Electricity Crisis India: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले की बढ़ती कीतमों और रुपए की कमजोरी ने आयात को महंगा कर दिया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार बिजली संयंत्रों को घरेलू कोयले में आयातित कोयला मिलने को निर्देश देने पर विचार कर रही थी। कोयले की उपलब्धता पर बढ़ते दबाव के बीच बिजली संकट की आशंका भी गहराने लगी है। हालांकि, सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए घरेलू उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था मजबूत करने पर ध्यान दिया है।
पांच साल के निचले स्तर पर पहुंचा कोयले का स्टॉक
देश के बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार करीब पांच साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। बिजली की बढ़ती खपत और जलविद्युत उत्पादन में गिरावट के कारण घरेलू कोयले की मांग लगातार बढ़ रही है। बिजली मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 17 अक्टूबर तक देश के करीब आधे बिजली संयंत्रों में कोयले का स्टॉक उनकी जरूरत के एक-चौथाई से भी कम रह गया था।
कमजोर मानसून से बढ़ा बिजली की मांग पर दबाव
कमजोर मानसून के कारण इस साल गर्मी का असर सामान्य से अधिक समय तक बना रहा। इससे घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कूलिंग के लिए बिजली की खपत बढ़ी। दूसरी ओर, कम बारिश के चलते जलविद्युत उत्पादन भी प्रभावित हुआ। बिजली की मांग पूरी करने के लिए कोयला आधारित संयंत्रों पर निर्भरता बढ़ गई।तापमान गिरने से मांग में राहत मिलने की उम्मीद
बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार दोबारा बढ़ाने में मदद मिल सकती है। अनुमान है कि अगले दो सप्ताह में औसत तापमान में कुछ कमी आएगी। हालांकि, तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना के चलते बिजली की मांग पर दबाव पूरी तरह खत्म होने की उम्मीद नहीं है।
रुपये की कमजोरी से आयात का खर्च बढ़ा
कोयले की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ रुपए की कमजोरी ने भी सरकार की चिंता बढ़ाई है। रुपए के कमजोर होने से विदेश से खरीदे जाने वाले कोयले के लिए अधिक भुगतान करना पड़ता है। इसके अलावा, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भी देश के ऊर्जा आयात बिल पर दबाव डाल रही हैं।







