राजधानी रायपुर में आज धार्मिक आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला शहर स्थित मुनिसुव्रत स्वामी जिनालय एवं मणिधारी दादाबाड़ी में 20वें जैन तीर्थंकर भगवान श्री मुनिसुव्रत स्वामी के पावन सान्निध्य में भव्य विद्या अनुष्ठान पूजा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे वातावरण में धार्मिक उल्लास का माहौल देखने को मिला सुबह 7 बजे से प्रारंभ हुए इस विशेष धार्मिक आयोजन में जैन मुनियों की पावन निश्रा में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए। श्रद्धालुओं ने भगवान की पूजा-अर्चना कर सुख, समृद्धि, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति की कामना की।
163 कलशों के साथ संपन्न पूजा
अनुष्ठान का सबसे बड़ा आकर्षण 163 कलशों के साथ आयोजित विशेष पूजा रही विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान श्री मुनिसुव्रत स्वामी का अभिषेक एवं पूजन किया। कलश यात्रा और पूजा के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से सराबोर रहा धार्मिक अनुष्ठान में पुरुषों, महिलाओं और युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। श्रद्धालुओं ने पारंपरिक वेशभूषा में पूजा-अर्चना कर जैन धर्म की समृद्ध परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
ज्ञान और संस्कार का संदेश विद्या अनुष्ठान
जैन धर्म में विद्या अनुष्ठान का विशेष महत्व है यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि ज्ञान, शिक्षा, सदाचार और आत्मिक विकास का संदेश भी देता है श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान श्री मुनिसुव्रत स्वामी की आराधना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, विवेक और आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है धर्मगुरुओं ने अपने प्रवचनों में कहा कि शिक्षा और संस्कार ही समाज की सबसे बड़ी शक्ति हैं। ज्ञान के साथ विनम्रता और सदाचार का समावेश ही व्यक्ति को जीवन में सफलता की ओर अग्रसर करता है।
धार्मिक आयोजनों से सांस्कृतिक परंपराएं
समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं इससे समाज में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ती है और लोगों को सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है।
विद्या अनुष्ठान
भगवान श्री मुनिसुव्रत स्वामी के विद्या अनुष्ठान ने रायपुर में श्रद्धा और भक्ति का अनूठा वातावरण निर्मित किया 163 कलशों के साथ संपन्न हुई विशेष पूजा में सकल समाज की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली है यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ ज्ञान, संस्कार और सामाजिक एकता का भी प्रेरणादायक संदेश देकर संपन्न हुआ।
