झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा। देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर की तर्ज पर अब रांची का जयपाल सिंह स्टेडियम भी युवाओं के आंदोलन का केंद्र बन गया है। राज्यभर से पहुंचे प्रतियोगी छात्र बीते कई दिनों से यहाँ अनिश्चितकालीन धरने पर डटे हुए हैं। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का स्पष्ट कहना है कि यह लड़ाई महज एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी भर्ती व्यवस्था में खोए विश्वास को वापस पाने की जंग है।
क्यों भड़का अभ्यर्थियों का गुस्सा
छात्रों का सीधा आरोप है कि प्रारंभिक परीक्षा के नतीजे घोषित करने में न तो पूरी पारदर्शिता बरती गई और न ही प्रक्रिया साफ-सुथरी रही। कटऑफ मार्क्स, रिजल्ट जारी करने के तरीके और अंतिम चयन प्रक्रिया को लेकर आयोग की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला, जिससे अभ्यर्थियों के मन में धांधली की आशंका गहरा गई। अब छात्र इस पूरी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष और गहराई से जाँच की माँग पर अड़े हैं। बढ़ते विवाद और सड़कों पर उतरते छात्रों के विरोध का असर अब आयोग के फैसलों पर भी दिखने लगा है। JPSC ने आगामी मुख्य परीक्षा को फिलहाल स्थगित कर दिया है।
आयोग का पक्ष: JPSC ने परीक्षा टालने की वजह 'प्रशासनिक कारण' बताई है।
छात्रों का दावा: आंदोलनकारियों का मानना है कि यह फैसला प्रशासनिक मजबूरी नहीं, बल्कि सड़कों पर उतर चुके छात्रों के दबाव और जाँच की लगातार उठती माँग का नतीजा है।
शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन चला रहे अभ्यर्थियों ने सरकार और आयोग के सामने अपनी माँगें बेहद स्पष्ट रखी हैं:
स्वतंत्र जाँच: पूरे मामले की किसी निष्पक्ष और स्वतंत्र एजेंसी से उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए, ताकि अगर कोई गड़बड़ी हुई है तो सच सामने आ सके।
पारदर्शिता और जवाबदेही: भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाए और अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।
ठोस सुधार: भविष्य में फिर किसी परीक्षा में ऐसे सवाल न उठें, इसके लिए प्रणाली में कड़े सुधारात्मक कदम उठाए जाएँ।