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सहकारी घोटाले पर कार्रवाई
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किसानों की सांसें  : अंबिकापुर बैंक घोटाले के बाद सरकार ने पलटी बाजी और अन्नदाताओं को लौटाया उनका हक  

मुख्य घटना: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अंतर्गत 4 समितियों (शंकरगढ़, कुसमी, रामानुजगंज, रामचंद्रपुर) में साल 2020-21 से 2023-24 के बीच 30 करोड़ 51 लाख रुपये से अधिक का बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है, जिससे करीब 497 किसान प्रभावित हुए थे।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
23 Jun 2026, 04:38 PM
रायपुर

छत्तीसगढ़ में सहकारिता के नाम पर किसानों के हक डाका डालने वालों के खिलाफ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार ने चौतरफा कार्रवाई शुरू कर दी है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित अंबिकापुर के अंतर्गत आने वाली शंकरगढ़, कुसमी, रामानुजगंज और रामचंद्रपुर समितियों में साल 2020-21 से लेकर 2023-24 के बीच हुए बड़े वित्तीय घोटालों पर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। इस कार्रवाई का सबसे बड़ा फायदा उन पीड़ित किसानों को मिला है, जो पिछले काफी समय से इस गबन की मार झेल रहे थे। कृषि मंत्री रामविचार नेताम की विशेष पहल पर प्रभावित इलाकों के किसानों को एक बार फिर से खाद और उन्नत बीज की सप्लाई शुरू कर दी गई है। 

दरअसल, अंबिकापुर सहकारी बैंक की इन चार प्रमुख शाखाओं में सामने आए वित्तीय हेरफेर और गबन ने इलाके के सैकड़ों किसानों की कमर तोड़ दी थी। घोटाले के बाद समितियों की साख ऐसी गिरी कि किसानों को न तो वक्त पर केसीसी (कृषि ऋण) मिल पा रहा था और न ही सोसायटियों से खाद-बीज का उठाव हो रहा था। खेती-किसानी के ऐन वक्त पर हुई इस धोखाधड़ी के कारण स्थानीय किसानों में शासन-प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी और असंतोष का माहौल था।

30 करोड़ से ज्यादा का घपला 

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और बैंक प्रबंधन ने दोषियों को सीधे सलाखों के पीछे भेजने की तैयारी कर ली है। घोटालेबाज अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ थानों में एफआईआर (FIR) दर्ज करा दी गई है, साथ ही कई संदिग्धों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर विभागीय जांच बिठा दी गई है। शुरुआती जांच और किसानों की शिकायतों के मुताबिक, इन शाखाओं से जुड़े करीब 497 किसानों के खातों में हेराफेरी कर 30 करोड़ 51 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितता को अंजाम दिया गया है। 

सोसायटियों में फिर लौटने लगी रौनक

ठगे गए किसानों को रबी और खरीफ सीजन में नुकसान न हो, इसके लिए सरकार ने एक तुरंत एक्शन प्लान तैयार किया है। दागी समितियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रभावित लेकिन पात्र किसानों की लिस्ट तुरंत तैयार कर बैंक मुख्यालय भेजें। मुख्यालय स्तर पर इन सूचियों का मिलान कर नए सिरे से लोन की मंजूरी और वितरण का काम तेज कर दिया गया है। इसका सीधा असर अब जमीन पर दिखने लगा है और सोसायटियों से किसानों को दोबारा खाद-बीज मिलने लगा है।  

 ED की जांच का स्वागत कृषि मंत्री

इस पूरे घटनाक्रम पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने साफ लफ्जों में कहा है कि किसानों के हक पर डाका डालने वाले किसी भी रसूखदार को बख्शा नहीं जाएगा। हमारी सरकार की पहली प्राथमिकता अन्नदाताओं के हितों की रक्षा करना है। मंत्री नेताम ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि इस पूरे सहकारिता घोटाले की जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी कर रही है। उन्होंने ईडी की एंट्री का स्वागत करते हुए कहा कि केंद्रीय एजेंसी की निष्पक्ष जांच से इस पूरे नेक्सस का पर्दाफाश होगा और पर्दे के पीछे बैठे असली गुनहगार भी बेनकाब होंगे। 

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