महासमुंद जिले में सरकार हर साल शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर धनराशि खर्च कर रही है। छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें, गणवेश, मध्यान्ह भोजन, छात्रवृत्तियाँ, बालिकाओं के लिए साइकिल और स्कूल भवन जैसी सुविधाएँ दी जा रही हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक कारणों से कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
हालांकि, जिले के सरकारी आंकड़े इस कोशिश के बावजूद बहुत ही चिंताजनक स्थिति दिखा रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में शासकीय स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार घट रही है। पालक और शिक्षक दोनों इस गिरावट का मुख्य कारण शिक्षकों की कमी और गैर-शैक्षणिक कार्यों का बढ़ता बोझ मान रहे हैं। शिक्षा विभाग इस विषय में स्पष्ट जवाब देने से बचता नजर आ रहा है।
सरकारी स्कूलों का स्वरूप
छात्र संख्या का गिरता ग्राफ
- 2021-22: 1,70,980
- 2022-23: 1,62,310
- 2023-24: 1,54,809
- 2024-25: 1,48,057
- 2025-26: 1,41,503
पांच वर्षों में कुल 29,477 छात्रों की कमी दर्ज की गई है।
सुविधाओं और शिक्षकों की कमी
निजी स्कूलों की बढ़ती लोकप्रियता
दिलचस्प बात यह है कि सरकारी स्कूलों में गिरावट के बावजूद जिले के निजी स्कूलों में छात्र संख्या लगातार बढ़ रही है।
- 2023-24: 48,091
- 2024-25: 51,835
- 2025-26: 55,222
सिर्फ तीन वर्षों में निजी स्कूलों में 7,131 छात्रों की वृद्धि दर्ज की गई है।
प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती
मुफ्त सुविधाओं और अरबों रुपये के खर्च के बावजूद यदि छात्र सरकारी स्कूलों से निजी स्कूलों की ओर जा रहे हैं, तो यह शासन और प्रशासन दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सरकारी स्कूलों से बच्चों का भरोसा क्यों कम हो रहा है और इसे कैसे वापस हासिल किया जा सकता है।
