दुनिया में आम उत्पादन के मामले में भारत पहले स्थान पर है, लेकिन इस वर्ष भारतीय आम निर्यातकों को बड़ा झटका लगा है। जापान ने भारतीय आमों के आयात पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बाद जापान ने बांग्लादेश से आम खरीदने में रुचि दिखाई है। इस घटनाक्रम को दक्षिण एशिया के फल निर्यात बाजार में बड़ा बदलाव है। इससे बांग्लादेश के आम निर्यात उद्योग को नया अवसर मिल सकता है, जबकि भारत को अपनी निर्यात प्रक्रिया और गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था को और मजबूत करना होगा।
भारत के आम पर प्रतिबंध
जापानी अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान भारत की आम निर्यात प्रक्रिया में कुछ तकनीकी खामियां पाई थीं। रिपोर्ट के अनुसार, आमों को निर्यात से पहले कीट-मुक्त बनाने के लिए जिन ट्रीटमेंट सुविधाओं का उपयोग किया जाता है, वहां कीड़ों और फलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों के नियंत्रण संबंधी मानकों का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा था। जापान कृषि और खाद्य सुरक्षा के मामले में दुनिया के सबसे सख्त देशों में गिना जाता है। ऐसे में उसने एहतियात के तौर पर भारतीय आमों के आयात पर रोक लगा दी। जापान का कहना है कि आयातित फलों के जरिए किसी भी प्रकार के कीट या रोग उसके कृषि क्षेत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
जापान की शर्तें
जापान ने बांग्लादेश से आम आयात के लिए कई कड़े मानक और शर्तें रखी हैं। इनमें फलों की गुणवत्ता, कीट-मुक्त उत्पादन, वैज्ञानिक जांच, निर्यात से पहले निर्धारित ट्रीटमेंट प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय फाइटोसैनिटरी (पौध स्वास्थ्य) मानकों का पालन शामिल है। इसके अलावा जापानी अधिकारी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि निर्यात किए जाने वाले आम पूरी तरह सुरक्षित हों और उनमें किसी प्रकार के हानिकारक कीट, लार्वा या रोगजनक तत्व मौजूद न हों। इसी कारण दोनों देशों के बीच तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी है।
बांग्लादेश को फायदा
भारत पर प्रतिबंध लगने के बाद जापान जैसे प्रीमियम बाजार का ध्यान अब बांग्लादेश की ओर गया है। इससे बांग्लादेशी निर्यातकों को अपने उत्पादों के लिए नए अवसर मिलने की उम्मीद है। यदि जापान की शर्तें पूरी हो जाती हैं तो बांग्लादेश को न केवल जापानी बाजार में प्रवेश मिलेगा, बल्कि अन्य एशियाई देशों में भी उसकी स्थिति मजबूत हो सकती है। जापान जैसे विकसित बाजार में प्रवेश किसी भी कृषि निर्यातक देश के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है।
मलेशिया ने भी दिखाई रुचि
जापान के अलावा मलेशिया ने भी बांग्लादेश से आम खरीदने में रुचि दिखाई है। रिपोर्टों के अनुसार, जून के पहले सप्ताह में मलेशिया का एक प्रतिनिधिमंडल बांग्लादेश पहुंचकर आम निर्यात की संभावनाओं पर चर्चा करेगा। यदि यह बातचीत सफल रहती है तो बांग्लादेश के आम उत्पादकों को एक साथ कई नए अंतरराष्ट्रीय बाजार मिल सकते हैं।
भारत के लिए चुनौती
भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है और अल्फांसो, दशहरी, लंगड़ा, केसर तथा हिमसागर जैसी किस्मों की वैश्विक मांग भी काफी अधिक है। हालांकि जापान की कार्रवाई ने यह संकेत दिया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता नियंत्रण और निर्यात मानकों का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। भारत को अपनी फाइटोसैनिटरी प्रणाली, निरीक्षण प्रक्रिया और निर्यात सुविधाओं को और अधिक मजबूत बनाना होगा ताकि भविष्य में ऐसे प्रतिबंधों से बचा जा सके।
जापानी बाजार
यदि भारत जापान द्वारा उठाई गई आपत्तियों को दूर कर देता है और सभी तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित कर देता है, तो भविष्य में जापानी बाजार दोबारा खुल सकता है। दोनों देशों के बीच कृषि व्यापार लंबे समय से जारी है और भारत के उच्च गुणवत्ता वाले आमों की मांग जापान में पहले से मौजूद रही है।
