सबसे चिंताजनक बात यह है कि केवल मई महीने में ही डूबने से चार हाथी शावकों की मौत हो चुकी है। वहीं जनवरी 2026 से अब तक जिले में कुल 9 हाथी शावकों की जान जा चुकी है। लगातार हो रही इन मौतों ने वन विभाग की निगरानी, ट्रैकिंग और हाथी प्रबंधन प्रणाली की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों के बढ़ते विचरण क्षेत्र, जल स्रोतों के आसपास पर्याप्त निगरानी की कमी और मानव-हाथी संघर्ष वाले इलाकों में सुरक्षा उपायों की कमजोर व्यवस्था ऐसे हादसों की बड़ी वजह बन सकती है। इसके अलावा जंगलों में प्राकृतिक आवास के दबाव और सुरक्षित हाथी कॉरिडोर की कमी को भी महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों ने लगातार हो रही मौतों पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि बार-बार सामने आ रही घटनाओं की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए और हाथियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी एवं दीर्घकालिक संरक्षण रणनीति लागू की जानी चाहिए। फिलहाल वन विभाग की टीम मौके पर जांच कर रही है और मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
हाथी संरक्षण व्यवस्था
लगातार सामने आ रही घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि छत्तीसगढ़ में हाथियों, विशेषकर शावकों की सुरक्षा को लेकर मौजूदा व्यवस्था की गंभीर समीक्षा की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि निगरानी तंत्र को मजबूत करने, संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा उपाय लागू करने और आधुनिक ट्रैकिंग तकनीकों के बेहतर उपयोग से ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन इलाकों में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं अधिक होती हैं, वहां अतिरिक्त सतर्कता और नियमित मॉनिटरिंग की जरूरत है।
