ़ने का समय
आरंग
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Chhattisgarh Supervisor Protest: छत्तीसगढ़ में महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षकों का गुस्सा अब फूट पड़ा है। पिछले तीन दशकों से चली आ रही वेतन विसंगति और अन्य मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ महिला एवं बाल विकास पर्यवेक्षक संघ ने सरकार को सख्त अल्टीमेटम दिया है। संघ ने साफ कर दिया है कि अगर एक महीने के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगी।
30 साल पुरानी मांग और मंत्रियों के आश्वासन के बाद भी निराशा
संघ की प्रांताध्यक्ष ऋतु परिहार ने इस संबंध में नवा रायपुर के अटल नगर स्थित महिला एवं बाल विकास संचालनालय को औपचारिक पत्र भेजा है। उनका कहना है कि पर्यवेक्षक पिछले 30 सालों से ग्रेड-पे सुधार, क्रमोन्नत वेतनमान और पदोन्नति जैसी बुनियादी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इस बीच, पिछले साल 28 मार्च को 10 दिवसीय ऑनलाइन हड़ताल के बाद महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने संघ के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। तब मंत्री ने इन मांगों को जायज ठहराते हुए जल्द दूर करने का भरोसा दिलाया था। लेकिन डेढ़ साल गुजर जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे महिला कर्मचारियों में गहरा रोष है।
मांग पत्र इन मुख्य समस्याओं से जूझ रहीं पर्यवेक्षक
वेतन विसंगति और आठवां वेतनमान: संघ का अंदेशा है कि यदि समय रहते विसंगति दूर नहीं की गई, तो आगामी आठवें वेतनमान के दौरान इन्हें बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
बजट की कमी और भत्ते: बीते दो सालों से कई जिलों में पर्याप्त बजट न मिलने के कारण टीए (यात्रा भत्ता) और अन्य सुविधाओं के मिलने में दिक्कतें आ रही हैं।
मुनगा एप का विरोध: संघ की उपाध्यक्ष पूसमति चौहान ने 'मुनगा एप' पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि महिला एवं बाल विकास विभाग का मुख्य दायित्व महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा की देखरेख करना है, ऐसे में पौधों की फोटो अपलोड करने जैसे कृषि और उद्यानिकी विभाग से जुड़े काम महिला पर्यवेक्षकों पर थोपना सही नहीं है।
ऑनलाइन कार्यों के बहिष्कार की तैयारी
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि तय समयसीमा में उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, पोषण ट्रैकर और महतारी वंदन योजना जैसे तमाम महत्वपूर्ण ऑनलाइन काम ठप कर दिए जाएंगे। इसके साथ ही, एक दिन की सांकेतिक हड़ताल से लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन तक की रूपरेखा तैयार की जा रही है। संघ ने अब महिला एवं बाल विकास मंत्री से मुलाकात के लिए समय मांगा है और दो-ूक शब्दों में कह दिया है कि वेतन विसंगति के मामले में अबकी बार 'आर या पार' की लड़ाई लड़ी जाएगी। राज्य सरकार ने साल 2026 को 'महतारी गौरव वर्ष' घोषित किया है, ऐसे में महिला कर्मचारियों का यह असंतोष विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है।