भारतीय सेना की युद्ध क्षमता को और अधिक आधुनिक तथा घातक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी एसएमपीपी (SMPP) ने भारतीय सेना को 106 स्वदेशी 'पीसकीपर' कामिकेज ड्रोन सौंप दिए हैं। ये अत्याधुनिक ड्रोन दुश्मन के इलाके में गहराई तक जाकर महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर सटीक हमला करने में सक्षम हैं। सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किए गए ये ड्रोन आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप के अनुरूप तैयार किए गए हैं ड्रोन तकनीक आज दुनिया की लगभग सभी बड़ी सेनाओं की प्राथमिकता बन चुकी है। रूस-यूक्रेन युद्ध, इजराइल-हमास संघर्ष और अन्य सैन्य अभियानों में ड्रोन की भूमिका ने साबित कर दिया है कि भविष्य के युद्धों में बिना पायलट वाले हथियार बेहद महत्वपूर्ण होंगे। इसी को देखते हुए भारत भी स्वदेशी ड्रोन तकनीक को तेजी से बढ़ावा दे रहा है और पीसकीपर ड्रोन उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
पीसकीपर कामिकेज ड्रोन
पीसकीपर एक टर्बोजेट इंजन से संचालित अत्याधुनिक कामिकेज ड्रोन है। कामिकेज ड्रोन को आम भाषा में आत्मघाती ड्रोन भी कहा जाता है। यह पारंपरिक ड्रोन की तरह केवल निगरानी नहीं करता, बल्कि लक्ष्य की पहचान करने के बाद सीधे उस पर हमला करता है मिशन पूरा होने के दौरान यह ड्रोन अपने लक्ष्य से टकराकर विस्फोट करता है और उसे नष्ट कर देता है। इस कारण इसे 'लोइटरिंग म्यूनिशन' श्रेणी के हथियारों में भी शामिल किया जाता है। ऐसे ड्रोन लंबे समय तक लक्ष्य क्षेत्र में मंडरा सकते हैं और सही समय आने पर हमला कर सकते हैं।
180 किलोमीटर की रेंज
एसएमपीपी के अनुसार पीसकीपर ड्रोन की ऑपरेशनल रेंज लगभग 180 किलोमीटर है इसका अर्थ है कि यह दुश्मन की सीमा के काफी भीतर स्थित ठिकानों तक पहुंच सकता है इसकी अधिकतम गति 450 किलोमीटर प्रति घंटा बताई गई है। इतनी तेज रफ्तार के कारण दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली के लिए इसे पहचानना और रोकना कठिन हो सकता है। तेज गति और लंबी दूरी की क्षमता इसे सामरिक अभियानों के लिए उपयोगी बनाती है किसी भी युद्ध में कमांड और कंट्रोल सिस्टम को नुकसान पहुंचाना दुश्मन की युद्ध क्षमता को कमजोर करने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। ऐसे में पीसकीपर जैसे ड्रोन भारतीय सेना को सामरिक बढ़त दे सकते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक युद्ध
आधुनिक युद्ध केवल हथियारों की लड़ाई नहीं रह गया है। अब इलेक्ट्रॉनिक युद्ध यानी संचार, रडार और नेविगेशन सिस्टम को बाधित करने की रणनीति भी अपनाई जाती है कंपनी के अनुसार पीसकीपर ड्रोन को ऐसे वातावरण में भी प्रभावी ढंग से काम करने के लिए विकसित किया गया है। यह विद्युत-चुंबकीय व्यवधान वाले क्षेत्रों में भी अपने मिशन को पूरा करने में सक्षम है। इससे युद्ध के दौरान इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है।
सीमावर्ती क्षेत्रों को मिलेगी बड़ी मदद
भारतीय सेना लंबे समय से सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और सटीक हमले की क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही है चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर आधुनिक तकनीक आधारित उपकरणों की तैनाती लगातार बढ़ाई जा रही है पीसकीपर ड्रोन सेना को बिना सैनिकों को जोखिम में डाले दुश्मन के ठिकानों पर कार्रवाई करने की सुविधा देंगे। इससे सैनिकों की सुरक्षा बढ़ेगी और जरूरत पड़ने पर त्वरित जवाबी कार्रवाई भी संभव होगी।
आत्मनिर्भर भारत अभियान
पीसकीपर ड्रोन पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित किए गए हैं रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में यह महत्वपूर्ण उपलब्धि है पिछले कुछ वर्षों में भारत ने मिसाइल, तोप, रडार, युद्धक वाहन और ड्रोन जैसे रक्षा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण पर विशेष ध्यान दिया है। सरकार का लक्ष्य देश को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है स्वदेशी तकनीक के उपयोग से न केवल लागत कम होती है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर उत्पादन और उन्नयन भी तेजी से किया जा सकता है।
भविष्य के युद्धों में भूमिका
दुनिया भर की सेनाएं अब ड्रोन आधारित युद्ध रणनीतियों पर अधिक ध्यान दे रही हैं छोटे निगरानी ड्रोन से लेकर लंबी दूरी के हमलावर ड्रोन तक आधुनिक युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं पीसकीपर जैसे कामिकेज ड्रोन भविष्य के संघर्षों में भारतीय सेना को नई क्षमता प्रदान करेंगे। ये ड्रोन दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों पर कम समय में सटीक हमला कर सकते हैं और सैन्य अभियानों की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मारक क्षमता में नया अध्याय
106 पीसकीपर कामिकेज ड्रोन की आपूर्ति भारतीय सेना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है लंबी दूरी, तेज रफ्तार, सटीक हमला और स्वदेशी तकनीक जैसी खूबियों के कारण यह प्रणाली सेना की ताकत को नई ऊंचाई दे सकती है सीमाओं की सुरक्षा से लेकर रणनीतिक अभियानों तक, पीसकीपर ड्रोन भारतीय सेना के लिए एक प्रभावी हथियार के रूप में उभर रहे हैं और आने वाले वर्षों में इनकी भूमिका और बढ़ सकती है।
