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शिवरात्रि का महासंयोग
शिवरात्रि का महासंयोग
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महासंयोग : ज्येष्ठ अधिकमास शिवरात्रि पर बनने जा रहा है त्रिवेणी योग

अधिकमास शिवरात्रि 2026 इस वर्ष 13 जून, शनिवार को मनाई जाएगी। ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 13 जून शाम 4:07 बजे से शुरू होकर 14 जून दोपहर 12:19 बजे तक रहेगी, लेकिन निशिता काल में पूजा होने के कारण शिवरात्रि 13 जून को ही मान्य होगी। इस बार शिवरात्रि पर सुकर्मा, धृति, सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि जैसे अत्यंत शुभ योगों का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे शिव साधना का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

प्रकाशित: 10 Jun 2026, 04:15 PM · अपडेट: 11 Sep 2026, 12:42 PM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

सनातन धर्म में अधिकमास (मलमास) का विशेष महत्व है, और जब इस पावन महीने में शिवरात्रि का संयोग बने, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस साल ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अधिकमास की शिवरात्रि मनाई जाएगी। इस बार की शिवरात्रि बेहद खास होने वाली है क्योंकि इस दिन 3 बेहद शुभ योगों का महासंयोग बन रहा है, जो भक्तों को शिव साधना का अनंत गुना फल प्रदान करेगा।

यदि आप इस दिन उपवास नहीं भी रख पा रहे हैं, तो मात्र एक लोटा जल अर्पित करके भी महादेव की असीम कृपा के भागी बन सकते हैं। आइए जानते हैं इस पावन दिन की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और ज्योतिषीय गणनाएं।

13 या 14 जून? जानें कब है अधिकमास शिवरात्रि की सही तारीख

वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 13 जून, शनिवार को शाम 04:07 बजे से हो रही है। इस तिथि का समापन अगले दिन 14 जून, रविवार को दोपहर 12:19 बजे होगा।

विशेष नियम: शास्त्रों के अनुसार, मासिक शिवरात्रि की पूजा में 'उदयातिथि' की जगह 'निशिता काल' (मध्यरात्रि की पूजा) को प्रधानता दी जाती है। चूंकि निशिता पूजा का मुहूर्त 13 जून की रात को मिल रहा है, इसलिए अधिकमास शिवरात्रि 13 जून, शनिवार को ही मनाई जाएगी।

पूजा के महत्वपूर्ण शुभ मुहूर्त:

  • निशिता पूजा मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ): देर रात 12:01 AM से 12:41 AM तक (14 जून की रात)

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:02 AM से 04:43 AM तक

  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:53 AM से दोपहर 12:49 PM तक

पंचांग का मत: वैसे तो शिवरात्रि की मुख्य पूजा मध्यरात्रि में होती है, लेकिन जो भक्त दिन में पूजा करना चाहते हैं, वे अपनी सुविधानुसार कभी भी कर सकते हैं। शास्त्र कहते हैं कि जो स्वयं 'महाकाल' हैं, उनके लिए काल या मुहूर्त का बंधन कैसा!

3 शुभ योगों का 'त्रिवेणी' महासंयोग

इस साल की अधिकमास शिवरात्रि पर ग्रहों और नक्षत्रों की ऐसी स्थिति बन रही है जो दुर्लभ है। इस दिन निम्नलिखित 3 बड़े शुभ योग बन रहे हैं:

  1. सुकर्मा और धृति योग: 13 जून को प्रात:काल से लेकर शाम 05:28 PM तक सुकर्मा योग रहेगा, जिसके बाद धृति योग शुरू हो जाएगा।

  2. सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग: ज्योतिष में इन दोनों योगों को बेहद फलदायी माना गया है। ये दोनों महायोग चतुर्दशी तिथि में 14 जून को रात 01:16 AM से सुबह 05:23 AM तक एक साथ रहेंगे।

  3. नक्षत्र और गोचर की स्थिति: इस दिन कृत्तिका नक्षत्र रात 01:16 AM तक रहेगा, जिसके बाद रोहिणी नक्षत्र लगेगा। चंद्रमा सुबह 09:25 AM तक मेष राशि में रहने के बाद वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे, जहां सूर्य देव पहले से ही विराजमान हैं।

भद्रा का साया और शिववास की स्थिति

इस दिन भद्रा भी लग रही है, जो शाम 04:07 PM से शुरू होकर 14 जून को रात 02:15 AM तक रहेगी। हालांकि, शिव भक्तों को इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है।

  • स्वर्ग की भद्रा: इस भद्रा का वास स्वर्ग लोक में है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब भद्रा स्वर्ग में होती है, तो उसका पृथ्वी वासियों पर कोई भी अशुभ या नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।

  • शिववास की स्थिति: शिवरात्रि पर शिववास की गणना भी की जाती है। इस दिन शाम 04:07 PM तक 'शिववास भोजन में' है, जिसके बाद 'शिववास श्मशान में' रहेगा।

जलाभिषेक का सही समय और बेहद सरल विधि

यदि आप शिवरात्रि का पुण्य लाभ कमाना चाहते हैं, तो 13 जून को जलाभिषेक के दो सबसे उत्तम समय हैं:

  • पहला उत्तम समय ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 04:02 AM से 04:43 AM) है।

  • यदि आप सुबह जल्दी नहीं उठ पाते हैं, तो सूर्योदय (सुबह 05:23 AM) के बाद दिन में कभी भी जलाभिषेक कर सकते हैं।

कैसे करें अभिषेक?

तांबे या पीतल के एक लोटे में पवित्र जल लें। उसमें थोड़ा सा गंगाजल, गाय का कच्चा दूध, पुष्प, अक्षत (साबुत चावल) और बेलपत्र डाल लें। शिवलिंग पर जल की धारा धीरे-धीरे चढ़ाते हुए मन ही मन "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें। यह सरल उपाय आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी करने की शक्ति रखता है।

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