बलरामपुर जिले के राजपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयुष्मान भारत योजना की राशि के इस्तेमाल को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। महालेखाकार (AG) की ऑडिट रिपोर्ट में अस्पताल विकास के नाम पर भारी वित्तीय अनियमितता का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 1 करोड़ 62 लाख रुपए की राशि के खर्च में गड़बड़ी पाई गई है।
महालेखाकार की टीम ने जांच के दौरान कई ऐसे कार्यों का उल्लेख किया है, जो रिकॉर्ड में तो पूरे दिखाए गए, लेकिन मौके पर उनकी स्थिति अलग मिली।
आयुष्मान राशि में गड़बड़ी का आरोप
जानकारी के मुताबिक, आयुष्मान भारत योजना के तहत वर्ष 2022 से 2025 के बीच राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को अस्पताल के विकास और सुविधाओं के विस्तार के लिए करीब 2 करोड़ रुपए की राशि उपलब्ध कराई गई थी। इस राशि से अस्पताल में विभिन्न निर्माण, मरम्मत और सुविधाओं के विकास कार्य किए जाने थे। लेकिन महालेखाकार की टीम जब इन कार्यों की वास्तविक स्थिति जांचने पहुंची तो कई काम केवल दस्तावेजों में ही दिखाई दिए।सारिका फर्म के भुगतान पर सवाल
ऑडिट जांच के दौरान एक फर्म को किए गए भुगतान को लेकर भी सवाल उठे हैं। बताया जा रहा है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ एक कर्मचारी के करीबी व्यक्ति की फर्म सारिका एसोसिएट को लाखों रुपए का भुगतान किया गया। हालांकि, जांच में मौके पर उतना काम दिखाई नहीं दिया, जितना भुगतान रिकॉर्ड में दर्ज बताया गया है। महालेखाकार की रिपोर्ट में इस भुगतान और कार्यों की स्थिति को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
फायर सिस्टम खर्च पर सवाल
ऑडिट रिपोर्ट में अस्पताल में लगाए गए फायर सिस्टम को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, आग से बचाव के लिए लगाए गए सिस्टम के नाम पर करीब 36 लाख रुपए खर्च किए गए। जबकि जानकारों के अनुसार, इस तरह के सिस्टम की वास्तविक लागत लगभग 4 से 5 लाख रुपए के आसपास हो सकती है। इसके अलावा इस कार्य के लिए निर्धारित टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने की बात भी सामने आई है।बिना बैठक खर्च का आरोप
अस्पताल में विकास कार्यों के लिए जीवनदीप समिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नियमानुसार समिति की बैठक में प्रस्ताव और स्वीकृति के बाद ही कई कार्य किए जाते हैं। लेकिन ऑडिट रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में जीवनदीप समिति की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। आरोप है कि समिति की अनुमति और चर्चा के बिना ही लाखों रुपए खर्च कर दिए गए। इस पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।