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Copper at a record level of $14,533 per tonne (Image Source: AI Genrated)
Copper at a record level of $14,533 per tonne (Image Source: AI Genrated)
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Copper Price : तांबे का भाव 14,533 डॉलर प्रति टन के रिकॉर्ड स्तर पर, जानें भारत पर असर

Copper Price : कॉपर की कीमतों में सोमवार को जोरदार उछाल देखने को मिला। दुनिया के प्रमुख कमोडिटी बाजार लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर कॉपर का भाव बढ़कर 14,533 डॉलर प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गया। इसके साथ ही इसने जनवरी में बने 14,527.50 डॉलर प्रति टन के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। हालांकि, रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद कीमतों में थोड़ी नरमी आई और कॉपर करीब 0.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ 14,518 डॉलर प्रति टन के आसपास कारोबार करता रहा।

कीर्तिमान डेस्क | रोशनी पटेल
08 Sep 2026, 11:23 AM
नई दिल्ली
Copper Price: कॉपर की कीमतों में सोमवार को जोरदार उछाल देखने को मिला। दुनिया के प्रमुख कमोडिटी बाजार लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर कॉपर का भाव बढ़कर 14,533 डॉलर प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गया। इसके साथ ही इसने जनवरी में बने 14,527.50 डॉलर प्रति टन के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। हालांकि, रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद कीमतों में थोड़ी नरमी आई और कॉपर करीब 0.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ 14,518 डॉलर प्रति टन के आसपास कारोबार करता रहा। 

सप्लाई चिंता और कमजोर डॉलर से मिल रहा कीमतों को सहारा 

कॉपर की कीमतों में इस तेजी की सबसे बड़ी वजह वैश्विक सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता मानी जा रही है। खासतौर पर अमेरिका के बाहर कॉपर की उपलब्धता कम होने की आशंका ने बाजार पर असर डाला है। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर में कमजोरी ने भी कॉपर समेत अन्य धातुओं की कीमतों को मजबूती दी है। डॉलर कमजोर होने पर दूसरी मुद्राओं में खरीदारी करने वाले निवेशकों के लिए डॉलर में कीमत वाले मेटल सस्ते पड़ते हैं, जिससे मांग बढ़ने में मदद मिलती है।  

अमेरिका में कॉपर का स्टॉक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा 

कॉपर बाजार में इस समय अमेरिका और बाकी दुनिया के बीच बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। अमेरिका में कॉपर का भंडार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुका है। COMEX के गोदामों में कॉपर का स्टॉक करीब 7,66,795 शॉर्ट टन यानी लगभग 6.96 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। माना जा रहा है कि संभावित अमेरिकी आयात शुल्क की आशंका के चलते ट्रेडर्स और उत्पादकों ने बड़ी मात्रा में कॉपर अमेरिका भेजना शुरू कर दिया था। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक टैरिफ को लेकर स्थिति साफ नहीं होती, तब तक कॉपर की कीमतों में मजबूती बनी रह सकती है और अमेरिका की ओर धातु की सप्लाई जारी रह सकती है। 

अमेरिका के बाहर घट रहा कॉपर का भंडार 

जहां अमेरिका में कॉपर का स्टॉक बढ़ रहा है, वहीं दुनिया के अन्य हिस्सों में इसकी उपलब्धता घटती दिखाई दे रही है। लंदन मेटल एक्सचेंज में कैंसल्ड वारंट्स का स्तर 51 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसका मतलब है कि 1.21 लाख टन से ज्यादा कॉपर आने वाले समय में एक्सचेंज की सप्लाई व्यवस्था से बाहर जा सकता है। वहीं, चीन के शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज के गोदामों में कॉपर का स्टॉक मार्च के मध्य से करीब 85 प्रतिशत घटकर 63,000 टन रह गया है। यह जनवरी 2024 के बाद का सबसे निचला स्तर है।

चीन में घटता स्टॉक बढ़ा रहा बाजार की चिंता

चीन दुनिया का सबसे बड़ा कॉपर उपभोक्ता है। ऐसे में वहां कॉपर के भंडार में तेज गिरावट ने वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर चीन जैसे बड़े बाजार में स्टॉक लगातार कम होता रहा और उत्पादन व सप्लाई में सुधार नहीं आया, तो आने वाले समय में कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।  

कॉपर में तेजी आने का मुख्या कारण 

कॉपर की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंता है। अमेरिका में बढ़ता स्टॉक, अमेरिका के बाहर घटती उपलब्धता, कमजोर डॉलर और चीन समेत दुनिया में बढ़ती औद्योगिक मांग ने कॉपर के भाव को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा दिया है।

दुसरे बेस मेटल्स में भी दिखी तेजी 

कॉपर की बढ़ती कीमतों का असर अन्य बेस मेटल्स पर भी देखने को मिला। सोमवार को जिंक 1.1 प्रतिशत बढ़कर 3,988 डॉलर प्रति टन, जबकि एल्युमिनियम 0.7 प्रतिशत चढ़कर 3,315 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया। इसके अलावा टिन की कीमत 0.4 प्रतिशत बढ़कर 55,100 डॉलर प्रति टन हो गई। हालांकि, दूसरी ओर निकेल 0.7 प्रतिशत गिरकर 16,725 डॉलर प्रति टन और लेड 0.3 प्रतिशत कमजोर होकर 1,903 डॉलर प्रति टन पर आ गया। 

आगे भी जारी रह सकती है कॉपर में तेजी 

फिलहाल कॉपर बाजार में अमेरिका में बढ़ता स्टॉक और अमेरिका के बाहर घटती उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। अगर वैश्विक स्तर पर सप्लाई को लेकर दबाव आगे भी जारी रहता है, तो कॉपर की कीमतों में तेजी का रुख बने रहने की संभावना है। बाजार की नजर अब उत्पादन, मांग और सप्लाई से जुड़े अगले संकेतों पर टिकी हुई है।
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