Crude Oil Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार को शुरुआती कारोबार के दौरान तेज उछाल देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया। चीन की ओर से फ्यूल एक्सपोर्ट पर लगाई गई पाबंदियों और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने तेल बाजार की चिंता बढ़ा दी है। चीन दुनिया के प्रमुख रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातकों में शामिल है।
ऐसे में उसके फ्यूल एक्सपोर्ट को सीमित करने के फैसले का असर ग्लोबल सप्लाई पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। दूसरी ओर, अमेरिका द्वारा मिडिल ईस्ट में अतिरिक्त सैन्य तैनाती पर विचार किए जाने की खबरों ने ईरान के साथ तनाव और बढ़ने की चिंता पैदा कर दी है।
ब्रेंट क्रूड में करीब 5 फीसदी उछाल
चीन के फैसले के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत में करीब 5 फीसदी की तेजी आई और यह 103 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।मार्केट की नजर फिलहाल दो प्रमुख घटनाक्रमों पर है—चीन से रिफाइंड फ्यूल की संभावित कमी और मिडिल ईस्ट में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव। चीन में गुरुवार से एक सप्ताह की छुट्टी शुरू हुई है। इसी दौरान देश ने अपनी बड़ी रिफाइनरियों को हांगकांग और मकाऊ को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में फ्यूल एक्सपोर्ट की अनुमति नहीं दी है।
चीन के फैसले से ग्लोबल सप्लाई पर दबाव
चीन की ओर से लिक्विड-फ्यूल एक्सपोर्ट पर लगाए गए प्रतिबंधों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ाई है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान से जुड़े अमेरिका-इजरायल संघर्ष शुरू होने के बाद मार्च में चीन ने फ्यूल एक्सपोर्ट पर रोक लगाई थी। जुलाई में इन प्रतिबंधों में कुछ ढील दी गई, जिसके बाद डीजल, गैसोलीन और जेट फ्यूल के निर्यात को महीने-दर-महीने नियंत्रित किया जाने लगा। अब दोबारा निर्यात पर सख्ती से बाजार में फ्यूल की उपलब्धता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। चीन की रिफाइनिंग क्षमता और उसके निर्यात का वैश्विक पेट्रोलियम बाजार पर खासा प्रभाव है।मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य गतिविधि पर नजर
इसी बीच मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिका मिडिल ईस्ट में एक तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर और करीब 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने की तैयारी कर रहा है। क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ने की खबरों के बीच ईरान के साथ तनाव को लेकर बाजार की चिंता भी बढ़ी है। इन घटनाक्रमों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि हाल के समय में मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल की सप्लाई काफी हद तक संघर्ष से पहले के स्तर के करीब पहुंची थी। बाजार अब यह आकलन कर रहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में यह सप्लाई कितनी स्थिर रह सकती है।
महंगे क्रूड से बढ़ सकता है महंगाई का दबाव
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी का असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। महंगा तेल परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ा सकता है, जिससे महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।अगर महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहती है तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपना सकते हैं। अमेरिका और जापान के केंद्रीय बैंक पहले ही दरों में बढ़ोतरी कर चुके हैं। भारत में भी रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की अगले सप्ताह बैठक होने वाली है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में मौजूदा तेजी बाजार के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम बनी हुई है।

