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Beehive and Jwara Visarjan Procession (Image Source: Keertiman Media)
Beehive and Jwara Visarjan Procession (Image Source: Keertiman Media)
दुर्ग संभाग

Honeybee Attack: मधुमक्खियों का ऐसा खौफ, जंवारा को भी लेना पड़ा दूसरा रास्ता

Honeybee Attack: ननकट्ठी में मधुमक्खियों के हमले की आशंका के चलते ज्योति-जंवारा विसर्जन का रास्ता बदलना पड़ा। हुम देने पहुंचे पंडा समेत तीन लोग मधुमक्खियों की चपेट में आए। ग्रामीणों ने वैकल्पिक मार्ग से विसर्जन की परंपरा पूरी की।

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प्रकाशित: 19 Oct 2026, 07:46 PM · 2 मिनट पढ़ने का समय
ननकट्ठी
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Honeybee Attack: नवरात्र पर्व पर ग्राम ननकट्ठी में मधुमक्खियों के हमले की आशंका ने धार्मिक आयोजन के दौरान मुश्किलें खड़ी कर दीं। शीतला घाट तालाब जाने वाले पारंपरिक रास्ते पर बरगद के पेड़ में बने विशाल छत्ते के कारण महामाया, चंडी मंदिर के ज्योति-जंवारा का विसर्जन मार्ग बदलना पड़ा। ग्रामीणों ने सावधानी बरतते हुए वैकल्पिक रास्ते से विसर्जन की परंपरा पूरी की।

आषाढ़ से पेड़ पर बना था छत्ता 

तालाब जाने वाले मार्ग पर स्थित बरगद के पेड़ पर आषाढ़ माह से मधुमक्खियों का बसेरा था। समय के साथ छत्ता बड़ा हो गया। नवरात्रि के दौरान तीनों मंदिरों में ज्योति-जंवारा प्रज्वलित किए गए थे। विसर्जन जुलूस में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को इसी मार्ग से गुजरना था। ग्रामीणों को आशंका थी कि लोगों की आवाजाही और धुएं से मधुमक्खियां आक्रामक हो सकती हैं, जिससे भगदड़ की स्थिति बन सकती है। 

रात में काटी डाल, सुबह फिर मंडराया झुंड 

विसर्जन से पहले रविवार रात मशीन की मदद से छत्ते वाली डाल काट दी गई। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि इससे रास्ता सुरक्षित हो जाएगा, लेकिन सोमवार सुबह भी आसपास मधुमक्खियों का झुंड मंडराता रहा। शीतला मंदिर के आसपास उनकी मौजूदगी से लोगों में भय बना रहा।

हुम देने पहुंचे पंडा पर भी हमला 

सोमवार सुबह चंडी माता मंदिर के पंडा भंवर देवता को मनाने की परंपरा के तहत बरगद के पास हुम देने पहुंचे। इसी दौरान मधुमक्खियों ने उन पर हमला कर दिया। बचने के लिए वे चंडी मंदिर की ओर भागे। उनके साथ गए दो ग्रामीण भी हमले की चपेट में आए। वहीं, हुम देने पहुंचे गांव के बैगा विश्वनाथ ढीमर को किसी प्रकार की हानि नहीं होने की जानकारी मिली। 

वैकल्पिक रास्ते से हुआ विसर्जन 

लगातार बने खतरे को देखते हुए ग्रामीणों ने पारंपरिक मार्ग छोड़ने का निर्णय लिया। महामाया, चंडी मंदिर के ज्योति-जंवारा को दूसरे रास्ते से शीतला घाट तालाब तक पहुंचाया गया। इस तरह सावधानी के साथ धार्मिक परंपरा पूरी की गई। घटना ने सार्वजनिक और धार्मिक आयोजनों के दौरान प्राकृतिक जोखिमों को गंभीरता से लेने तथा समय रहते सुरक्षा के उपाय करने की जरूरत को सामने ला दिया।
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