देश में मानसून की स्थिति को लेकर मौसम विभाग और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की नई तस्वीरों से बड़ा अपडेट सामने आया है। सोमवार, 20 जुलाई को जारी सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक, इस समय देश के करीब 70 प्रतिशत हिस्से पर मानसूनी बादलों का मजबूत घेरा बना हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 25 जुलाई तक उत्तर, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत समेत देश के 60 प्रतिशत से ज्यादा इलाकों में अच्छी और तेज बारिश होगी।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस साल मानसून सीजन में अब तक देश भर में सामान्य से 24 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश में लगातार पानी गिरने से गंगा और यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। वाराणसी के दशाश्वमेध से लेकर पंचगंगा घाट तक के 40 से ज्यादा छोटे मंदिर जलमग्न हो गए हैं और ऐतिहासिक रत्नेश्वर महादेव मंदिर भी पानी में डूब गया है। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में भारी बारिश के बाद सलाल बांध के सभी गेट खोलने पड़े हैं, जिससे चिनाब नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। वहीं उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में लैंडस्लाइड होने से केदारनाथ हाईवे पूरी तरह बंद हो गया है।
पहाड़ी और मैदानी इलाकों में बदला मौसम का मिजाज
देश के कई हिस्सों में इस बार मानसून की शुरुआत थोड़ी धीमी रही थी, जिससे जून और जुलाई के शुरुआती हफ्तों में कई राज्यों को सूखे जैसे हालात का सामना करना पड़ा था। हालांकि, बीते कुछ दिनों में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से उठी नमी के कारण मानसून ने एक बार फिर से रफ्तार पकड़ी है। जहां उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में नदियां उफान पर हैं, वहीं राजस्थान में मानसून पर अचानक ब्रेक लग गया है। बीकानेर संभाग के तीन जिलों में रविवार को तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया और लोग फिर से भीषण गर्मी और उमस झेल रहे हैं।
मौसम विभाग का अलर्ट और पुलिस-प्रशासन की अपील
मौसम विभाग ने सोमवार को राजस्थान के 24 जिलों में बारिश और बिजली गिरने का यलो अलर्ट जारी किया है, जो अगले तीन दिनों तक लागू रहेगा। उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के स्थानीय प्रशासन ने पहाड़ी इलाकों और नदियों के किनारे रहने वाले लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की है। अधिकारियों ने बताया कि केदारनाथ हाईवे पर मलबा हटाने और रास्ता साफ करने का काम तेजी से शुरू कर दिया गया है। इसके साथ ही सलाल बांध के आसपास के मैदानी इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और नदी-नालों के पास न जाने की हिदायत दी गई है।
आम जनजीवन, तीर्थयात्रा और खेती पर असर
पहाड़ी राज्यों में लगातार हो रहे लैंडस्लाइड से केदारनाथ और अन्य धामों की यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों की आवाजाही प्रभावित हुई है। रास्तों के बंद होने से जगह-जगह गाड़ियां फंसी हुई हैं। हालांकि, मैदानी इलाकों में हो रही यह बारिश किसानों के लिए काफी राहत लेकर आई है, क्योंकि धान और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई के लिए पानी की बहुत जरूरत थी। 25 जुलाई तक बारिश का यह दौर जारी रहने से देश में बारिश की कमी का आंकड़ा काफी हद तक कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।