भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार बढ़ते सामरिक तनाव के बीच अब सुरक्षा विशेषज्ञों ने एक नई और गंभीर चुनौती की ओर इशारा किया है। पाकिस्तान भविष्य में भारत के खिलाफ पारंपरिक युद्ध के बजाय रूस-यूक्रेन युद्ध से निकले तथाकथित ‘यूक्रेन मॉडल’ को अपनाने की कोशिश कर सकता है। इस रणनीति में कम लागत वाले लेकिन अत्यधिक प्रभावी FPV ड्रोन, ड्रोन स्वॉर्म, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, साइबर हमले और सूचना युद्ध जैसे आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल शामिल है। पाकिस्तान अपनी सैन्य रणनीति में तेजी से बदलाव कर रहा है और अब वह केवल पारंपरिक टैंक, लड़ाकू विमान और मिसाइलों पर निर्भर रहने के बजाय तकनीक आधारित युद्ध क्षमता को मजबूत करने में जुटा है। अगर ऐसा हुआ तो भविष्य का कोई भी संघर्ष पूरी तरह बदल सकता है और भारत के सामने नई सुरक्षा चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
यूक्रेन मॉडल
‘यूक्रेन मॉडल’ शब्द रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान सामने आई उस युद्ध रणनीति को दर्शाता है, जिसमें अपेक्षाकृत कमजोर सैन्य ताकत रखने वाला देश आधुनिक तकनीकों, छोटे हथियारों और ड्रोन आधारित युद्ध के जरिए बड़ी सैन्य शक्ति को लंबे समय तक चुनौती देता है। यूक्रेन ने युद्ध के दौरान छोटे FPV ड्रोन, सस्ते अटैक ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग सिस्टम और रियल टाइम इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके रूस की भारी सैन्य मशीनरी को काफी नुकसान पहुंचाया। कई बार लाखों डॉलर कीमत वाले टैंक और बख्तरबंद वाहन कुछ हजार डॉलर के ड्रोन से नष्ट होते देखे गए। पाकिस्तान भी इसी मॉडल से प्रेरित होकर भारत के खिलाफ कम लागत वाली लेकिन हाई-इम्पैक्ट रणनीति तैयार करने की कोशिश कर सकता है। इसमें सीमावर्ती इलाकों, सैन्य ठिकानों और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाने के लिए ड्रोन तकनीक का अधिक इस्तेमाल किया जा सकता है।
FPV ड्रोन बड़ा खतरा
FPV यानी First Person View ड्रोन आधुनिक युद्ध की तस्वीर बदलने वाले हथियार माने जा रहे हैं। इन ड्रोन को ऑपरेटर कैमरे के जरिए लाइव कंट्रोल करता है, जिससे वे बेहद सटीक तरीके से लक्ष्य पर हमला कर सकते हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये बहुत कम ऊंचाई पर उड़ सकते हैं और रडार से बचते हुए अचानक हमला कर सकते हैं। छोटे आकार और कम कीमत की वजह से इन्हें बड़ी संख्या में इस्तेमाल किया जा सकता है। यूक्रेन युद्ध में ऐसे ड्रोन टैंकों, सैन्य वाहनों, बंकरों और यहां तक कि सैनिकों पर सीधे हमलों में बेहद प्रभावी साबित हुए हैं। अगर पाकिस्तान इस तरह के ड्रोन युद्ध मॉडल को अपनाता है, तो यह भारत के लिए नई चुनौती होगी, क्योंकि पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम हमेशा इतने छोटे और तेज ड्रोन को आसानी से नहीं रोक पाते।
ड्रोन स्वॉर्म और ‘लो-कॉस्ट वॉरफेयर’
भविष्य का युद्ध केवल बड़े हथियारों का नहीं होगा, बल्कि ‘लो-कॉस्ट वॉरफेयर’ यानी कम लागत वाले हथियारों का भी होगा। ड्रोन स्वॉर्म तकनीक में एक साथ दर्जनों या सैकड़ों ड्रोन दुश्मन के ठिकानों पर हमला कर सकते हैं। इस तरह के हमले एयर डिफेंस सिस्टम को भ्रमित कर सकते हैं और सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर बना सकते हैं। यूक्रेन युद्ध में इस तकनीक ने दुनिया भर की सेनाओं को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि आने वाले समय में युद्ध की रणनीति पूरी तरह बदलने वाली है।
पाकिस्तान की मिसाइल और ड्रोन रणनीति पर नजर
हाल के वर्षों में पाकिस्तान ने अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को तेजी से बढ़ाने की कोशिश की है। रिपोर्ट्स के अनुसार मई 2025 के भारत-पाकिस्तान तनाव के बाद पाकिस्तान ने अब्दाली, फतह-4, तैमूर और फतह-II जैसी मिसाइलों के परीक्षण किए थे। पाकिस्तान अब ऐसी रणनीति पर काम कर रहा है, जिसमें मिसाइल, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर को एक साथ इस्तेमाल किया जा सके। इसका उद्देश्य सीमित संसाधनों के बावजूद भारत के बड़े सैन्य ढांचे पर दबाव बनाना हो सकता है।
गलती से बचने की सलाह
भारत को रूस जैसी रणनीतिक गलती नहीं दोहरानी चाहिए। रूस ने शुरुआत में यूक्रेन की ड्रोन क्षमता और छोटे हथियारों की प्रभावशीलता को गंभीरता से नहीं लिया था। लेकिन बाद में यही ड्रोन रूस के टैंकों, एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य ठिकानों के लिए बड़ी समस्या बन गए। युद्ध के दौरान यह भी देखा गया कि यूक्रेन ने सोशल मीडिया, सैटेलाइट इंटेलिजेंस और रियल टाइम डेटा का इस्तेमाल करके युद्ध को पूरी तरह डिजिटल और तकनीक आधारित बना दिया। बाद में रूस को भी बड़े पैमाने पर ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीक का सहारा लेना पड़ा।
भारत के सामने चुनौतियां
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने विशाल भूभाग, सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण नागरिक ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। छोटे ड्रोन, साइबर हमले और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग जैसी तकनीकें पारंपरिक सुरक्षा ढांचे के लिए नई चुनौती बन रही हैं। भारत को अब मल्टी-लेयर एंटी-ड्रोन सिस्टम, एडवांस रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमता और साइबर सुरक्षा नेटवर्क को तेजी से मजबूत करना होगा। साथ ही सेना को AI आधारित युद्ध तकनीकों और ड्रोन स्वॉर्म हमलों से निपटने के लिए तैयार करना भी जरूरी होगा।
भारत कैसे कर रहा है तैयारी
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में स्वदेशी ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीकों पर तेजी से काम शुरू किया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) समेत कई एजेंसियां आधुनिक एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी विकसित कर रही हैं। भारतीय सेना भी सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ाने, AI आधारित सिस्टम अपनाने और रियल टाइम इंटेलिजेंस नेटवर्क मजबूत करने पर फोकस कर रही है। भविष्य के युद्ध में तकनीकी श्रेष्ठता ही सबसे बड़ा हथियार साबित होगी। पाकिस्तान अगर ‘यूक्रेन मॉडल’ जैसी रणनीति अपनाने की कोशिश करता है, तो यह भारत के लिए पारंपरिक युद्ध से अलग और अधिक जटिल चुनौती होगी। आने वाले समय में युद्ध केवल टैंक, मिसाइल और लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ड्रोन, डेटा, साइबर तकनीक और सूचना युद्ध भी निर्णायक भूमिका निभाएंगे। ऐसे में भारत को केवल सैन्य ताकत ही नहीं, बल्कि तकनीकी युद्ध क्षमता, साइबर सुरक्षा और एंटी-ड्रोन सिस्टम पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा। भविष्य का युद्ध अब मैदान के साथ-साथ आसमान और डिजिटल दुनिया में भी लड़ा जाएगा।
