पटरी पर पहुंची हॉस्पिटल ऑन व्हील्स, बिश्रामपुर में लाइफलाइन एक्सप्रेस बनी गरीबों का सहारा, 5 सितंबर तक मिलेगा मुफ्त इलाज
सूरजपुर के बिश्रामपुर रेलवे स्टेशन पर खड़ी लाइफलाइन एक्सप्रेस के जरिए 5 सितंबर तक जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त जांच, इलाज और सर्जरी की सुविधा दी जा रही है। इसमें नेत्र-कान रोग, बच्चों के क्लब फुट, प्लास्टिक सर्जरी, महिला कैंसर स्क्रीनिंग और दंत चिकित्सा जैसी सेवाएं शामिल हैं। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम मरीजों के रजिस्ट्रेशन से लेकर उपचार और दवा वितरण तक की व्यवस्था संभाल रही है।
सूरजपुर जिले के ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले मरीजों के लिए बिश्रामपुर रेलवे स्टेशन इन दिनों किसी बड़े अस्पताल से कम नहीं लग रहा। स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर दो पर खड़ी 'लाइफलाइन एक्सप्रेस' (हॉस्पिटल ऑन व्हील्स) हजारों जरूरतमंदों के चेहरों पर मुस्कान ला रही है। कलेक्टर रेना जमील के मार्गदर्शन और इम्पैक्ट इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से चल रही इस 256वीं परियोजना के जरिए मरीजों को पांच सितंबर तक तमाम तरह के गंभीर इलाज और सर्जरी की सुविधा बिल्कुल मुफ्त दी जा रही है। इस स्पेशल ट्रेन में सिर्फ सामान्य जांच ही नहीं, बल्कि बड़े और जटिल ऑपरेशन भी किए जा रहे हैं। ट्रेन के भीतर बनी अत्याधुनिक ओटी और जांच कक्षों में विशेषज्ञ डॉक्टर लगातार सेवाएं दे रहे हैं।
एक ही ट्रेन में हर बीमारी का इलाज
नेत्र एवं कान रोग: मोतियाबिंद की जांच और ऑपरेशन के साथ-साथ कान से जुड़ी बीमारियों का इलाज।
बच्चों की विशेष देखभाल: 18 साल से कम उम्र के बच्चों के मुड़े हुए हाथ-पैर (क्लब फुट) की जांच और आवश्यक प्लास्टिक सर्जरी।
महिला स्वास्थ्य एवं कैंसर स्क्रीनिंग: महिलाओं में स्तन (ब्रेस्ट) और गर्भाशय ग्रीवा (सर्विकल) कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए स्पेशल स्क्रीनिंग।
दंत चिकित्सा: दांतों की हर तरह की समस्या का मुआयना और उपचार।
दिन-रात जुटी है स्वास्थ्य विभाग की टीम
इस पूरे अभियान को धरातल पर सफल बनाने में सूरजपुर जिला प्रशासन और स्थानीय स्वास्थ्य अमले ने पूरी ताकत झोंक दी है। सहायक नोडल अधिकारी डॉ. मुकेश राजवाड़े की अगुआई में वरिष्ठ नेत्र सहायक अधिकारी एसपी मिश्रा और उनकी पूरी टीम—जिसमें मारुति नंदन चक्रधारी, अमित सोनी, सुरेंद्र सिंह सोरी, बेंजामिन खाखा और इमरान खान समेत कई अधिकारी शामिल हैं—मरीजों के रजिस्ट्रेशन से लेकर उनके इलाज और देखभाल में लगातार जुटे हुए हैं। कलेक्टर रेना जमील ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गांव-गांव से आने वाले किसी भी मरीज को स्टेशन पर भटकना न पड़े। रजिस्ट्रेशन से लेकर दवाई मिलने तक की पूरी प्रक्रिया सुगम रखी गई है, ताकि इस अनूठी पहल का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।