आदिम जाति विकास विभाग की कार्यशाला में प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने एआई एवं प्रौद्योगिकी के प्रयोग को समय की बचत बताया और कहा कि इससे घर बैठे समस्याओं का त्वरित समाधान संभव हुआ है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ जनजाति संग्रहालय एवं शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय में बड़े पैमाने पर डिजिटल टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है।
बोरा जनजातीय गरिमा उत्सव 2026 के अंतर्गत आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (टीआरटीआई) कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला में पद्मश्री अजय मंडावी भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। संगोष्ठी में पद्मश्री अजय मंडावी ने कांकेर जेल में बंद नक्सल प्रभावित आदिवासी कैदियों के लिए किए जा रहे कौशल विकास कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इनमें से आठ कैदियों द्वारा वंदे मातरम पर किए गए कार्य को Limca Book of Records में शामिल किया गया है।
कार्यशाला के उद्देश्य एवं अधिकारियों की उपस्थिति
टीआरटीआई की संचालक हीना अनिमेष नेताम ने कार्यशाला के उद्देश्यों की जानकारी दी। इस अवसर पर अपर संचालक संजय गौढ़ तथा संयुक्त संचालक गायत्री नेताम उपस्थित रहीं। सत्येश शर्मा ने संगोष्ठी में कहा कि टेक्नोलॉजी का उपयोग और प्रभावी सर्विस डिलीवरी दो अलग-अलग तथा चुनौतीपूर्ण विषय हैं। उन्होंने बताया कि तकनीक के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण डेटा संग्रहण सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
जनजातीय उद्यमिता एवं स्टार्टअप में एआई की भूमिका
अमित कुमार ने वास्तविक और उपयोगी परिणामों के लिए स्थानीय बोली-भाषा के ज्ञान को आवश्यक बताया तथा ग्रामीण एवं जनजातीय समुदायों में तकनीक के प्रति जागरूकता बढ़ाने और डिजिटल प्लेटफॉर्म की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु शासकीय स्तर पर अभियान चलाने का सुझाव दिया।स्थानीय ज्ञान और एआई के समन्वय पर विशेषज्ञों के विचार
डॉ. राकेश त्रिपाठी ने एआई के माध्यम से स्थानीय ज्ञान को बढ़ावा देने तथा उसके व्यवहारिक उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्थानीय भाषाओं और ज्ञान को मजबूत कर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकता है। वहीं डॉ. रामाकृष्ण ने ड्रॉपआउट दर, शिक्षण गुणवत्ता एवं लर्निंग सिस्टम के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में बेहतर डेटा प्रबंधन एवं डेटा मेंटेनेंस की आवश्यकता पर बल दिया।
