Jewellery Market: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले के बाद कीमती धातुओं के बाजार में हलचल बढ़ गई है। घरेलू वायदा बाजार MCX पर भी सोने और चांदी के भाव में बदलाव दर्ज किया गया। वहीं, आगामी आर्थिक आंकड़ों और प्रमुख केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,050 डॉलर प्रति औंस और चांदी 43 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंचने की जानकारी दी गई है। हालांकि, बाजार में आगे की दिशा अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और ब्याज दरों को लेकर बनने वाली परिस्थितियों पर निर्भर कर सकती है।
MCX पर सोने और चांदी की कीमतों में बदलाव
घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी के भाव में अलग-अलग रुख देखने को मिला। उपलब्ध कारोबारी आंकड़ों के मुताबिक, MCX पर सुबह 11:05 बजे सोना 85 रुपए की बढ़त के साथ 1,43,790 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। दूसरी ओर, चांदी 617 रुपए गिरकर 1,93,708 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई थी।
कीमतों में गिरावट के बावजूद बड़े ज्वैलर्स की खरीदारी धीमी
सोने की कीमतों में भारी गिरावट के बाद भी देश की बड़ी ज्वैलरी कंपनियां खरीदारी को लेकर सतर्क नजर आ रही हैं। फेस्टिव सीजन में आमतौर पर सोने की मांग बढ़ती है, लेकिन इस बार बाजार में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई देने की बात सामने आई है।बड़े ज्वैलर्स क्यों अपना रहे हैं 'इंतजार करो और देखो' की नीति
MMTC-PAMP इंडिया के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर समित गुहा के मुताबिक, ज्वैलरी कारोबार में खरीदारी का फैसला काफी हद तक कीमतों की आगे की दिशा पर निर्भर करता है। जब सोने के भाव बढ़ने की उम्मीद होती है, तब कंपनियां स्टॉक बढ़ाने पर जोर देती हैं।
क्या साल के अंत तक और सस्ता होगा सोना-चांदी?
Sucden Financial की तिमाही रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और ऊंची ब्याज दरें कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव डाल सकती हैं। रिपोर्ट में साल के अंत तक सोने का भाव करीब 3,900 डॉलर प्रति औंस तक आने की संभावना जताई गई है। वहीं, चांदी की कीमतों में भी गिरावट का अनुमान लगाया गया है।अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर नजर
सोने और चांदी की आगे की चाल तय करने में अमेरिकी GDP, व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी PCE और बेरोजगारी भत्ते से जुड़े आंकड़े अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसके अलावा यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ECB) और बैंक ऑफ जापान (BOJ) के ब्याज दर संबंधी फैसलों पर भी निवेशकों की नजर है। इन फैसलों का असर वैश्विक बाजार के साथ भारतीय कमोडिटी बाजार पर भी पड़ सकता है।







