उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार को हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे सूबे को हिलाकर रख दिया है। कोचिंग संस्थान की इमारत में भड़की आग में 15 मासूम जिंदगियां असमय काल के गाल में समा गईं। इस रूह कँपा देने वाली घटना के बाद आखिरकार प्रशासन की नींद टूटी है और पूरे प्रदेश में अवैध व असुरक्षित कोचिंग सेंटरों के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ दिया गया है।
इसी कड़ी में मंगलवार को संगम नगरी प्रयागराज में प्रशासन का बड़ा हंटर चला। प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) ने नियमों को ताक पर रखकर चल रहे कोचिंग संस्थानों के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार करते हुए मशहूर शिक्षक 'खान सर' की कोचिंग समेत तीन बड़े संस्थानों को सील कर दिया। इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से पूरे इलाके के कोचिंग संचालकों में हड़कंप मच गया है।
छात्रों को बाहर निकाला, फिर जड़ा ताला
यह पूरी कार्रवाई प्रयागराज विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ऋषि राज के सीधे निर्देशन में अंजाम दी गई। मंगलवार दोपहर प्राधिकरण के जोनल अधिकारी गंगेश कुमार सिंह भारी दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। कार्रवाई के दौरान संवेदनशीलता का ध्यान रखते हुए अधिकारियों ने सबसे पहले बेसमेंट और कमरों में पढ़ रहे छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद संस्थान के दफ्तरों को बंद कराकर नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले हिस्से को पूरी तरह सील कर दिया गया।
चालाकी की तो होगी FIR-गेट पर चिपकाया नोटिस
कार्रवाई की वजह क्या रही?
आखिर इन नामचीन कोचिंग संस्थानों पर यह गाज क्यों गिरी? इस पर स्थिति साफ करते हुए जोनल अधिकारी गंगेश कुमार सिंह ने बताया कि कोचिंग संस्थानों का संचालन 'सामुदायिक सुविधा' (Community Facility) की श्रेणी के अंतर्गत आता है। नियमानुसार, इसके लिए भवन का भू-उपयोग (Land Use) स्वीकृत होना अनिवार्य है। लेकिन जांच में पाया गया कि इन इमारतों के लिए ऐसी कोई मंजूरी ली ही नहीं गई थी। सुरक्षा मानकों और कागजी नियमों में गंभीर कमियां पाए जाने के बाद ही यह कड़ा कदम उठाया गया है।
लखनऊ की त्रासदी के बाद शुरू हुआ यह एक्शन बता रहा है कि आने वाले दिनों में नियमों की अनदेखी करने वाले अन्य संस्थानों पर भी प्रशासन का बुलडोजर और सीलिंग की कार्रवाई जारी रह सकती है।