Gold-Silver Price: मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोमवार, 31 अगस्त को सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में निवेशकों की मुनाफावसूली और अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिले कमजोर संकेतों का असर बुलियन मार्केट पर पड़ा। सोने का वायदा भाव 2,600 रुपए से अधिक गिरकर 1,53,640 रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गया। इसी तरह चांदी का वायदा भाव भी 4,200 रुपए से ज्यादा टूटकर करीब 2,32,501 रुपए प्रति किलोग्राम रह गया।
घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सोने की कीमतों में दबाव बना हुआ है। शुक्रवार को 3 फीसदी से अधिक की गिरावट के बाद सोमवार को भी सोने में कमजोरी जारी रही।
सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की आशंका से बढ़ा दबाव
अमेरिकी फेड की अगली बैठक को लेकर निवेशकों की नजरें अब सितंबर पर टिकी हैं। बाजार में इस बात की संभावना बढ़ रही है कि केंद्रीय बैंक महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। मौजूदा अनुमानों के मुताबिक सितंबर की बैठक में दर बढ़ने की संभावना 50 फीसदी से ऊपर आंकी जा रही है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका आमतौर पर सोने जैसी गैर-ब्याज वाली परिसंपत्तियों पर दबाव डालती है।
तेल की कीमतों ने बढ़ाई महंगाई की चिंता
सोने की कीमतों पर दबाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी है। रविवार को अमेरिकी सेना ने ईरानी रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इन लॉन्चरों के जरिए जलमार्ग में बारूदी सुरंगें भेजने की तैयारी की जा रही थी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाए जाने के बाद यह ईरान के खिलाफ एक महीने से ज्यादा समय में पहली अमेरिकी सैन्य कार्रवाई बताई गई।
फेड के सख्त रुख का सोने पर असर
जैक्सन होल, व्योमिंग में आयोजित फेडरल रिजर्व के वार्षिक सम्मेलन में वॉर्श ने महंगाई को 2 फीसदी के लक्ष्य तक वापस लाने की प्रतिबद्धता जताई। उनके मुताबिक यह लक्ष्य स्थायी और स्पष्ट है। फेड की ओर से महंगाई को लेकर अपनाए जा रहे सख्त रुख ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर सोने की कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
अगस्त में फिर भी करीब 10% चढ़ा सोना
हालिया गिरावट के बावजूद अगस्त में सोने का प्रदर्शन मजबूत रहा है। महीने के दौरान सोने की कीमत करीब 10 फीसदी तक बढ़ चुकी है और यह जनवरी के बाद सबसे बड़ी मासिक बढ़त की ओर बढ़ रहा है। महीने के मध्य में अमेरिकी ट्रेजरी की ओर से बॉन्ड बायबैक बढ़ाने की अप्रत्याशित घोषणा के बाद सोने में तेजी को समर्थन मिला था।
विशेषज्ञों को आगे भी सीमित दबाव की उम्मीद
गामा एसेट मैनेजमेंट एसए के ग्लोबल मैक्रो पोर्टफोलियो मैनेजर राजीव डी मेलो के मुताबिक, मौद्रिक नीति के सख्त रुख की ओर बढ़ना कई निवेशकों के लिए उम्मीद से अलग रहा। उनका मानना है कि इससे आने वाले समय में सोने पर कुछ समय के लिए दबाव बना रह सकता है। उन्होंने निकट अवधि में सोने की कीमत 4,200 से 4,300 डॉलर प्रति औंस के दायरे में रहने का अनुमान जताया है।
‘डिबेसमेंट ट्रेड’ से सोने को मिला सहारा
अमेरिकी ट्रेजरी के इस कदम से उधारी लागत को नियंत्रित करने की उम्मीद बढ़ी और बाजार में ‘डिबेसमेंट ट्रेड’ की चर्चा फिर तेज हुई। इसी थीम को 2025 में सोने की कीमतों में आई करीब 65 फीसदी की तेजी के प्रमुख कारणों में गिना गया था। हालांकि, अब ब्याज दरों और महंगाई को लेकर बदलते संकेतों के बीच निवेशकों की नजर आगे के फेड फैसलों और वैश्विक घटनाक्रम पर बनी रहेगी।

