सुल्तानगंज से गंगाजल उठाकर पैदल बाबाधाम आने वाले शिवभक्तों का इंतज़ार आज खत्म हो गया। आषाढ़ पूर्णिमा के पावन अवसर पर आज से विश्वप्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेले की आधिकारिक शुरुआत हो गई है। पूरा देवघर और दुम्मा बॉर्डर "बोल बम" और "हर हर महादेव" के गूंजते जयकारों से सराबोर है। केसरिया रंग में रंगे श्रद्धालुओं का सैलाब सुल्तानगंज से देवघर की ओर बढ़ने लगा है, जिससे पूरा कांवरिया पथ शिवमय हो गया है।
आज तड़के से ही लगी लंबी कतारें
मेले के पहले ही दिन बाबा वैद्यनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए भक्तों में गजब का उत्साह देखा जा रहा है। आज तड़के सुबह कपाट खुलने के साथ ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, इस बार उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए अरघा सिस्टम (Argha System) के जरिए जलाभिषेक की व्यवस्था की गई है, ताकि हर श्रद्धालु बिना किसी भगदड़ या परेशानी के सुगमता से जल अर्पण कर सके।
प्रशासन मुस्तैद, दुम्मा बॉर्डर पर विशेष नजर
झारखंड और बिहार के सीमावर्ती इलाके दुम्मा में विशेष स्वागत शिविर बनाए गए हैं। मेले को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती की गई है।
सुरक्षा व्यवस्था: पूरे मेला क्षेत्र और रूट लाइनिंग में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जा रही है। सादे लिबास में भी सुरक्षाकर्मी तैनात हैं।
स्वास्थ्य और सुविधाएं: कांवरिया पथ पर श्रद्धालुओं के पैर न जलें, इसके लिए बालू पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है। जगह-जगह पर स्वास्थ्य शिविर, पेयजल और निःशुल्क विश्रामालयों की व्यवस्था की गई है।
रूट डायवर्जन: देवघर शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है और श्रद्धालुओं की गाड़ियों के लिए अलग से पार्किंग जोन बनाए गए हैं।
अधिकारियों का संदेश:
जिला प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे कतार में रहकर शांतिपूर्वक दर्शन करें। अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत नजदीकी सहायता केंद्र या पुलिसकर्मी से संपर्क करें।
इस बार क्यों खास है मेला?
इस साल मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए डिजिटल इन्फॉर्मेशन बोर्ड और मोबाइल ऐप भी लॉन्च किए गए हैं, जिससे भक्तों को कतार की लंबाई और जल अर्पण में लगने वाले संभावित समय की सटीक जानकारी मिल सकेगी। इसके अलावा, रूट पर स्थानीय कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा रहा है, जो थके-हारे कांवरियों के सफर को थोड़ा आसान और आनंदमय बनाएंगे।
बाबा की नगरी पूरी तरह सज-धज कर तैयार है, और एक महीने तक चलने वाले इस आस्था के महापर्व में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है।