नाराजगी का असर या महज खानापूर्ति? पवन साय की फटकार के बाद जागे अफसर, गिट्टियों से भरे जाने लगे अंबिकापुर के गड्ढे
पवन साय की नाराजगी के बाद अंबिकापुर के खरसिया चौक-दरिमा मोड़ मार्ग पर पैचवर्क शुरू किया गया है। गड्ढों में बड़ी गिट्टियां डाले जाने से स्थानीय लोगों ने इसकी गुणवत्ता और दोपहिया वाहनों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
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कीर्तिमान न्यूज
20 Aug 2026, 03:54 PM
अंबिकापुर
शहर के खरसिया चौक से दरिमा मोड़ तक पिछले दो सालों से बदहाल पड़ी सड़क पर आखिरकार गुरुवार को मशीनों की गड़गड़ाहट सुनाई दी। भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय के कड़े तेवरों के बाद हरकत में आए तंत्र ने गड्ढों में बड़ी-बड़ी गिट्टियां डालकर पैचवर्क का काम शुरू कराया है। हालांकि, लंबे समय से धूल और हिचकोले फांक रही जनता के लिए यह राहत से ज्यादा आफत नजर आ रही है।
स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि यह मरम्मत सिर्फ अधिकारियों की चमड़ी बचाने का दिखावा है, जो दोपहिया वाहन चालकों के लिए और ज्यादा जानलेवा साबित होगी। दरअसल, बुधवार को संगठनात्मक दौरों के सिलसिले में पवन साय सीतापुर के रास्ते अंबिकापुर पहुंचे थे। सीतापुर में राष्ट्रीय राजमार्ग का लगभग दो किलोमीटर का हिस्सा लंबे समय से बदहाल है।
पवन साय ने सड़क की हालत पर जताया असंतोष
बाईपास की फाइलें दफ्तरों में धूल फांक रही हैं और मुख्य सड़क का वजूद खत्म हो चुका है। मजबूरी में साय को रूट बदलकर निकलना पड़ा, लेकिन अंबिकापुर सीमा में दाखिल होते ही दरिमा मोड़ के पास फिर वही खस्ताहाल सड़क उनका इंतजार कर रही थी। दरिमा मोड़ से खरसिया चौक तक गड्ढों में हिचकोले खाते हुए जब वे सर्किट हाउस पहुंचे, तो उनका सब्र जवाब दे चुका था। सर्किट हाउस पहुंचते ही पवन साय ने सड़क की दुर्दशा पर गहरा असंतोष जताया।
खराब रोड से परेशान आम नागरिक पार्टी के पदाधिकारियों पर भी जताई नाराजगी
चर्चा के दौरान ही राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के कार्यपालन अभियंता को फोन घुमाया गया। अधिकारी ने हर बार की तरह 'बारिश का मौसम' और 'टेंडर प्रक्रिया पूरी होने' का पुराना राग अलापते हुए मानसून के बाद काम शुरू करने का भरोसा दिया। सूत्रों की मानें तो इसके बाद साय ने जिले के प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी से भी बात की और पिछले दो सालों से जारी इस ढर्रे पर कड़ी नाराजगी जताई। बात सिर्फ अफसरों तक सीमित नहीं रही, पवन साय ने मौके पर मौजूद पार्टी पदाधिकारियों को भी आड़े हाथों लिया।
अगर होती इच्छाशक्ति तो नहीं आती ये नौबत
कार्यकर्ताओं में कई ठेकेदारों की मौजूदगी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, "अगर आप लोगों में थोड़ी भी इच्छाशक्ति होती, तो सड़क की यह नौबत न आती। कई लोगों के पास अपने एक्सीवेटर और मशीनरी हैं। क्या दो दिन अपने संसाधन लगाकर सड़क को चलने लायक भी नहीं बनाया जा सकता था?" संगठन महामंत्री के इस रुख के बाद गुरुवार सुबह आनन-फानन में खरसिया चौक से दरिमा मोड़ के बीच पोकलेन और एक्सीवेटर उतार दिए गए।
छोटी गाड़ियों के लिए बनेगी परेशानी की वजह
गड्ढों में हाईवे से लाकर बड़ी-बड़ी गिट्टियां भरी जाने लगीं। लेकिन इस हड़बड़ी ने राहगीरों की चिंता और बढ़ा दी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि गड्ढों में डाली गई बिना कूट-पीट की मोटी गिट्टियां भारी गाड़ियों के नीचे भले दब जाएं, लेकिन दोपहिया और छोटे चारपहिया वाहनों के फिसलने का सबसे बड़ा कारण बनेंगी। यह पहला मौका नहीं है जब इस पैचवर्क से काम चलाया जा रहा हो। इससे पहले भी इसी तरह मलबे और गिट्टियों से गड्ढे ढके गए थे, जो पहली ही बारिश में बह गए।
पिछले दिनों किया था अनूठा प्रदर्शन
इस सड़क को लेकर जनता का आक्रोश चरम पर है, पिछले दिनों सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गड्ढों में भरे गंदे पानी में नहाकर अनूठा प्रदर्शन किया था, जिसकी गूंज सोशल मीडिया पर काफी रही। कलेक्टर अजीत वसंत के जमीनी निरीक्षण के बावजूद हालात जस के तस बने रहे। अब देखना यह होगा कि पवन साय की घुड़की के बाद शुरू हुई यह 'तत्काल मरम्मत' कितने दिन टिक पाती है।