Crude Oil Price Today: तेल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई है। आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन गिरावट देखने को मिली है। शुरुआती कारोबार में WTI क्रूड करीब 101 डॉलर और Brent क्रूड करीब 104 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। हालांकि कीमतों में कमी आई है, लेकिन तेल अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है
सऊदी पाइपलाइन से मिली राहत
सप्लाई बढ़ने की उम्मीद से राहत
सऊदी अरब की पाइपलाइन की आधी क्षमता कुछ दिनों में फिर शुरू होने की उम्मीद है। साथ ही एशियाई देशों को अतिरिक्त तेल सप्लाई बढ़ाने की कोशिश से बाजार में सप्लाई की चिंता कम हुई है।
वहीं, मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने के लिए चल रही बातचीत से भी तेल बाजार को राहत मिली है। खाड़ी देशों के नेताओं से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संभावित मुलाकात को लेकर बाजार में सकारात्मक संकेत मिले हैं।
भारत को मिल सकती है राहत
कच्चे तेल के सस्ता होने से भारत को राहत मिल सकती है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से तेल खरीदता है, इसलिए कीमत घटने से आयात खर्च और ईंधन लागत कम हो सकती है। हाल ही में भारतीय कच्चे तेल की कीमत 115.98 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी।
तेल कंपनियों पर दबाव
अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर के आसपास बनी रहीं और पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े, तो तेल कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। महंगे क्रूड और सीमित ईंधन कीमतों के कारण सरकारी तेल कंपनियां पहले ही वित्तीय दबाव झेल रही हैं। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में तीन प्रमुख OMCs को मिलाकर करीब 74,781 करोड़ रुपए का नुकसान दर्ज हुआ था।
महंगाई पर असर
अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 95-100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहीं, तो तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है।
वहीं, तेल सस्ता होने से भारत में परिवहन खर्च, उत्पादन लागत और महंगाई कम होने में मदद मिल सकती है। लेकिन मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने पर तेल की कीमतें फिर बढ़ सकती हैं।

