Eye Donation Awareness Program: कोमाखान में स्वास्थ्य विभाग ने मनाया नेत्रदान जागरूकता कार्यक्रम, विद्यार्थियों को दी गई जानकारी
Eye Donation Awareness Program: महासमुंद के कोमाखान में 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने विद्यार्थियों को नेत्रदान के महत्व, कॉर्निया दान की प्रक्रिया और इसके सामाजिक लाभों की जानकारी दी। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने नेत्रदान के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।
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कीर्तिमान डेस्क | कमलेश साहू
07 Sep 2026, 07:43 PM
महासमुंद
Eye Donation Awareness Program: राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा (25 अगस्त से 8 सितंबर) के अंतर्गत कोमाखान के शासकीय स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 41वें ब्लॉक स्तरीय नेत्रदान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और आम लोगों को नेत्रदान के महत्व तथा कॉर्निया से संबंधित अंधत्व को दूर करने के उपायों के प्रति जागरूक करना था।
स्वास्थ्य विभाग के मार्गदर्शन में हुआ आयोजन
यह जागरूकता कार्यक्रम कलेक्टर महासमुंद के निर्देश एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई. नागेश्वर राव के आदेशानुसार आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मार्गदर्शन डॉ. अनिल गोरियार, नेत्र शल्य चिकित्सक एवं जिला नोडल अधिकारी (DBCS&VI) जिला चिकित्सालय महासमुंद ने किया। वहीं बागबाहरा के खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) डॉ. बढ़ाई का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ।
विद्यार्थियों को दी गई नेत्रदान की जानकारी नेत्रदान जागरूकता कार्यक्रम
कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने विद्यार्थियों को नेत्रदान की प्रक्रिया, इसके सामाजिक महत्व और इससे मिलने वाले लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खमरिया से नेत्र सहायक अधिकारी भूपेन्द्र कुमार सोनकर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खल्लारी से तकेश्वर सिन्हा, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोमाखान से आरती साहू और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तेंदूकोना से बृजमोहन पैकरा ने विद्यार्थियों को जागरूक किया।
मृत्यु के बाद 4 से 6 घंटे में किया जा सकता है कॉर्निया दान
स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया कि मृत्यु के बाद केवल 4 से 6 घंटे के भीतर कॉर्निया दान किया जा सकता है। एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो दृष्टिबाधित लोगों के जीवन में रोशनी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि नेत्रदान किसी व्यक्ति को नई दृष्टि देने के साथ उसे आत्मनिर्भर जीवन जीने का अवसर भी प्रदान करता है।
विद्यार्थियों ने लिया नेत्रदान जागरूकता फैलाने का संकल्प
कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य सीताराम साहू, शिक्षक कुमतराम ध्रुव सहित समस्त शिक्षकों का विशेष योगदान रहा। बड़ी संख्या में उपस्थित विद्यार्थियों ने नेत्रदान के महत्व को समझते हुए समाज में इसके प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।
नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियों को किया दूर
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि नेत्रदान करने से चेहरे की सुंदरता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में भी किसी प्रकार की परेशानी नहीं आती। कोई भी व्यक्ति धर्म, जाति या उम्र की सीमा के बिना मृत्यु उपरांत नेत्रदान कर सकता है। एक नेत्रदाता दो लोगों को दृष्टि प्रदान कर मानवता की बड़ी सेवा कर सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से की नेत्रदान की अपील
कार्यक्रम के माध्यम से लोगों से अपील की गई कि वे नेत्रदान को लेकर जागरूक हों और जीवन के बाद भी किसी जरूरतमंद की दुनिया रोशन करने का संकल्प लें। "नेत्रदान महादान" के संदेश के साथ स्वास्थ्य विभाग ने अधिक से अधिक लोगों को इस पुनीत कार्य से जुड़ने का आह्वान किया।