भोपाल के अलग-अलग इलाकों में एटीएम मशीनों से नकदी चोरी करने वाले एक शातिर गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिरोह का मास्टरमाइंड सोनू उर्फ विपुल, आरजीपीवी से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष का छात्र है। पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है और पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है।
मास्टर चाबी और शटर टेम्परिंग तकनीक से करते थे ठगी
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह ने शाहपुरा, कोलार और अशोका गार्डन क्षेत्र के 22 एटीएम से 20 लाख रुपये से अधिक की ठगी की है। आरोपी मास्टर चाबी और शटर टेम्परिंग (कैश ट्रैपिंग) तकनीक का इस्तेमाल कर वारदात को अंजाम देते थे। वे पहले उन एटीएम की रेकी करते थे जहां सुरक्षा गार्ड मौजूद नहीं होता था और फिर उसी एटीएम को निशाना बनाते थे।
कैश डिस्पेंसर में फंसाते थे ग्राहकों के पैसे
आरोपी एटीएम के कैश डिस्पेंसर के पास ऐसी सेटिंग कर देते थे, जिससे ग्राहकों द्वारा निकाली गई नकदी मशीन के अंदर ही फंसकर नीचे गिर जाती थी। इस दौरान गिरोह के कुछ सदस्य दूर से पूरी गतिविधि पर नजर रखते थे। जब ग्राहक को पैसे नहीं मिलते, तब गिरोह का एक सदस्य उसे यह कहकर गुमराह करता था कि मशीन में कैश खत्म हो गया है। ग्राहक के वहां से चले जाने के बाद आरोपी शटर खोलकर फंसी हुई नकदी निकाल लेते और मौके से फरार हो जाते थे।कार और नकदी जब्त, बैंक खाते किए गए फ्रीज
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 50 हजार रुपये नकद और वारदात में इस्तेमाल की गई एक कार बरामद की है। इसके अलावा सभी आरोपियों के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। फिलहाल उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह भोपाल के अलावा अन्य शहरों में भी इसी तकनीक से कई वारदातों को अंजाम दे चुका है।
संदिग्ध एटीएम दिखे तो तुरंत करें शिकायत
पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। यदि किसी एटीएम का कैश स्लॉट टेढ़ा, ढीला या संदिग्ध दिखाई दे, तो उससे लेनदेन करने से बचें। यदि खाते से राशि कट जाए लेकिन नकदी प्राप्त न हो, तो तुरंत संबंधित बैंक और पुलिस को इसकी सूचना दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।