13 बच्चे डॉक्टरों की निगरानी में
पुलिस की सहायता से सभी बच्चों को इलाज के लिए जिला अस्पताल मुरार पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद कुछ बच्चों की स्थिति को देखते हुए उन्हें ग्वालियर के कमला राजा अस्पताल रेफर कर दिया। फिलहाल 13 बच्चों को अस्पताल के वार्ड में भर्ती कर डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। वहीं अन्य बच्चों की भी लगातार जांच की जा रही है।
5 से 16 साल तक के बच्चे हुए प्रभावित रतनजोत का फल खाने से बीमार हुए बच्चों की उम्र 5 साल से लेकर 16 साल तक बताई जा रही है।
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क्रमांक |
बच्चे का नाम |
उम्र |
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1 |
तनु |
9 वर्ष |
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2 |
सुमित |
7 वर्ष |
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3 |
गौरव |
5 वर्ष |
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4 |
प्रवीण |
10 वर्ष |
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5 |
दिव्या |
8 वर्ष |
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6 |
दिशा |
11 वर्ष |
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7 |
पूजा |
11 वर्ष |
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8 |
आरती |
9 वर्ष |
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9 |
तरुण |
12 वर्ष |
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10 |
हरिओम |
13 वर्ष |
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11 |
कृष्णा |
11 वर्ष |
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12 |
अंकित |
13 वर्ष |
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13 |
सेजल |
16 वर्ष |
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14 |
अनिल |
13 वर्ष |
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15 |
हरिओम बघेल |
5 वर्ष |
डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा इलाज कमला राजा अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. घनश्याम दास गुप्ता ने बताया कि सभी बच्चों के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है। बच्चों की हृदय गति, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन स्तर की नियमित जांच की जा रही है।
समय पर इलाज से बच्चों को राहत
डॉक्टरों के अनुसार, रतनजोत का फल खाने योग्य नहीं होता है। इसके सेवन से शरीर में विषैले प्रभाव पैदा हो सकते हैं, जिसके कारण उल्टी, दस्त, पेट दर्द और कमजोरी जैसी समस्याएं सामने आती हैं। समय पर इलाज मिलने के कारण अधिकांश बच्चों की हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।
