राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के लिए जमीन देने वाले किसानों को वर्षों बाद भी मुआवजे की राशि नहीं मिल पाई है। कोरिया जिले में बैकुंठपुर से सूरजपुर के बीच नेशनल हाईवे निर्माण के दौरान वर्ष 2018 में जिन किसानों की भूमि अधिग्रहित की गई थी, उनमें से 11 भूमि मालिक आज भी अपने भुगतान का इंतजार कर रहे हैं।
लंबे समय तक सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने के बाद आखिरकार प्रभावित किसानों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शन कर रहे भूमि मालिकों का कहना है कि उन्होंने मुआवजे के लिए कई बार आवेदन दिए और अधिकारियों से मुलाकात भी की, लेकिन हर बार उन्हें केवल जल्द भुगतान का भरोसा दिया गया।
प्रशासन के खिलाफ सड़क पर उतरे किसान
किसानों का आरोप है कि उनकी जमीन पर सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन उन्हें अब तक उनकी अधिग्रहित भूमि की राशि नहीं मिली है। मुआवजे की मांग को लेकर प्रभावित किसानों ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वर्षों से लंबित भुगतान के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि जमीन जाने के बाद आय का बड़ा साधन भी खत्म हो गया, लेकिन मुआवजे की राशि नहीं मिलने से परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है।प्रदर्शन स्थल पर पुलिस बल तैनात
किसानों के आंदोलन को देखते हुए मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। भूमि मालिकों ने बताया कि मुआवजे की राशि नहीं मिलने से बच्चों की पढ़ाई, कृषि कार्य और घरेलू खर्चों को पूरा करने में परेशानी हो रही है। किसानों का सवाल है कि जब सरकार ने उनकी जमीन का उपयोग कर लिया है, तो फिर उनके अधिकार की राशि देने में इतनी देरी क्यों की जा रही है।