हरेली पर्व को लेकर गांव के बच्चों और युवाओं में भी विशेष उत्साह देखने को मिला। उन्होंने कृषि औजारों और पशुधन की पूजा में परिवार के सदस्यों के साथ भाग लिया और पर्व से जुड़ी परंपराओं को करीब से समझा। गांव के बुजुर्गों ने बच्चों को हरेली का धार्मिक, सांस्कृतिक और कृषि से जुड़ा महत्व बताया। उन्होंने समझाया कि यह पर्व किसानों, पशुधन, धरती और प्रकृति के बीच गहरे संबंध को दर्शाता है। बच्चों और युवाओं की भागीदारी से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश भी मिला।
किसानों ने की अच्छी फसल की कामना
कृषि औजारों और पशुधन की विधिवत पूजा करने के बाद किसानों ने अच्छी बारिश, भरपूर फसल और गांव की सुख-समृद्धि की कामना की। किसानों ने कहा कि खेती पूरी तरह मौसम, प्रकृति, मिट्टी और पशुधन पर निर्भर है। इसलिए हरेली उनके जीवन में विशेष स्थान रखती है। इस दिन किसान अपने कृषि उपकरणों को विश्राम देकर उनकी साफ-सफाई करते हैं और सम्मानपूर्वक पूजा करते हैं। ग्रामीणों ने आने वाले कृषि सीजन में बेहतर पैदावार के साथ किसानों के जीवन में खुशहाली की प्रार्थना भी की।
पारंपरिक व्यंजनों से महके ग्रामीण घर
हरेली पर्व के अवसर पर गांव के घरों में पारंपरिक छत्तीसगढ़ी पकवान और व्यंजन तैयार किए गए। परिवार के सभी सदस्यों ने एक साथ बैठकर भोजन किया और एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं। महिलाओं ने सुबह से ही पूजा की तैयारी करने के साथ घरों की साफ-सफाई और विशेष पकवान बनाने का काम शुरू कर दिया था। रिश्तेदारों, पड़ोसियों और परिचितों के बीच पकवान बांटकर खुशियां साझा की गईं। दिनभर गांव में उत्सव, मेल-जोल और आपसी भाईचारे का वातावरण बना रहा।
सामूहिक भागीदारी ने बढ़ाई पर्व की रौनक
ग्राम पंचायत फरफौद के गौठान में आयोजित पूजा-अर्चना के दौरान किसानों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की सामूहिक भागीदारी देखने को मिली। सभी ने मिलकर पशुधन की पूजा की और गायों को आटे की लोई खिलाकर पारंपरिक रीति निभाई। ग्रामीणों ने पशुधन के संरक्षण, खेती के विकास और गांव की सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर चर्चा की। सामूहिक आयोजन के कारण गांव में आपसी सहयोग और सामाजिक एकता का संदेश भी गया। ग्रामीणों ने हर वर्ष इसी तरह मिल-जुलकर हरेली पर्व मनाने की बात कही।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है हरेली
हरेली का पर्व खेती-किसानी और पशुधन के सम्मान के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी महत्वपूर्ण संदेश देता है। ग्रामीणों ने कहा कि किसान का जीवन पेड़-पौधों, जल स्रोतों, उपजाऊ मिट्टी और अनुकूल मौसम से सीधे जुड़ा होता है। ऐसे में प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। पर्व के दौरान लोगों ने हरियाली को बढ़ावा देने, पौधों की देखभाल करने और जल संरक्षण के प्रति जागरूक रहने की बात कही।