बीईओ दफ्तर के बाबू की सुस्ती से सैकड़ों शिक्षक-कर्मचारी बेहाल, जुलाई बीतने के बाद भी नहीं आया वेतन
मालखरौदा विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जुलाई माह का वेतन समय पर जारी नहीं होने से शिक्षक और कर्मचारी परेशान हैं। कर्मचारियों ने संबंधित बाबू पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि वेतन बिल समय पर ट्रेजरी नहीं भेजे गए, जिससे EMI बाउंस, बैंक पेनल्टी और आर्थिक संकट जैसी समस्याएं खड़ी हो गई हैं। बीईओ ने जल्द भुगतान का आश्वासन दिया है।
विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय मालखरौदा में पदस्थ एक बाबू की लापरवाही अब सैकड़ों परिवारों पर भारी पड़ने लगी है। अगस्त का महीना शुरू हो चुका है, लेकिन जुलाई का वेतन अब तक शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में नहीं पहुंचा है। इस देरी के कारण जहां एक तरफ लोगों के सामने घरेलू खर्च चलाने का संकट खड़ा हो गया है, वहीं दूसरी ओर बैंकों की ईएमआई बाउंस होने से कर्मचारियों का सिबिल स्कोर बिगड़ने और अतिरिक्त पेनल्टी भरने की नौबत आ गई है। शासकीय नियमों और वित्त विभाग के स्पष्ट निर्देश हैं कि हर महीने की 25 तारीख तक वेतन बिल ट्रेजरी (कोषालय) में जमा हो जाने चाहिए, ताकि महीने की अंतिम तिथि तक कर्मचारियों के खातों में पैसा ट्रांसफर किया जा सके।
अपने ही हक के पैसों के लिए तरह रहे
कर्मचारियों का आरोप है कि बीईओ दफ्तर में संबंधित शाखा के बाबू ने समय पर फाइलें आगे ही नहीं बढ़ाईं। नतीजा यह हुआ कि पूरी प्रक्रिया अटक गई और अगस्त का पहला हफ्ता बीतने की स्थिति में भी लोग अपने ही हक के पैसों के लिए तरस रहे हैं। प्रभावित शिक्षकों ने अपना दर्द बयान करते हुए कहा कि वे नियमित रूप से स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन वेतन अटकने से दैनिक जीवन की गाड़ी पटरी से उतर गई है।
बैंक पेनल्टी: समय पर सैलरी न आने से बैंक से कटे जाने वाले ऑटो-डेबिट (EMI) फेल हो गए हैं, जिससे बैंकों ने एक्स्ट्रा चार्ज लगा दिया है।
सिबिल स्कोर का खतरा: ईएमआई बाउंस होने से कर्मचारियों की क्रेडिट हिस्ट्री प्रभावित हो रही है।
बच्चों की पढ़ाई पर असर: कई शिक्षकों के बच्चों की स्कूल फीस जमा करने की तारीख निकल चुकी है, जिससे उन्हें मानसिक दबाव झेलना पड़ रहा है।
प्रशासनिक कामकाज ठप
कर्मचारियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि संबंधित बाबू अक्सर अपने टेबल से गायब रहते हैं। उनके नियमित रूप से कार्यालय में न बैठने की वजह से न सिर्फ वेतन, बल्कि अन्य प्रशासनिक कामकाज भी ठप पड़े रहते हैं। शिक्षकों का कहना है कि इस सुस्त रवैये की शिकायत पहले भी की जा चुकी है, लेकिन अब तक जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। मामला सिर्फ सेवारत कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। सबसे ज्यादा मानवीय और गंभीर संकट दिवंगत कर्मचारियों के आश्रित परिवारों के सामने खड़ा हो गया है।
जल्द नहीं हुआ भुगतान तो आंदोलन की चेतावनी
आरोप है कि पारिवारिक पेंशन के बिल भी समय पर तैयार नहीं किए गए, जिससे कई बेबस परिवारों को इस महीने पेंशन नहीं मिली। जिन परिवारों की रोजी-रोटी का इकलौता जरिया यह पेंशन ही है, वे इस वक्त बेहद विषम आर्थिक दौर से गुजर रहे हैं। वेतन में लगातार हो रही देरी से परेशान शिक्षकों और कर्मचारियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही भुगतान नहीं हुआ, तो वे कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को ज्ञापन सौंपकर उग्र आंदोलन की शुरुआत करेंगे।कर्मचारियों की प्रमुख मांगें:
तत्काल वेतन बिल ट्रेजरी भेजकर खातों में राशि जमा कराई जाए।
लापरवाही बरतने वाले संबंधित बाबू के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।
दिवंगत कर्मचारियों के परिवारों की अटकी पेंशन तुरंत जारी की जाए।
वेतन में विलंब के कारण कर्मचारियों को बैंक पेनल्टी से हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई पर विचार किया जाए।
अधिकारी का पक्ष
"वेतन बिल ट्रेजरी भेजने की प्रक्रिया में है। बहुत जल्द ही सभी कर्मचारियों के खातों में वेतन की राशि पहुंचा दी जाएगी।" — एम.एल. प्रधान, बीईओ (मालखरौदा)