रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच भारत की कूटनीतिक भूमिका एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के बीच साइप्रस में हुई अहम बैठक ने इस बात के संकेत दिए हैं कि भारत आने वाले समय में दोनों देशों के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। यह मुलाकात यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक “जिम्निच फोरम” के दौरान हुई। इस बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध, युद्ध के मैदान की बदलती स्थिति, शांति प्रयासों और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। भारत इस समय दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिनके रूस और यूक्रेन दोनों के साथ अच्छे संबंध बने हुए हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को संभावित “डिप्लोमैटिक ब्रिज” यानी कूटनीतिक पुल के रूप में देखा जाने लगा है।
साइप्रस में महत्वपूर्ण बातचीत
विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस समय साइप्रस दौरे पर हैं, इसी दौरान उनकी मुलाकात यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से हुई। बैठक के बाद जयशंकर ने इसे “उपयोगी और सकारात्मक” बातचीत बताया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने यूक्रेन संघर्ष पर अपने विचार साझा किए और द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न मुद्दों की समीक्षा की,दूसरी तरफ यूक्रेन के विदेश मंत्री सिबिहा ने भी बातचीत को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार चर्चा का मुख्य केंद्र रूस के खिलाफ जारी युद्ध, युद्धक्षेत्र में हाल के घटनाक्रम और यूक्रेन की नई रणनीतिक पहल रही।
बदलते युद्ध हालात के बीच हलचल
यह बैठक ऐसे समय हुई है जब रूस-यूक्रेन युद्ध लगातार नए मोड़ ले रहा है तो पश्चिमी देश युद्ध में अब तक पांच लाख से ज्यादा रूसी सैनिक मारे जा चुके हैं, रूस ने इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। उधर यूक्रेन लगातार अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य देशों से सैन्य तथा आर्थिक समर्थन बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लंबे समय से जारी इस युद्ध ने यूरोप की सुरक्षा, वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर डाला है।
भारत ने अपनाया संतुलित रुख
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने बेहद संतुलित और सावधानीपूर्ण कूटनीतिक रुख अपनाया है भारत ने एक तरफ रूस के साथ अपने रणनीतिक और रक्षा संबंध बनाए रखे हैं, वहीं दूसरी ओर यूक्रेन के साथ भी संवाद जारी रखा है संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत ने बार-बार बातचीत, कूटनीति और शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई बार कह चुके हैं कि “यह युद्ध का युग नहीं है” और सभी पक्षों को शांति की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
भारत बन सकता है मध्यस्थ
जयशंकर और यूक्रेनी विदेश मंत्री की मुलाकात से पहले ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत और रूस के विदेश मंत्रियों के बीच भी चर्चा हुई थी इसी वजह से अब अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या भारत रूस और यूक्रेन के बीच संवाद का पुल बन सकता है भारत की सबसे बड़ी ताकत यह है कि उसके दोनों देशों के साथ भरोसेमंद संबंध हैं रूस भारत का पुराना रणनीतिक साझेदार है, जबकि हाल के वर्षों में भारत और यूक्रेन के बीच भी आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग बढ़ा है। फिलहाल भारत औपचारिक मध्यस्थ की भूमिका में नजर नहीं आ रहा, लेकिन वह बैक-चैनल डिप्लोमेसी यानी पर्दे के पीछे संवाद बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध
रूस-यूक्रेन युद्ध का असर भारत पर भी कई स्तरों पर पड़ा है। ऊर्जा कीमतों, खाद्यान्न आपूर्ति, रक्षा उपकरणों और वैश्विक व्यापार पर इस संघर्ष का सीधा प्रभाव देखा गया है भारत ने युद्ध के दौरान रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदना जारी रखा, जिस पर पश्चिमी देशों ने सवाल भी उठाए। लेकिन भारत ने साफ कहा कि उसकी प्राथमिकता अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित हैं।
यूरोप और वैश्विक राजनीति पर असर
रूस-यूक्रेन युद्ध अब केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन का बड़ा मुद्दा बन चुका है अमेरिका और यूरोपीय देश यूक्रेन का खुलकर समर्थन कर रहे हैं, जबकि रूस चीन, ईरान और कुछ अन्य देशों के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहा है ऐसे माहौल में भारत जैसे देशों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, जो दोनों पक्षों के साथ संवाद बनाए रखने में सक्षम हैं।
शांति प्रयास
अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस युद्ध के जल्द समाधान की उम्मीद कर रहा है लगातार बढ़ती सैन्य कार्रवाई, आर्थिक दबाव और मानवीय संकट ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। यदि कोई देश दोनों पक्षों के बीच भरोसे के साथ बातचीत की शुरुआत करा सकता है, तो उसमें भारत की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है फिलहाल युद्धविराम की संभावना स्पष्ट नजर नहीं आ रही, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर बढ़ती बैठकों को भविष्य की संभावित शांति प्रक्रिया के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
भारत की कूटनीति
जयशंकर की साइप्रस में हुई यह मुलाकात भारत की सक्रिय और संतुलित विदेश नीति का उदाहरण है।भारत अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं बल्कि वैश्विक कूटनीति में भी प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है। रूस और यूक्रेन दोनों के साथ संवाद बनाए रखना भारत की रणनीतिक क्षमता और संतुलित विदेश नीति को दर्शाता है।
