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रिकॉर्ड तेल निर्यात का प्रतीकात्मक दृश्य
रिकॉर्ड तेल निर्यात का प्रतीकात्मक दृश्य
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नाकेबंदी और जंग के बीच ईरान का बड़ा दावा : तेल बेचकर कमाए $18 अरब, बजट का 60% हिस्सा बटोरा

अमेरिका और इजरायल के साथ जारी संघर्ष के बीच ईरान ने दावा किया है कि फरवरी के अंत से जुलाई तक उसने रिकॉर्ड तेल निर्यात कर 18 अरब डॉलर की कमाई की है। ईरानी तेल मंत्रालय के अनुसार, सक्रिय युद्ध के दौरान 11.5 अरब डॉलर और युद्धविराम के दौरान 6.5 अरब डॉलर का तेल बेचा गया।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 26 Jul 2026, 08:23 AM · अपडेट: 29 Oct 2026, 11:24 PM
तेहरान
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
अमेरिका और इजरायल के साथ जारी भारी तनाव और युद्ध के हालातों के बीच ईरान ने अपनी अर्थव्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया है। ईरानी तेल मंत्रालय के मुताबिक, फरवरी के अंत में शुरू हुई जंग के बावजूद देश ने रिकॉर्ड तेल बेचा है और इससे करीब 18 अरब डॉलर (लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये) का राजस्व हासिल किया है। यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब खुद ईरानी अधिकारी अमेरिकी नौसेना द्वारा की गई नाकेबंदी के कारण तेल निर्यात पूरी तरह ठप होने की बात कह रहे थे। 

युद्ध और सीजफायर के दौरान कैसी रही बिक्री?

ईरानी तेल मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, कमाई को दो हिस्सों में देखा जा सकता है:

  • सक्रिय जंग का दौर (28 फरवरी से 7 अप्रैल): इस दौरान भीषण गोलाबारी और हवाई हमलों के बावजूद ईरान ने 11.5 अरब डॉलर का कच्चा तेल बेचा।

  • युद्धविराम का समय (7 अप्रैल से 10 जुलाई): लगभग तीन महीने चले इस सीजफायर के दौरान तेहरान ने 6.5 अरब डॉलर का अतिरिक्त तेल बाजार में उतारा।

ईरान के सालाना बजट से 60 प्रतिशत अधिक 

हालांकि, 10 जुलाई को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर वर्चस्व की लड़ाई के बाद यह युद्धविराम टूट गया और दोनों तरफ से एक बार फिर हमले शुरू हो गए हैं।अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, ईरान के तेल मंत्री मोहसिन पाकनेजाद ने पुष्टि की है कि तनावपूर्ण माहौल में हुई यह कमाई ईरान के सालाना बजट में तेल से होने वाली अनुमानित आय का 60 प्रतिशत से भी अधिक है। यह आंकड़ा इसलिए भी हैरान करने वाला है क्योंकि जून के अंत में ईरान की संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि अमेरिकी नाकेबंदी के कारण ईरानी जहाजों के लिए बंदरगाहों से निकलना लगभग असंभव हो गया था।

कैसे भड़की थी जंग की आग?

गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर जोरदार हवाई हमले किए थे।

  • शुरुआती झटका: हमले के पहले ही दिन ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई शीर्ष सैन्य अधिकारी मारे गए थे।

  • ईरान का पलटवार: इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उनके सहयोगी देशों को निशाना बनाकर मिसाइलें दागीं।

फिलहाल, पिछले दो हफ्तों से होर्मुज की खाड़ी में दोनों पक्षों के बीच गतिरोध और हमले एक बार फिर तेज हो गए हैं, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

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