पर्यावरण संरक्षण का संदेश, लगाए गए फलदार और छायादार पौधे
मित्रता दिवस पर मुंगेली में ‘स्टार्स ऑफ टुमॉरो वेलफेयर सोसायटी’ ने अनोखी पहल करते हुए प्रकृति से दोस्ती का संदेश दिया। संस्था ने ‘हरियर मुंगेली–सुघ्घर मुंगेली’ अभियान के तहत 40 पौधों का रोपण किया और उन्हें फ्रेंडशिप बेल्ट बांधकर संरक्षण का संकल्प लिया। नीम, कदम, जामुन, कटहल और गुलमोहर जैसे पौधों को लगाकर पर्यावरण बचाने और हरियाली बढ़ाने का संदेश दिया गया।
कीर्तिमान डेस्क
03 Aug 2026, 12:19 PM
मुंगेली
मित्रता दिवस पर जहां लोग अपने दोस्तों को फ्रेंडशिप बैंड बांधकर रिश्तों को मजबूत करते हैं, वहीं मुंगेली में एक अनोखी और प्रेरणादायक पहल देखने को मिली। यहां ‘स्टार्स ऑफ टुमॉरो वेलफेयर सोसायटी’ ने मित्रता दिवस को प्रकृति के नाम समर्पित करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। संस्था के सदस्यों ने 40 पौधों का रोपण कर उन्हें प्रतीकात्मक रूप से ‘फ्रेंडशिप बेल्ट’ बांधी और उनकी सुरक्षा व संरक्षण का संकल्प लिया। इस आयोजन के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि पेड़-पौधे भी हमारे जीवन के सच्चे मित्र हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के हमें ऑक्सीजन, छाया, फल और जीवन के लिए जरूरी संसाधन प्रदान करते हैं।
अभियान में लगाए गए पौधे
संस्था द्वारा संचालित ‘हरियर मुंगेली–सुघ्घर मुंगेली’ अभियान के दसवें वर्ष के पांचवें चरण के अंतर्गत पुलिस लाइन रोड पर यह विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान नीम, कदम, जामुन, कटहल और गुलमोहर सहित विभिन्न फलदार एवं छायादार पौधे लगाए गए। कार्यक्रम में मौजूद सदस्यों ने पौधों को केवल लगाने तक सीमित नहीं रहने, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने का भी संकल्प लिया। पौधों को फ्रेंडशिप बेल्ट बांधना इस बात का प्रतीक था कि जैसे हम अपने दोस्तों की देखभाल करते हैं, उसी तरह पेड़-पौधों की भी जिम्मेदारी उठानी चाहिए। जागरूकता की भावना विकसित करना भी है।
पर्यावरण संरक्षण की पहल
वृक्ष हमारे जीवन के सबसे निस्वार्थ मित्र
संस्था के संयोजक रामपाल सिंह ने कहा कि वृक्ष केवल हमें प्राणवायु ही नहीं देते, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पेड़ वर्षा चक्र को प्रभावित करते हैं, भू-जल स्तर को बढ़ाने में मदद करते हैं और मिट्टी के कटाव को रोकने में अहम योगदान देते हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में बढ़ते प्रदूषण और घटती हरियाली को देखते हुए प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझना होगा। यदि हर व्यक्ति मित्रता दिवस जैसे विशेष अवसर पर प्रकृति से दोस्ती निभाने के लिए एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल करे, तो यह आने वाले समय के लिए बड़ा सकारात्मक बदलाव साबित हो सकता है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि पौधा लगाना सिर्फ एक दिन का काम नहीं है, बल्कि उसे बड़ा करना और सुरक्षित रखना ही वास्तविक पर्यावरण सेवा है।
प्रकृति को लौटाने का समय आ गया है
संस्था के वरिष्ठ सदस्य गिरीश सुथार और कोमल चौबे ने कहा कि अब समय केवल प्रकृति से लेने का नहीं, बल्कि उसे कुछ लौटाने का भी है। प्रकृति ने हमें शुद्ध हवा, पानी, भोजन और जीवन जीने के लिए जरूरी संसाधन दिए हैं, इसलिए हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाए। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ते तापमान, प्रदूषण और पर्यावरणीय असंतुलन के बीच पौधरोपण एक छोटा लेकिन प्रभावी कदम है। यदि समाज का हर व्यक्ति अपने आसपास हरियाली बढ़ाने का प्रयास करे, तो इसका बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है।
हरियाली बढ़ाने का संकल्प
पौधों की सुरक्षा जरूरी
अभियान के पांचवें चरण के प्रभारी राहुल मल्लाह एवं सह-प्रभारी पवन यादव ने कहा कि वृक्षारोपण तभी सफल माना जाएगा, जब लगाए गए पौधे सुरक्षित रहकर बड़े हों। केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल, पानी और सुरक्षा भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि संस्था पिछले दस वर्षों से ‘हरियर मुंगेली–सुघ्घर मुंगेली’ अभियान के माध्यम से लगातार पौधरोपण और पर्यावरण जागरूकता का कार्य कर रही है। अभियान के जरिए शहर और आसपास के क्षेत्रों में अधिक से अधिक लोगों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
पर्यावरण प्रेमियों की मौजूदगी में हुआ आयोजन
इस विशेष कार्यक्रम में संस्था के संयोजक रामपाल सिंह, सह-संयोजक रामशरण यादव, अध्यक्ष महावीर सिंह, सचिव विनोद यादव, कोषाध्यक्ष धनराज परिहार सहित बड़ी संख्या में संस्था के सदस्य और नगर के पर्यावरण प्रेमी शामिल हुए। सभी सदस्यों ने मिलकर लगाए गए पौधों की देखभाल करने और उन्हें सुरक्षित रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान लोगों में पर्यावरण संरक्षण को लेकर उत्साह भी देखने को मिला। मित्रता दिवस पर आयोजित यह पहल समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश छोड़ गई कि यदि इंसान प्रकृति के साथ सच्ची दोस्ती निभाए, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, हरा-भरा और सुरक्षित पर्यावरण की अमूल्य सौगात दी जा सकती है।