Power crisis: देश में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। दूसरी ओर, थर्मल पावर प्लांटों में कोयले का भंडार घटने और प्राकृतिक गैस व पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में तेजी से बिजली बाजार पर दबाव बढ़ गया है। सितंबर में इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX) पर बिजली की औसत कीमत 7.30 रुपए प्रति यूनिट तक पहुंच गई, जो पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 105 फीसदी अधिक है।
औद्योगिक गतिविधियों में तेजी और त्योहारी सीजन की तैयारियों के बीच बिजली की मांग भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। इसी दौरान प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी तथा आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों ने बिजली उत्पादन की स्थिति को प्रभावित किया है। ऐसे में कोयले से बिजली उत्पादन पर निर्भरता बढ़ रही है, लेकिन थर्मल पावर प्लांटों में कोयले के घटते भंडार ने चिंता बढ़ा दी है।
IEX पर बिजली की औसत कीमत 7.30 रूपए प्रति
यूनिट इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX) के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में स्पॉट मार्केट में बिजली की औसत कीमत 7.30 रुपये प्रति यूनिट दर्ज की गई। यह सितंबर 2025 के मुकाबले करीब 105 फीसदी अधिक है। बिजली की कीमतों में इस बढ़ोतरी का सीधा असर उन राज्यों और वितरण कंपनियों पर पड़ सकता है, जिनके पास पहले से पर्याप्त बिजली खरीद समझौते (Power Purchase Agreements) नहीं हैं। ऐसी कंपनियों को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए एक्सचेंज से महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है, जिससे बिजली आपूर्ति की लागत बढ़ जाती है।
थर्मल पावर प्लांटों में कोयले का स्टॉक घटने से बढ़ी चिंता
बिजली बाजार में बढ़ती कीमतों के बीच थर्मल पावर प्लांटों में कोयले की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के आंकड़ों में सोमवार को कोयले का स्टॉक निर्धारित सामान्य स्तर के करीब 90 फीसदी तक पहुंचने की बात कही गई है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, यह सामान्य जरूरत के मुकाबले लगभग 33 फीसदी भंडार के बराबर है।बिजली की पीक डिमांड 269 गीगावाट तक पहुंची
त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ ही देश में बिजली की खपत बढ़ गई है। दशहरा और दिवाली से पहले उद्योगों में उत्पादन गतिविधियां तेज होने के कारण बिजली की मांग पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। इसी बीच देश में बिजली की पीक डिमांड 269 गीगावाट तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। मांग के इस स्तर को पूरा करने के लिए बिजली उत्पादन और ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना जरूरी है।
कोयला मंत्रालय का दावा
बिजली संयंत्रों को नहीं होगी कमी कोयले की उपलब्धता को लेकर बढ़ती चिंता के बीच कोयला मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी थर्मल पावर प्लांट को कोयले की कमी नहीं होने दी जाएगी। मंत्रालय के अनुसार, सरकारी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड ने बिजली संयंत्रों तक कोयले की आपूर्ति बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं। अक्टूबर के शुरुआती सप्ताह में बिजली क्षेत्र के लिए कोयले का डिस्पैच बढ़ने की जानकारी भी दी गई है।NTPC के पास कोयले का भंडार घटकर 5.2 मिलियन टन
देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनियों में शामिल एनटीपीसी के थर्मल पावर प्लांटों में भी कोयले के भंडार में गिरावट की जानकारी दी गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कंपनी के पास कोयले का स्टॉक घटकर करीब 5.2 मिलियन टन रह गया है। बताया गया है कि इस भंडार से कंपनी के कई संयंत्रों में लगभग सात दिनों तक बिजली उत्पादन की जरूरत पूरी हो सकती है।
महंगी बिजली से डिस्कॉम का घाटा बढ़ने का खतरा
बिजली की बढ़ती कीमतों का सबसे बड़ा असर उन वितरण कंपनियों पर पड़ सकता है, जो पहले से वित्तीय दबाव में हैं। बिजली खरीद की लागत बढ़ने के बावजूद उपभोक्ताओं को नियमित आपूर्ति देना डिस्कॉम के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। जिन कंपनियों के पास दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौते पर्याप्त नहीं हैं, उन्हें स्पॉट मार्केट से ऊंची कीमत पर बिजली खरीदनी पड़ सकती है।

