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Crude Oil Price: ईरान-इजराइल जंग के बीच OPEC+ का बड़ा फैसला, नवंबर में नहीं बढ़ेगा क्रूड ऑयल का प्रोडक्शन
Crude Oil Price: OPEC+ ने नवंबर में तेल उत्पादन नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार पहुंच गया है। G7 रणनीतिक भंडार से करीब 10 करोड़ बैरल तेल-ईंधन जारी करने की तैयारी में है।
Crude Oil Price: मध्य पूर्व में ईरान युद्ध के चलते दुनियाभर में कच्चे तेल (Crude Oil) की किल्लत और लगातार उछलती कीमतों से हाहाकार मचा हुआ है।
वैश्विक बाजार की नजरें ओपेक प्लस (OPEC+) के रुख पर टिकी थीं, लेकिन संगठन के सात प्रमुख देशों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे नवंबर महीने में भी तेल का उत्पादन नहीं बढ़ाएंगे। यानी अगले महीने प्रोडक्शन मौजूदा स्तर पर ही स्थिर रहेगा—न कोई बढ़ोतरी होगी और न ही कोई नई कटौती। OPEC+ का यह रुख ऐसे वक्त में सामने आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार कर रहा है। 5 अक्टूबर की सुबह ब्रेंट क्रूड का भाव लगभग 102 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया, जबकि शुरुआती कारोबार में यह 103 डॉलर के आंकड़े को भी पार कर गया था।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा सिरदर्द
कीमतों में इस तूफानी तेजी की सबसे बड़ी वजह
ईरान से छिड़ा युद्ध और मध्य पूर्व से प्रभावित होने वाली ऑयल सप्लाई है। खासकर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) में उपजे तनाव ने बाजार की चिंताएं कई गुना बढ़ा दी हैं। अगर इस रास्ते से सप्लाई में जरा सी भी रुकावट आती है, तो दुनिया भर के देशों में ईंधन का संकट गहरा सकता है।
G7 देशों का 'इमरजेंसी प्लान: बाजार में उतरेगा 10 करोड़ बैरल तेल
OPEC+ के इस सख्त रवैये के बीच दुनिया की सात सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले समूह (G7) ने मोर्चा संभाल लिया है। आपूर्ति का संकट दूर करने और कीमतों पर लगाम कसने के लिए G7 देशों ने अपने रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves) से लगभग 10 करोड़ बैरल तेल और ईंधन बाजार में जारी करने का फैसला लिया है।
G7 का लक्ष्य बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाकर कीमतों को नीचे खींचना है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक OPEC+ उत्पादन नहीं बढ़ाता, तब तक सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी।
आगे क्या होगी बाजार की चाल?
फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें ईरान युद्ध, होर्मुज स्ट्रेट के हालात और मध्य पूर्व से होने वाले निर्यात पर टिकी हैं। अगर जंग के कारण आपूर्ति मार्ग बाधित होता है, तो कच्चे तेल का भाव एक बार फिर नया रिकॉर्ड बना सकता है। दूसरी तरफ, G7 के रणनीतिक तेल भंडार से मिलने वाली सप्लाई से आम उपभोक्ताओं को हल्की राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। अब सभी की नजरें 1 नवंबर को होने वाली OPEC+ की अगली बैठक पर टिकी हैं, जिसमें वैश्विक ईंधन बाजार की आगे की दिशा तय होगी।