Nursing Staff Protest: छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान में नर्सिंग कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन के बैनर तले कर्मचारी अस्पताल परिसर की पार्किंग में धरने पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब केवल मौखिक आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि मांगों पर शासन को ठोस आदेश जारी करने होंगे।आंदोलन के बीच मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी होने की बात सामने आई है।
मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
नर्सिंग कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं। एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी अमर ज्योति ने चेतावनी दी कि यदि शासन स्तर पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। एसोसिएशन की सदस्य जागृति तिवारी ने भी कहा कि कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों के निराकरण का इंतजार कर रहे हैं।
नर्सिंग स्टाफ की प्रमुख मांगें
नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन ने वेतन विसंगतियों को दूर करने, भत्तों में बढ़ोतरी और कर्मचारियों की भर्ती सहित कई मांगें रखी हैं।
प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
पदनाम में बदलाव: स्टाफ नर्स का नाम बदलकर नर्सिंग ऑफिसर और नर्सिंग सिस्टर का नाम सीनियर नर्सिंग ऑफिसर किया जाए।
भत्तों में बढ़ोतरी: ग्रेड पे की विसंगतियां दूर करने के साथ नर्सिंग भत्ता 7,200 रुपए और ड्रेस भत्ता 1,800 रुपए प्रतिमाह किया जाए।
नियमित भर्ती: 1,000 नियमित स्टाफ नर्सों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया जाए।
पदोन्नति और वेतनमान: लंबित पदोन्नति तथा समयमान वेतनमान के आदेश जारी किए जाएं।
संविदा कर्मचारियों को प्राथमिकता: नियमित भर्ती में संविदा कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाए।
न्यूनतम वेतन: संविदा कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन 40,000 रुपए प्रतिमाह निर्धारित किया जाए।
नर्सिंग प्रशिक्षुओं का स्टाइपेंड: प्रशिक्षुओं का स्टाइपेंड 1,500 रुपए से बढ़ाकर 15,000 रुपए प्रतिमाह किया जाए।
शासन के फैसले पर टिकी निगाहें
नर्सिंग कर्मचारियों के प्रदर्शन के बीच अब सबकी निगाहें शासन के अगले कदम पर हैं। एसोसिएशन ने मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आगे बढ़ाने के संकेत दिए हैं फिलहाल, मांगों के निराकरण को लेकर शासन की ओर से किसी निर्णय या आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी उपलब्ध नहीं है।







