Wednesday, 14 Oct 2026 भारत
ब्रेकिंग
CGPSC SI Exam: शिक्षक भर्ती के बाद अब सूबेदार और सब-इंस्पेक्टर मुख्य परीक्षा भी टली, अभ्यर्थियों का बढ़ा इंतजार Chhattisgarh Farmers News: धान के दाम 3,358 रुपए करने की मांग, 1700 करोड़ के बोनस पर फंसा पेंच, 27 को मंत्रालय घेराव की चेतावनी CJP Leaders Detained: जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने को लेकर हंगामा, आशुतोष रांका और सौरव दास समेत कई गिरफ्तार Raipur Cyber Fraud: ऑनलाइन रिफंड के चक्कर में जालसाजों ने लगाया चूना, 513 रुपए वापस पाने के लिए शख्स ने गंवाए 97 हजार CG Education Department: बीएसके ऐप से खुली फाइलों की गांठें, 264 शिक्षकों के रिकॉर्ड गायब, विभाग में हड़कंप CGPSC SI Exam: शिक्षक भर्ती के बाद अब सूबेदार और सब-इंस्पेक्टर मुख्य परीक्षा भी टली, अभ्यर्थियों का बढ़ा इंतजार Chhattisgarh Farmers News: धान के दाम 3,358 रुपए करने की मांग, 1700 करोड़ के बोनस पर फंसा पेंच, 27 को मंत्रालय घेराव की चेतावनी CJP Leaders Detained: जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने को लेकर हंगामा, आशुतोष रांका और सौरव दास समेत कई गिरफ्तार Raipur Cyber Fraud: ऑनलाइन रिफंड के चक्कर में जालसाजों ने लगाया चूना, 513 रुपए वापस पाने के लिए शख्स ने गंवाए 97 हजार CG Education Department: बीएसके ऐप से खुली फाइलों की गांठें, 264 शिक्षकों के रिकॉर्ड गायब, विभाग में हड़कंप
W 𝕏 f
होम › बालोद › निर्माण अधूरा, रिकॉर्ड में पूरा : स्कूल परिसर में…
बोरगांव में अधूरे DMF कार्य पर सवाल
बोरगांव में अधूरे DMF कार्य पर सवाल
बालोद

निर्माण अधूरा, रिकॉर्ड में पूरा : स्कूल परिसर में अधूरे निर्माण का आरोप, DMF कार्यों की जांच की मांग तेज

बोरगांव ग्राम पंचायत में डीएमएफ मद से स्वीकृत 13.86 लाख रुपये के साइकिल स्टैंड और कांक्रीटीकरण कार्य में अनियमितता के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों और सरपंच का कहना है कि निर्माण कार्य अधूरा और गुणवत्ताहीन है, जबकि दस्तावेजों में इसे पूर्ण दिखाकर भुगतान कर दिया गया। जनपद पंचायत सीईओ ने साक्ष्य देखने के बाद जांच कराने की बात कही है। अब पूरे मामले में प्रशासन की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर सभी की नजर बनी हुई है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 04 Jul 2026, 03:00 PM · अपडेट: 11 Oct 2026, 11:23 PM
बालोद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
जिले के आदिवासी विकासखंड की ग्राम पंचायत बोरगांव में जिला खनिज न्यास (DMF) से कराए जा रहे निर्माण कार्यों में अनियमितता का मामला सामने आया है। वर्ष 2025 में बोरगांव हाई स्कूल परिसर में विद्यार्थियों के लिए साइकिल स्टैंड शेड और कांक्रीटीकरण कार्य के लिए 13 लाख 86 हजार रुपये स्वीकृत किए गए थे। 
इस कार्य की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत को सौंपी गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंचायत की बजाय डौंडी के ठेकेदार विशाल जैन ने स्वयं निर्माण कार्य अपने हाथ में ले लिया। आरोप यह भी है कि आधा-अधूरा निर्माण करने के बाद दस्तावेजों में काम को पूर्ण दर्शा दिया गया। 

सरपंच ने लगाए आरोप

ग्रामीणों के अनुसार निर्माण कार्य में गुणवत्ता के मानकों का पालन नहीं किया गया। आरोप है कि स्कूल की पुरानी बाउंड्री वॉल पर केवल चार ईंटें जोड़कर उसी के ऊपर पिलर खड़े कर साइकिल स्टैंड शेड तैयार कर दिया गया। वहीं सामने की ओर बनाए गए 14 कॉलम भी कमजोर गुणवत्ता के बताए जा रहे हैं। परिसर में सीमित हिस्से में सीसी रोड का निर्माण
स्कूल परिसर में अधूरे निमार्ण कार्य का आरोप
कर पूरे काम को पूरा दिखा दिया गया। निर्माण स्थल पर लगे सूचना बोर्ड में कार्य पूर्ण होने की तिथि 12 जून 2026 दर्ज है, जबकि मौके पर अब भी करीब 50 प्रतिशत काम अधूरा बताया जा रहा है। ग्राम पंचायत बोरगांव की सरपंच देवकी बाई कोठपरिया का कहना है कि ठेकेदार विशाल जैन ने उन्हें बताया था कि वह पंचायत में तीन निर्माण कार्य लेकर आया है। उन्होंने कई बार स्कूल की पुरानी दीवार पर साइकिल स्टैंड बनाने का विरोध किया, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। सरपंच का आरोप है कि पंचायत के खाते में राशि आते ही ठेकेदार ने चेक के माध्यम से भुगतान ले लिया। अब निर्माण अधूरा और घटिया गुणवत्ता का है, जबकि एजेंसी ग्राम पंचायत होने के कारण भविष्य में किसी भी जांच की जिम्मेदारी उन्हीं पर आएगी। यह मामला केवल बोरगांव तक सीमित नहीं बताया जा रहा है।
क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि आदिवासी विकासखंड में डीएमएफ के अधिकांश कार्यों पर ठेकेदारों का प्रभाव बना हुआ है। 

ठेकेदारों पर ग्रामीणों के आरोप

आरोप है कि ठेकेदार स्वीकृत कार्यों का हवाला देकर पंचायतों से निर्माण कार्य अपने हाथ में ले लेते हैं और बाद में अधूरे या निम्न गुणवत्ता के काम छोड़ देते हैं। इससे पंचायत प्रतिनिधियों को जवाबदेही और जांच जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ समय पहले भी कई पंचायतों में वाटर रिमूवल प्लांट लगाने के नाम पर केवल 4×6 फीट के छोटे बॉक्स स्थापित कर लाखों रुपये का भुगतान निकाल लिया गया था। आरोप है कि उस मामले में भी संबंधित ठेकेदारों पर कार्रवाई करने के बजाय पंचायत प्रतिनिधियों को ही नोटिस जारी किए गए थे, जिससे प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठे थे। जब पूरे मामले से जुड़े दस्तावेज और मौके की तस्वीरें जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) डी.डी. मांडले के सामने रखी गईं, तो उन्होंने शुरुआत में किसी अनियमितता से इनकार किया। हालांकि साक्ष्य देखने के बाद उन्होंने कहा कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्ताहीन पाया जाता है तो उसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मूल्यांकन और सत्यापन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। 

जांच पर टिकी सबकी नजर

मामला सामने आने के बाद अब लोगों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित निर्माण कार्य और जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है, यह देखने वाली बात होगी। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक धन से होने वाले विकास कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
क्या यह खबर उपयोगी लगी?
शेयर करें अपने दोस्तों तक पहुंचाएं
WhatsApp Telegram
इस लेख में कोई त्रुटि दिखी? सुधार का अनुरोध करें
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें — ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
कीर्तिमान
छत्तीसगढ़ ▾
सभी छत्तीसगढ़ ›
रायपुर संभाग ▾
दुर्ग संभाग ▾
बिलासपुर संभाग ▾
सरगुजा संभाग ▾
बस्तर संभाग ▾
देश ▾
विदेश
सरकारी सूचना ▾
राजनीति ▾
खेल ▾
मनोरंजन ▾
कारोबार ▾
कीर्तिमान विशेष ▾
तकनीक शिक्षा सेहत धर्म यात्रा राशिफल डार्क/लाइट मोड डॉ. नीरज गजेंद्र डॉ. नीरज गजेंद्र
वीडियो
अभी कोई वीडियो उपलब्ध नहीं है
अभी कोई रील उपलब्ध नहीं है
टिप्पणियाँ
शेयर करें
Clip & Share

अगली खबर के लिए ऊपर और पिछली खबर के लिए नीचे स्वाइप करें

सावधान: संवेदनशील सामग्री
इस अनुभाग में अपराध, हिंसा, दुर्घटना या अन्य संवेदनशील विषयों से संबंधित समाचार हो सकते हैं। क्या आप इसे देखना चाहते हैं?
ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
पुश नोटिफिकेशन चालू करें