बागबाहरा ब्लॉक स्थित सुदूर वनांचल ग्राम बोडराबांधा का उप-स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों स्वास्थ्य सेवाओं के बजाय अवैध वसूली के केंद्र के रूप में कुख्यात नर्स अनीता वर्मा हो गया है। यहां पदस्थ स्टाफ नर्स अनीता वर्मा पर प्रसूताओं को डरा-धमकाकर मोटी रकम वसूलने और उन्हें निजी अस्पतालों में भेजने का गंभीर आरोप लगा है। ग्रामीणों की शिकायत और प्रारंभिक जांच में मामले की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।
ग्राम पंचायत के सरपंच रुपेश बरिहा ने बताया कि गांव की करीब 12 से अधिक पीड़ित प्रसूताओं का आरोप है कि नर्स अनीता वर्मा डिलीवरी के समय परिजनों में भय पैदा कर देती हैं। वे कहती हैं, बच्चा पेट में उल्टा है, स्थिति गंभीर है, इसे बाहर ले जाना पड़ेगा। मजबूरी में गरीब ग्रामीण अपनी जमीनें गिरवी रखकर या गहने बेचकर रुपये देते हैं। नॉर्मल डिलीवरी के बावजूद परिजनों से 5,000 से 17,000 रुपए तक की अवैध वसूली की जा रही है।
आवेदन की कॉपीदूरस्थ क्षेत्र की मजबूरी का फायदा उठाने का आरोप
पैसा न देने पर नर्स द्वारा अभद्र भाषा का प्रयोग और गाली-गलौज करने की शिकायतें भी सामने आई हैं। बोडराबांधा क्षेत्र बागबाहरा मुख्यालय से 25 किमी और जिला मुख्यालय से 32 किमी दूर घने जंगलों के बीच स्थित है। यहां से निकटतम दूसरा स्वास्थ्य केंद्र 10 किमी दूर है और महतारी एक्सप्रेस (102) को पहुंचने में डेढ़ घंटे लग जाते हैं। नर्स इसी मजबूरी का फायदा उठाकर 90% आदिवासी और मजदूर वर्ग की प्रसूताओं को हाई रिस्क बताकर निजी नर्सिंग होम रेफर कर देती हैं, जहां से उन्हें कमीशन मिलने की आशंका है। अब देखना यह है कि ग्रामीणों की प्रमुख मांग नर्स का तत्काल ट्रांसफर और उचित जांच पर प्रशासन कितना सख्त रुख अपनाता है।25 साल से एक ही केंद्र में पदस्थ होने पर सवाल
बीएमओ ने बताया कि डॉ. बीएस बढ़ाई ने टीम भेजकर जांच कराई, जिसमें ग्रामीणों के आरोप सही पाए गए हैं। बीएमओ ने कहा है कि जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जा रही है, जिसके बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उधर, नर्स अनीता वर्मा ने आरोपों को निराधार बताया है, हालांकि उन्होंने मरीजों को निजी अस्पताल ले जाने की बात स्वीकार की है।
25 साल से एक ही केंद्र पर पदस्थ है सरकारी नियमानुसार स्टाफ नर्स का ट्रांसफर हर 3 साल में अनिवार्य है, लेकिन अनीता वर्मा यहां करीब 25 साल से पदस्थ हैं। लंबे समय तक एक ही जगह जमे रहने के कारण उनकी कार्यशैली मनमानी और विवादित हो गई है। जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसव पूर्णतः निशुल्क है और सरकार इसके लिए प्रसूता को प्रोत्साहन राशि भी देती है, लेकिन यहां सरकारी अस्पताल धर्मशाला की तरह चलाया जा रहा है।