छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सर्पदंश (सांप काटने) से हुई मौतों के नाम पर सरकारी सहायता राशि हड़पने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। सरकंडा पुलिस ने इस मामले में कड़ा एक्शन लेते हुए एसडीएम और तहसील कार्यालय के बाबुओं सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। दरअसल, जिले में सांप के काटने से मौत के 15 फर्जी मामले बनाकर सरकारी मुआवजा डकारने का यह खेल प्रशासनिक और चिकित्सा जगत की मिलीभगत से चल रहा था। इस महाघोटाले में अब तक एक महिला डॉक्टर, वकील और कलेक्टोरेट स्टाफ सहित कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, और पुलिस का दावा है कि जल्द ही कुछ और बड़े चेहरे बेनकाब होंगे।
मर्ग नंबर चुराकर बनाया फर्जी रिपोर्ट
सरकंडा थाना प्रभारी प्रदीप आर्य के मुताबिक, इस पूरे फर्जीवाड़े की स्क्रिप्ट बेहद शातिराना तरीके से लिखी गई थी। कुछ समय पहले क्षेत्र के एक व्यक्ति ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी, जिस पर पुलिस ने मर्ग कायम कर शव का पोस्टमार्टम (PM) कराया था। आरोपियों ने इसी मर्ग नंबर को चुराया और उसके आधार पर एक फर्जी पीएम रिपोर्ट व दस्तावेज तैयार कर लिए।
आपदा राश का आपस में बटवारा
इस फर्जी फाइल को तहसील कार्यालय के बाबू हरिशंकर राठौर, एसडीएम कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक और एक अन्य आरोपी गरीब बिंझवार की मदद से कलेक्टोरेट में पेश किया गया। इसके बाद सरकार की ओर से मिलने वाली आपदा सहायता राशि को आपस में बांटकर हड़प लिया गया। जब मामले की भनक कलेक्टर को लगी, तो उन्होंने जिले में हाल ही में हुए सर्पदंश के मुआवजा मामलों की अंदरूनी जांच बिठाई।कागजों पर मौत, सरकारी पैसा का गबन
जांच में पता चला कि एक-दो नहीं, बल्कि कुल 15 मामलों में यही खेल खेला गया है। इसके बाद अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज कराई गई और बाबुओं की मिलीभगत सामने आते ही पुलिस ने इन्हें दबोच लिया। पुलिस की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जिस पीड़ित के नाम पर सर्पदंश से मौत का दावा कर सरकारी खजाने से पैसा निकाला गया था, वह इंसान और उसका पता रिकॉर्ड में वजूद ही नहीं रखता। यानी कागजों पर एक काल्पनिक व्यक्ति खड़ा किया गया।
डॉक्टर प्रियंका गिरफ्तार
वहीं, जिस मर्ग नंबर का इस्तेमाल किया गया था, वह असल में सरकंडा थाने के एक सुसाइड केस का था, जिसकी फाइल पुलिस पहले ही क्लोज (खात्मा) कर चुकी थी। इस रैकेट के तार कितने गहरे जुड़े हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक दिन पहले ही तोरवा पुलिस ने नागपुर में रहने वाली एक महिला डॉक्टर प्रियंका सोनी को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हेरफेर
तहसील कार्यालय के नायब नाजिर की शिकायत पर तोरवा क्षेत्र के महमंद निवासी निसार खान और लता सूर्यवंशी की संदिग्ध मौतों की जांच शुरू हुई थी। पड़ताल में सामने आया कि दोनों की सामान्य या अन्य कारणों से हुई मौत को छिपाकर, डॉ. प्रियंका सोनी और उनके पति निहित सविता मोहन ने पोस्टमार्टम प्रक्रिया में हेरफेर किया और फर्जी सर्पदंश की रिपोर्ट तैयार कर दी।
मुख्य आरोपी अभी भी फरार
इस विंग में पुलिस अब तक निसार खान की पत्नी सफीना बानो, लता सूर्यवंशी के पति संतोष सूर्यवंशी और एडवर्टाइजर राजेंद्र कुमार चतुर्वेदी को जेल भेज चुकी है। हालांकि, इस पूरे षड्यंत्र का मास्टरमाइंड माना जा रहा मुख्य आरोपी वकील अभी भी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस का कहना है कि यह एक बहुत बड़ा नेक्सस है, जिसमें शामिल हर छोटे-बड़े कर्मचारी और बिचौलिए पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।