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पुलिस पर FIR और हथकड़ी का प्रतीकात्मक चित्र
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खुलासा : मध्य प्रदेश के 100 पुलिसकर्मियों पर FIR 5 करोड़ के MD ड्रग्स केस की इनवेस्टिगेशन में फंसा पूरा महकमा 

मुख्य घटना और विवाद: यह पूरा मामला मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस के बीच सीमा विवाद, अधिकार क्षेत्र के उल्लंघन और एक कथित झूठी ड्रग्स कार्रवाई से जुड़ा है। आगर-मालवा (मप्र) पुलिस ने राजस्थान की सीमा में घुसकर एक बड़ी कार्रवाई की थी, जिसे अब राजस्थान की एक अदालत ने प्रथम दृष्टया फर्जी और दुर्भावनापूर्ण माना है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
16 Jun 2026, 04:09 PM
मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश पुलिस महकमे से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। राजस्थान में सनसनी फैलाने वाले एक ड्रग्स मामले में मध्य प्रदेश की आगर-मालवा पुलिस के दो तत्कालीन थाना प्रभारियों (TI) सहित करीब 100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। जिस कार्रवाई को आगर पुलिस ने करोड़ों रुपये की ड्रग्स बरामदगी बताकर अपनी पीठ थपथपाई थी, अब वही कार्रवाई उनके गले की फांस बन गई है। इस खुलासे के बाद दोनों राज्यों के पुलिस विभागों में हड़कंप मच गया है।

इस पूरे मामले में नया और सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब राजस्थान के झालावाड़ जिले में स्थित चौमहला की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने मामले से जुड़ी विस्तृत जांच रिपोर्ट और पेश किए गए अकाट्य साक्ष्यों के आधार पर मध्य प्रदेश पुलिस के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए।

ड्रग्स रेड का पूरा मामला

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की इन गंभीर धाराओं में केस दर्ज

राजस्थान पुलिस ने कोर्ट के निर्देश पर मध्य प्रदेश पुलिस के खिलाफ नए कानून यानी भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत बेहद गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है:

  • धारा 126(2): गलत तरीके से बंधक बनाना (Wrongful Restraint)

  • धारा 115(2): स्वेच्छा से चोट पहुंचाना

  • धारा 131: आपराधिक धमकी देना

  • धारा 201: सबूतों को मिटाना या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करना

  • धारा 329(4): पद का दुरुपयोग और आपराधिक साजिश के तहत संपत्ति को नुकसान

75 वर्षीय बुजुर्ग की शिकायत ने खोली पुलिस की पोल

पुलिस की इस 'सफलता' के पीछे की डरावनी कहानी तब सामने आई जब गिरफ्तार आरोपियों के परिजनों और घाटाखेड़ी गांव के निवासी 75 वर्षीय बुजुर्ग हमीद खान ने हिम्मत दिखाई। उन्होंने पुलिस की इस कार्रवाई को पूरी तरह से झूठा, मनगढ़ंत और स्क्रिप्टेड बताते हुए चौमहला कोर्ट में एक परिवाद (शिकायत) दायर किया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि आगर पुलिस ने किसी भी कानूनी प्रक्रिया (जैसे सर्च वारंट या स्थानीय पुलिस को सूचना) का पालन नहीं किया। करीब 100 पुलिसकर्मी जबरन गांव में घुसे, तोड़फोड़ की और परिजनों को अवैध रूप से अपने साथ उठा ले गए।

डीएसपी स्तर की जांच में बेनकाब हुई मप्र पुलिस

मामले की संवेदनशीलता और अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े विवाद को देखते हुए चौमहला कोर्ट ने प्रारंभिक जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद झालावाड़ के पुलिस उप-अधीक्षक (DySP) स्तर के अधिकारी ने पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच की। जांच रिपोर्ट जब कोर्ट में पेश हुई, तो जज ने पाया कि पहली नजर में ही मध्य प्रदेश पुलिस के अधिकारियों द्वारा गंभीर और संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) किया गया है। इसके बाद कोर्ट ने बिना देर किए एफआईआर का आदेश जारी कर दिया।

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