Festival of Faith: नवरात्रि के नौ दिन कहीं माता के जसगीतों की गूंज सुनाई दी, तो कहीं गरबा की धुन पर लोग झूमते नजर आए। मंदिरों और पूजा पंडालों में भक्तों ने मां दुर्गा की आराधना की। महाअष्टमी के अवसर पर महासमुंद की कुलदेवी मां महामाया मंदिर में हवन संपन्न हुआ। मंत्रोच्चार के बीच हवन कुंड में आहुति देते भक्तों के साथ मंदिर का वातावरण भक्तिमय नजर आया। हिंदू धर्म में हवन को पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
नवरात्रि में भी अष्टमी और नवमी के अवसर पर हवन करने की परंपरा है। लेकिन हवन क्यों किया जाता है? इसका धार्मिक महत्व क्या है और हवन से निकलने वाले धुएं को विज्ञान किस नजर से देखता है? इन सवालों को समझने के लिए धार्मिक मान्यताओं के साथ इसके वैज्ञानिक पहलुओं को जानना भी जरूरी है।
नगर पुरोहित पंडित पंकज तिवारी ने बताया
महासमुंद के नगर पुरोहित पंडित पंकज तिवारी के अनुसार, हवन का धार्मिक और वैज्ञानिक, दोनों ही दृष्टि से महत्व है। धार्मिक मान्यताओं में अग्नि को पवित्र माना गया है और हवन के दौरान मंत्रोच्चार के साथ दी जाने वाली आहुति देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। नवरात्रि में हवन मां दुर्गा की आराधना से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जिसके माध्यम से भक्त सुख-समृद्धि, शांति और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। वहीं, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से हवन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के जलने पर होने वाली प्रक्रिया और उससे निकलने वाले धुएं को समझना जरूरी है।
हवन के धुएं से वातावरण शुद्ध होने जैसी मान्यताओं का मूल्यांकन वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर किया जाना चाहिए। हवन में इस्तेमाल की गई सामग्री और उसके जलने की परिस्थितियों के अनुसार धुएं का प्रभाव अलग-अलग हो सकता है।
नवरात्रि में हवन का विशेष महत्व
नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के साथ हवन करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इन नौ दिनों में भक्त व्रत रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और माता से सुख-शांति व समृद्धि की कामना करते हैं। अष्टमी के अवसर पर मां महामाया मंदिर में हवन के दौरान मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दी गईं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हवन के माध्यम से भक्त अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं और माता का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। हवन में लकड़ी, घी और दूसरी पूजा सामग्री अग्नि में डाली जाती है। इनके जलने से धुआं और सूक्ष्म कण निकलते हैं। आमतौर पर हवन को वातावरण शुद्ध करने से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से इसके प्रभाव को समझने के लिए ठोस प्रमाण जरूरी हैं। किसी भी पदार्थ को जलाने से निकलने वाले धुएं का असर उसमें मौजूद तत्वों, जलने की प्रक्रिया और आसपास हवा की आवाजाही पर निर्भर करता है। अधिक धुएं के संपर्क में आने से आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। इसलिए हवन के दौरान पर्याप्त वेंटिलेशन रखना जरूरी है।आस्था और विज्ञान के बीच संतुलन जरूरी
महासमुंद के मां महामाया मंदिर में महाअष्टमी पर संपन्न हुआ हवन धार्मिक आस्था और परंपरा का प्रतीक है। भक्तों के लिए यह मां की आराधना करने और अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करने का अवसर है। वहीं, हवन से जुड़े वैज्ञानिक पहलुओं को समझना भी जरूरी है, ताकि धार्मिक मान्यताओं और वैज्ञानिक तथ्यों के बीच अंतर को जाना जा सके। आस्था हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ती है, जबकि विज्ञान किसी भी दावे को तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर परखना सिखाता है। परंपराओं का सम्मान करते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना भी जरूरी है






