क्या आपका या आपके परिवार का कोई पुराना बैंक खाता, सालों पुरानी बीमा पॉलिसी या म्यूचुअल फंड का पैसा कहीं छूटा हुआ है? अगर हाँ, तो अब आपको अपनी उस लावारिस रकम (Unclaimed Amount) को खोजने के लिए अलग-अलग बैंकों या कंपनियों के चक्कर काटने की बिल्कुल जरूरत नहीं है.
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए एक बेहद खास और एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘कॉमन लैंडिंग पोर्टल फॉर अनक्लेम्ड फाइनेंशियल एसेट्स’ (Common Landing Portal for Unclaimed Financial Assets) आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है.
अब देश का कोई भी नागरिक सीधे इस आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपनी खोई हुई रकम का पता लगा सकता है:
आधिकारिक वेबसाइट:
www.unclaimedassetsportal.in
इस पोर्टल की 5 बड़ी और खास बातें
वन-स्टॉप सॉल्यूशन: यह एक ऐसा एकीकृत (Unified) प्लेटफॉर्म है, जहाँ बैंकिंग, लाइफ व जनरल इंश्योरेंस, शेयर बाजार के डिविडेंड (लाभांश) और म्यूचुअल फंड समेत पूरे वित्तीय सेक्टर का डेटा एक ही जगह उपलब्ध है.
PSBA का मजबूत साथ: इस पोर्टल को पब्लिक सेक्टर बैंक अलायंस (PSBA) के विशेष सहयोग से तैयार किया गया है. यह अलायंस देश के 12 बड़े सरकारी बैंकों का एक साझा और केंद्रीय संगठन है, जो इसकी सुरक्षा और पारदर्शिता को अचूक बनाता है.
समय और भाग-दौड़ की बचत: पहले लोगों को अलग-अलग बैंकों की वेबसाइट (जैसे RBI का उद्गम - UDGAM पोर्टल) या बीमा कंपनियों के दफ्तरों में भटकना पड़ता था. अब पूरा वित्तीय ईकोसिस्टम एक ही प्लेटफॉर्म पर सिमट गया है.
पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी: सरकार ने इस पोर्टल को 'नागरिक-केंद्रित' (Citizen-Centric) बनाया है, ताकि आम आदमी को अपना हक पाने में कोई तकनीकी या प्रशासनिक दिक्कत न आए.
आसान सर्च ऑप्शन: नागरिक अपने नाम, पैन कार्ड, मोबाइल नंबर या पुराने पते जैसी बुनियादी जानकारियों को दर्ज करके सिस्टम में पड़े अपने लावारिस फंड को सर्च कर सकते हैं.
आखिर सरकार को क्यों उठाना पड़ा यह कदम?
पैसे जमा करके भूल जाने या खाताधारक की मृत्यु के बाद कानूनी वारिसों (Nominees) को जानकारी न होने के कारण देश के वित्तीय सिस्टम में हजारों-करोड़ों रुपये लावारिस पड़े हैं.
| वित्तीय सेक्टर | स्थिति (अनुमानित लावारिस रकम) |
| बैंक अकाउंट्स (Unclaimed Deposits) | ₹42,000 करोड़ से अधिक |
| बीमा और म्यूचुअल फंड | ₹25,000 करोड़ से अधिक |
| शेयर और डिविडेंड (IEPF के पास) | ₹10,000 करोड़ से अधिक |
इस विशाल रकम को उसके असली मालिकों या उनके कानूनी वारिसों तक सुरक्षित पहुँचाने के लिए ही इस महा-पोर्टल की शुरुआत की गई है.
"आम आदमी के अधिकारों को लौटाने की कोशिश"
पोर्टल के भव्य लॉन्चिंग के मौके पर वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू ने इसके दूरगामी फायदों पर जोर दिया. उन्होंने कहा:
"इस पोर्टल का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों की डिजिटल सुविधा को कई गुना बढ़ाना है. जब अलग-अलग वित्तीय क्षेत्रों की सर्च सुविधाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर समेट दिया जाता है, तो इससे लोगों का समय और ऊर्जा दोनों बचते हैं. सरकार का यह प्रयास उन सभी लोगों को उनके सही वित्तीय अधिकारों से दोबारा जोड़ने की एक मजबूत कोशिश है, जो किसी वजह से अपनी ही जमा-पूंजी से दूर हो गए थे."
कैसे काम करेगा यह पोर्टल?
लॉगिन करें: सबसे पहले
पर जाएं.www.unclaimedassetsportal.in विवरण दर्ज करें: अपना नाम, मोबाइल नंबर या पैन कार्ड जैसी मांगी गई जानकारी भरें.
सर्च रिज़ल्ट: पोर्टल आपको दिखाएगा कि किस संस्था (बैंक/म्यूचुअल फंड/बीमा) में आपका पैसा लंबित है.
दावा प्रक्रिया (Claim Process): इसके बाद आप संबंधित बैंक या कंपनी के लिंक पर जाकर ज़रूरी दस्तावेज़ (KYC) जमा करके अपनी रकम वापस पा सकते हैं.
सरकार का यह डिजिटल कदम वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) की दिशा में एक मील का पत्थर है. अब कोई भी आम नागरिक बिना किसी एजेंट या बिचौलिए के, सीधे अपने स्मार्टफोन से यह चेक कर सकता है कि सिस्टम में उसका कोई लावारिस फंड मौजूद है या नहीं.
