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हाथी शावक की मौत से चिंतित ग्रामीणों की भीड़
हाथी शावक की मौत से चिंतित ग्रामीणों की भीड़
रायगढ़

संकट  :  मई में 4 शावकों की मौत से हड़कंप, हाथी संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल

छत्तीसगढ़ में हाथी शावकों की लगातार हो रही मौतें चिंता का विषय बन गई हैं। केवल मई 2026 में डूबने से चार हाथी शावकों की मौत हुई, जबकि जनवरी से अब तक जिले में कुल 9 शावकों की जान जा चुकी है। विशेषज्ञ जल स्रोतों के आसपास निगरानी की कमी, बढ़ते विचरण क्षेत्र और कमजोर सुरक्षा व्यवस्था को संभावित कारण मान रहे हैं।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
01 Jun 2026, 03:21 PM
रायगढ़

सबसे चिंताजनक बात यह है कि केवल मई महीने में ही डूबने से चार हाथी शावकों की मौत हो चुकी है। वहीं जनवरी 2026 से अब तक जिले में कुल 9 हाथी शावकों की जान जा चुकी है। लगातार हो रही इन मौतों ने वन विभाग की निगरानी, ट्रैकिंग और हाथी प्रबंधन प्रणाली की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों के बढ़ते विचरण क्षेत्र, जल स्रोतों के आसपास पर्याप्त निगरानी की कमी और मानव-हाथी संघर्ष वाले इलाकों में सुरक्षा उपायों की कमजोर व्यवस्था ऐसे हादसों की बड़ी वजह बन सकती है। इसके अलावा जंगलों में प्राकृतिक आवास के दबाव और सुरक्षित हाथी कॉरिडोर की कमी को भी महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है।

स्थानीय ग्रामीणों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों ने लगातार हो रही मौतों पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि बार-बार सामने आ रही घटनाओं की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए और हाथियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी एवं दीर्घकालिक संरक्षण रणनीति लागू की जानी चाहिए। फिलहाल वन विभाग की टीम मौके पर जांच कर रही है और मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

हाथी संरक्षण व्यवस्था

लगातार सामने आ रही घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि छत्तीसगढ़ में हाथियों, विशेषकर शावकों की सुरक्षा को लेकर मौजूदा व्यवस्था की गंभीर समीक्षा की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि निगरानी तंत्र को मजबूत करने, संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा उपाय लागू करने और आधुनिक ट्रैकिंग तकनीकों के बेहतर उपयोग से ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन इलाकों में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं अधिक होती हैं, वहां अतिरिक्त सतर्कता और नियमित मॉनिटरिंग की जरूरत है।

प्राकृतिक बाधाओं में फंसने से बढ़ता है खतरा

वन क्षेत्रों में कई जगह गहरे नाले, कीचड़युक्त दलदली क्षेत्र और बारिश के पानी से भरे गड्ढे मौजूद रहते हैं। अनुभवहीन हाथी शावक इन स्थानों में फंस जाते हैं और बाहर निकलने में असमर्थ रहते हैं, जिससे उनकी मौत हो सकती है। उहाथी शावक वयस्क हाथियों की तुलना में कम ताकतवर होते हैं। गहरे पानी, तेज बहाव या फिसलन वाले क्षेत्रों में वे लंबे समय तक खुद को सुरक्षित नहीं रख पाते। कई बार थकावट और घबराहट के कारण भी उनकी जान चली जाती है।

 कॉरिडोर की कमी से बढ़ रहा जोखिम

विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों के पारंपरिक मार्गों में बाधाएं बढ़ने से झुंड नए रास्तों का उपयोग कर रहे हैं। इन रास्तों में कई प्राकृतिक और मानव निर्मित खतरे मौजूद रहते हैं, जिनका सबसे ज्यादा असर छोटे शावकों पर पड़ता है। जंगलों में बढ़ती मानवीय गतिविधियां, खनन क्षेत्र, जलाशयों का विस्तार और प्राकृतिक आवास में बदलाव भी हाथियों के व्यवहार को प्रभावित कर रहे हैं। इससे शावक अक्सर असुरक्षित क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं और दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं।

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