Sunday, 08 Nov 2026 भारत
ब्रेकिंग
Road Accident: पटना से रायपुर जा रही रॉयल बस हादसे का शिकार, ट्रक चालक की मौके पर मौत Murder Case: खेत में मिला लापता मासूम का शव, हत्या के मामले में करीबी रिश्तेदार संदेह के घेरे में Crime News: शराब के नशे में दामाद बना हैवान,कुल्हाड़ी से हमला कर 60 वर्षीय मामा ससुर की ली जान Harassment Case: कार और दो लाख की मांग ने ली विवाहिता की जान, पति, सास और ससुर गिरफ्तार Online Betting: किराए के कमरे में चल रहा था ऑनलाइन सट्टा, 4 युवकों पकड़ाए Fraud Case: 1,000 करोड़ के फर्जीवाड़ा, रायपुर के कारोबारी महेंद्र गोयनका को दबोचने पहुंची कोलकाता पुलिस, परिवार समेत फरार Road Accident: पटना से रायपुर जा रही रॉयल बस हादसे का शिकार, ट्रक चालक की मौके पर मौत Murder Case: खेत में मिला लापता मासूम का शव, हत्या के मामले में करीबी रिश्तेदार संदेह के घेरे में Crime News: शराब के नशे में दामाद बना हैवान,कुल्हाड़ी से हमला कर 60 वर्षीय मामा ससुर की ली जान Harassment Case: कार और दो लाख की मांग ने ली विवाहिता की जान, पति, सास और ससुर गिरफ्तार Online Betting: किराए के कमरे में चल रहा था ऑनलाइन सट्टा, 4 युवकों पकड़ाए Fraud Case: 1,000 करोड़ के फर्जीवाड़ा, रायपुर के कारोबारी महेंद्र गोयनका को दबोचने पहुंची कोलकाता पुलिस, परिवार समेत फरार
W 𝕏 f
होम › बिलासपुर › फर्जी पीएम रिपोर्ट : एसडीएम दफ्तर के बाबू और रैके…
सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़े में पुलिस कार्रवाई
सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़े में पुलिस कार्रवाई
बिलासपुर

फर्जी पीएम रिपोर्ट : एसडीएम दफ्तर के बाबू और रैकेट में शामिल 3 आरोपी जेल, अब तक 15 मामलों का खुलासा

बिलासपुर में सर्पदंश से मौत के नाम पर सरकारी मुआवजा हड़पने वाले बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में 15 फर्जी मामलों की बात सामने आई है, जिसमें फर्जी पीएम रिपोर्ट और दस्तावेजों के जरिए सरकारी राशि निकाली गई। मामले में एसडीएम और तहसील कार्यालय के बाबुओं समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि मुख्य आरोपी वकील की तलाश जारी है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 20 Jul 2026, 08:42 AM · अपडेट: 07 Nov 2026, 04:36 AM
बिलासपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सर्पदंश (सांप काटने) से हुई मौतों के नाम पर सरकारी सहायता राशि हड़पने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। सरकंडा पुलिस ने इस मामले में कड़ा एक्शन लेते हुए एसडीएम और तहसील कार्यालय के बाबुओं सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। दरअसल, जिले में सांप के काटने से मौत के 15 फर्जी मामले बनाकर सरकारी मुआवजा डकारने का यह खेल प्रशासनिक और चिकित्सा जगत की मिलीभगत से चल रहा था। इस महाघोटाले में अब तक एक महिला डॉक्टर, वकील और कलेक्टोरेट स्टाफ सहित कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, और पुलिस का दावा है कि जल्द ही कुछ और बड़े चेहरे बेनकाब होंगे। 

मर्ग नंबर चुराकर बनाया फर्जी रिपोर्ट 

सरकंडा थाना प्रभारी प्रदीप आर्य के मुताबिक, इस पूरे फर्जीवाड़े की स्क्रिप्ट बेहद शातिराना तरीके से लिखी गई थी। कुछ समय पहले क्षेत्र के एक व्यक्ति ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी, जिस पर पुलिस ने मर्ग कायम कर शव का पोस्टमार्टम (PM) कराया था। आरोपियों ने इसी मर्ग नंबर को चुराया और उसके आधार पर एक फर्जी पीएम रिपोर्ट व दस्तावेज तैयार कर लिए। 

आपदा राश का आपस में बटवारा 

इस फर्जी फाइल को तहसील कार्यालय के बाबू हरिशंकर राठौर, एसडीएम कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक और एक अन्य आरोपी गरीब बिंझवार की मदद से कलेक्टोरेट में पेश किया गया। इसके बाद सरकार की ओर से मिलने वाली आपदा सहायता राशि को आपस में बांटकर हड़प लिया गया। जब मामले की भनक कलेक्टर को लगी, तो उन्होंने जिले में हाल ही में हुए सर्पदंश के मुआवजा मामलों की अंदरूनी जांच बिठाई। 

कागजों पर मौत, सरकारी पैसा का गबन 

जांच में पता चला कि एक-दो नहीं, बल्कि कुल 15 मामलों में यही खेल खेला गया है। इसके बाद अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज कराई गई और बाबुओं की मिलीभगत सामने आते ही पुलिस ने इन्हें दबोच लिया। पुलिस की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जिस पीड़ित के नाम पर सर्पदंश से मौत का दावा कर सरकारी खजाने से पैसा निकाला गया था, वह इंसान और उसका पता रिकॉर्ड में वजूद ही नहीं रखता। यानी कागजों पर एक काल्पनिक व्यक्ति खड़ा किया गया। 

डॉक्टर प्रियंका गिरफ्तार 

वहीं, जिस मर्ग नंबर का इस्तेमाल किया गया था, वह असल में सरकंडा थाने के एक सुसाइड केस का था, जिसकी फाइल पुलिस पहले ही क्लोज (खात्मा) कर चुकी थी। इस रैकेट के तार कितने गहरे जुड़े हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक दिन पहले ही तोरवा पुलिस ने नागपुर में रहने वाली एक महिला डॉक्टर प्रियंका सोनी को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। 

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हेरफेर 

तहसील कार्यालय के नायब नाजिर की शिकायत पर तोरवा क्षेत्र के महमंद निवासी निसार खान और लता सूर्यवंशी की संदिग्ध मौतों की जांच शुरू हुई थी। पड़ताल में सामने आया कि दोनों की सामान्य या अन्य कारणों से हुई मौत को छिपाकर, डॉ. प्रियंका सोनी और उनके पति निहित सविता मोहन ने पोस्टमार्टम प्रक्रिया में हेरफेर किया और फर्जी सर्पदंश की रिपोर्ट तैयार कर दी। 

मुख्य आरोपी अभी भी फरार 

इस विंग में पुलिस अब तक निसार खान की पत्नी सफीना बानो, लता सूर्यवंशी के पति संतोष सूर्यवंशी और एडवर्टाइजर राजेंद्र कुमार चतुर्वेदी को जेल भेज चुकी है। हालांकि, इस पूरे षड्यंत्र का मास्टरमाइंड माना जा रहा मुख्य आरोपी वकील अभी भी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस का कहना है कि यह एक बहुत बड़ा नेक्सस है, जिसमें शामिल हर छोटे-बड़े कर्मचारी और बिचौलिए पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
क्या यह खबर उपयोगी लगी?
शेयर करें अपने दोस्तों तक पहुंचाएं
WhatsApp Telegram
इस लेख में कोई त्रुटि दिखी? सुधार का अनुरोध करें
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें — ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
कीर्तिमान
छत्तीसगढ़ ▾
सभी छत्तीसगढ़ ›
रायपुर संभाग ▾
दुर्ग संभाग ▾
बिलासपुर संभाग ▾
सरगुजा संभाग ▾
बस्तर संभाग ▾
देश ▾
विदेश
सरकारी सूचना ▾
राजनीति ▾
खेल ▾
मनोरंजन ▾
कारोबार ▾
कीर्तिमान विशेष ▾
तकनीक शिक्षा सेहत धर्म यात्रा राशिफल डार्क/लाइट मोड डॉ. नीरज गजेंद्र डॉ. नीरज गजेंद्र
वीडियो
अभी कोई वीडियो उपलब्ध नहीं है
अभी कोई रील उपलब्ध नहीं है
टिप्पणियाँ
शेयर करें
Clip & Share

अगली खबर के लिए ऊपर और पिछली खबर के लिए नीचे स्वाइप करें

सावधान: संवेदनशील सामग्री
इस अनुभाग में अपराध, हिंसा, दुर्घटना या अन्य संवेदनशील विषयों से संबंधित समाचार हो सकते हैं। क्या आप इसे देखना चाहते हैं?
ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
पुश नोटिफिकेशन चालू करें